Monday, June 29, 2026
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दुबई में पहली बार गैंगवार: लॉरेंस बिश्नोई गैंग के जोरा सिद्दू की गला रेतकर हत्या, रोहित गोदारा ने ली जिम्मेदारी

दुबई में पहली बार गैंगवार: लॉरेंस बिश्नोई गैंग के जोरा सिद्दू की गला रेतकर हत्या, रोहित गोदारा ने ली जिम्मेदारी

संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की चमचमाती इमारतों वाले शहर दुबई में पहली बार भारतीय गैंगवार का खौफनाक चेहरा नजर आया है। लॉरेंस बिश्नोई गैंग के कथित करीबी सहयोगी जोरा सिद्दू (उम्र अज्ञात) की बुधवार रात को गला रेतकर निर्मम हत्या कर दी गई। इस वारदात की जिम्मेदारी राजस्थान के कुख्यात गैंगस्टर रोहित गोदारा ने सोशल मीडिया पर पोस्ट और एक वायरल ऑडियो मैसेज के जरिए ले ली है। यह घटना न केवल दुबई की शांतिपूर्ण छवि को झकझोर रही है, बल्कि भारत के अंडरवर्ल्ड में चल रही गैंगवार की जंग को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैला रही है।

पुलिस और खुफिया एजेंसियों के अनुसार, हत्या दुबई के एक व्यस्त इलाके में हुई, जहां सिद्दू लॉरेंस बिश्नोई के नेटवर्क के लिए कथित तौर पर हथियारों की तस्करी और अन्य आपराधिक गतिविधियों में शामिल थे। हमलावरों ने सिद्दू पर चाकू से हमला किया और मौके से फरार हो गए। दुबई पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है, लेकिन भारतीय एजेंसियां भी इसकी निगरानी कर रही हैं, क्योंकि यह लॉरेंस बिश्नोई गैंग के आंतरिक कलह या प्रतिद्वंद्वी गुटों की साजिश का नतीजा माना जा रहा है।

रोहित गोदारा, जो लॉरेंस बिश्नोई का सबसे भरोसेमंद लेफ्टिनेंट माना जाता है, ने एक ऑडियो में कहा, “जोरा सिद्दू हमारे दुश्मनों का साथी था। उसने गैंग के खिलाफ गद्दारी की, इसलिए इसका अंजाम यही था।” गोदारा ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट भी शेयर की, जिसमें हत्या की तस्वीरें और चेतावनी दी गई है। गोदारा खुद कनाडा में छिपा हुआ है और उसके खिलाफ भारत में 30 से ज्यादा आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें सिद्धू मूसेवाला की हत्या (2022), राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना प्रमुख सुखदेव सिंह गोगामेड़ी की हत्या (2023) और सलमान खान के घर पर फायरिंग (2024) जैसे हाई-प्रोफाइल केस शामिल हैं।

लॉरेंस बिश्नोई, जो फिलहाल गुजरात के सबरमती जेल में बंद है, के गैंग की यह जंग अब वैश्विक हो चुकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि दुबई जैसे शहरों में भारतीय गैंगस्टर्स की मौजूदगी बढ़ रही है, जो ड्रग्स, हथियारों की तस्करी और जबरन वसूली के लिए इस्तेमाल हो रहे हैं। यह हत्या गैंग के आंतरिक विभाजन को भी उजागर करती है, जहां गोदारा जैसे सदस्य बिश्नोई के नाम पर स्वतंत्र रूप से ऑपरेट कर रहे हैं।

भारतीय खुफिया एजेंसियां अलर्ट पर हैं और इंटरपोल के साथ मिलकर गोदारा के प्रत्यर्पण की कोशिशें तेज कर रही हैं। दुबई पुलिस ने भारतीय दूतावास को सूचित किया है, लेकिन अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है। यह घटना सवाल खड़ी करती है कि क्या विदेशी धरती पर भारतीय गैंगवार को रोकने के लिए सख्त अंतरराष्ट्रीय सहयोग की जरूरत है?

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