कंगना रनौत पर चलेगा राष्ट्रद्रोह का मुकदमा: किसान आंदोलन पर विवादित बयान से मचा बवाल, आगरा कोर्ट ने याचिका स्वीकार की
कंगना रनौत पर चलेगा राष्ट्रद्रोह का मुकदमा: किसान आंदोलन पर विवादित बयान से मचा बवाल, आगरा कोर्ट ने याचिका स्वीकार की
बॉलीवुड अभिनेत्री और हिमाचल प्रदेश के मंडी से बीजेपी सांसद कंगना रनौत की मुश्किलें बढ़ गई हैं। आगरा की विशेष एमपी-एमएलए अदालत ने बुधवार (12 नवंबर) को उनके खिलाफ किसान आंदोलन पर दिए विवादित बयानों को लेकर दायर राष्ट्रद्रोह की याचिका स्वीकार कर ली। कोर्ट ने रिवीजन याचिका को मंजूर करते हुए निचली अदालत में मुकदमा चलाने का आदेश दिया है। अगली सुनवाई 29 नवंबर को होगी, जिसमें कंगना को पेश होने का नोटिस जारी हो सकता है।
विवाद का केंद्र: कंगना का बयान
यह मामला 26 अगस्त 2024 को दैनिक भास्कर को दिए एक इंटरव्यू से जुड़ा है। कंगना ने कहा था, “किसान आंदोलन के दौरान रेप और मर्डर हुए थे। अगर तीन कृषि बिल वापस न होते, तो पंजाब को बांग्लादेश जैसा बना दिया जाता।” उन्होंने सोशल मीडिया पर भी किसान नेता बीबी महिंदर कौर की फोटो शेयर कर लिखा कि आंदोलनकारी ‘100-100 रुपये में’ आए थे। साथ ही, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी पर भी अभद्र टिप्पणी का आरोप है।
शिकायतकर्ता वकील रमाशंकर शर्मा (राजीव गांधी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष) ने 11 सितंबर 2024 को आगरा कोर्ट में याचिका दाखिल की। उन्होंने बीएनएस धारा 356 (राष्ट्रद्रोह) और 152 (राष्ट्र अपमान) के तहत मुकदमा दर्ज करने की मांग की। शर्मा ने कहा, “मैं खुद किसान परिवार से हूं। कंगना के बयान ने लाखों किसानों की भावनाओं को ठेस पहुंचाई और देश की एकता को खतरा पैदा किया।” निचली अदालत ने 6 मई 2025 को याचिका खारिज कर दी थी, लेकिन रिवीजन पर सत्र न्यायालय ने बहस के बाद इसे स्वीकार किया।
कानूनी और राजनीतिक निहितार्थ
यह कंगना का पहला ऐसा मामला नहीं है। 2020-21 के किसान आंदोलन के दौरान उन्होंने किसानों को ‘खालिस्तानी आतंकवादी’ कहा था, जिससे कई FIR दर्ज हुईं। हाल ही में हिमाचल में डिफेमेशन केस में उन्हें जमानत मिली, जहां माफी मांगी गई। अब यह केस अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बनाम जवाबदेही के बहस को हवा दे रहा है। विपक्षी दलों ने इसे ‘राजनीतिक प्रतिशोध’ बताया, जबकि बीजेपी समर्थक इसे ‘फर्जी केस’ कह रहे हैं।
कंगना की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह केस लंबा चलेगा, और सुप्रीम कोर्ट के 2022 के फैसले (राष्ट्रद्रोह कानून पर रोक) के बाद इसका आधार कमजोर हो सकता है। किसानों के सम्मान और सांसदों की जिम्मेदारी पर बहस तेज हो गई है। अपडेट्स के लिए आधिकारिक स्रोत फॉलो करें।
