अल-फलाह यूनिवर्सिटी: शिक्षा का मंदिर या साजिशों का अड्डा? दिल्ली ब्लास्ट के बाद हर जुबान पर नाम, जानिए इसके कर्ताधर्ताओं का रहस्य
अल-फलाह यूनिवर्सिटी: शिक्षा का मंदिर या साजिशों का अड्डा? दिल्ली ब्लास्ट के बाद हर जुबान पर नाम, जानिए इसके कर्ताधर्ताओं का रहस्य
कल्पना कीजिए, एक शांत कैंपस जहां सुबह की पहली किरणें हरे-भरे 70 एकड़ के मैदान पर पड़ती हैं। छात्र हंसते-मुस्कुराते क्लासरूम की ओर बढ़ते हैं, प्रोफेसर लेक्चर देते हैं, और दूर अरावली की पहाड़ियां शांति का संदेश देती हैं। लेकिन 10 नवंबर की शाम, जब दिल्ली के लाल किले के पास एक ह्युंडई i20 कार धमाके से उड़ गई, तो यह idyllic तस्वीर चूर-चूर हो गई। 13 जिंदगियां छिन गईं, 25 से ज्यादा लोग घायल हुए, और सारा निशाना पड़ गया फरीदाबाद के धौज गांव में बसी अल-फलाह यूनिवर्सिटी पर। क्यों? क्योंकि गिरफ्तार चार डॉक्टरों – मुजम्मिल शकील, उमर मोहम्मद, शाहीन सिद्दीकी और आदिल मजीद – में से तीन इसी यूनिवर्सिटी से जुड़े थे। सोशल मीडिया पर #AlFalahTerrorFactory ट्रेंड कर रहा है, और सवाल उठ रहे हैं: क्या यह शिक्षा का केंद्र है या ‘व्हाइट-कॉलर’ आतंकवाद का लॉन्चपैड? आइए, इस रहस्यमयी संस्थान की परतें खोलते हैं – रोचक कहानी में लिपटी, लेकिन गंभीर सच्चाई के साथ।
अल-फलाह की शुरुआत एक नेक ख्वाहिश से हुई थी। 1997 में, जब भारत में प्राइवेट इंजीनियरिंग कॉलेजों का दौर शुरू ही हो रहा था, अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट ने फरीदाबाद के धौज में ‘अल-फलाह स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी’ की नींव रखी। ट्रस्ट का मकसद था: मेहता बेल्ट (मेवात) के अल्पसंख्यक और पिछड़े मुस्लिम युवाओं को सस्ती, क्वालिटी एजुकेशन देना। यह इलाका, जहां साक्षरता दर आज भी राष्ट्रीय औसत से नीचे है, के लिए यह एक मील का पत्थर था। 2006 में एजुकेशन स्कूल, 2008 में ब्राउन हिल कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग जुड़े। फिर 2014 में, हरियाणा विधानसभा के एक्ट 21 के तहत यह पूर्ण यूनिवर्सिटी बन गई – यूजीसी मान्यता प्राप्त, एनएएसी से ‘A’ ग्रेड वाली। आज यहां 20+ कोर्स हैं: इंजीनियरिंग, मेडिसिन, मैनेजमेंट, एजुकेशन। मेडिकल कॉलेज 2019 से एमबीबीएस चला रहा है, 650 बेड का फ्री हॉस्पिटल भी। छात्रों में 40% कश्मीर से, बाकी बिहार, यूपी और लोकल। फीस? बीटेक के लिए 80,000-3.4 लाख सालाना – जामिया या अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी का सस्ता विकल्प।
लेकिन अब सवाल उठता है: इसके पीछे कौन हैं? कर्ताधर्ता कौन? अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट दिल्ली के ओखला में रजिस्टर्ड है, और इसका चेयरमैन हैं जावेद अहमद सिद्दीकी (कुछ स्रोतों में जावहर अहमद सिद्दीकी या एम. सिद्दीकी)। वे चांसलर भी हैं। सिद्दीकी एक प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता हैं, जिन्होंने 1990s में शिक्षा के क्षेत्र में कदम रखा। ट्रस्ट की वेबसाइट के मुताबिक, उनका विजन है ‘माइनॉरिटी एम्पावरमेंट’ – खासकर मुस्लिम लड़कियों और ग्रामीण युवाओं के लिए। वर्तमान वाइस-चांसलर हैं डॉ. भूपिंदर कौर आनंद, जो मेडिकल कॉलेज की प्रिंसिपल भी हैं। रिक्रूटमेंट ओखला हेडऑफिस से होती है, जहां सिद्दीकी के सहयोगी इरफान और राजी की भूमिका अहम है। ट्रस्ट को विदेशी फंडिंग मिलती है – अरब देशों से, जो सालाना कैंपस विजिट करते हैं। एनएसआईसी (गवर्नमेंट ऑफ इंडिया) से टाई-अप, लोकल इंडस्ट्रीज जैसे FIA से पार्टनरशिप – सब कुछ वैध लगता है। लेकिन ब्लास्ट के बाद, ये फंडिंग सोर्स सवालों के घेरे में हैं। क्या ये नेक इरादे थे, या छिपी साजिश?
अब आते हैं उस काले अध्याय पर, जो पूरी कहानी को डरावना रंग दे देता है। 10 नवंबर की सुबह, जम्मू-कश्मीर पुलिस, हरियाणा STF और IB की जॉइंट ऑपरेशन में फरीदाबाद के फतेहपुर तगा गांव में 2,900 किलो अमोनियम नाइट्रेट, AK-47 राइफल, 20 टाइमर्स और IED कंपोनेंट्स जब्त हुए। किराए के दो कमरों से – जो डॉ. मुजम्मिल शकील के नाम पर थे। मुजम्मिल? अल-फलाह मेडिकल कॉलेज का असिस्टेंट प्रोफेसर, कश्मीरी मूल का। उसी शाम, लाल किले के पास i20 ब्लास्ट। ड्राइवर? डॉ. उमर मोहम्मद, भी अल-फलाह का असिस्टेंट प्रोफेसर। तीसरी, डॉ. शाहीन सिद्दीकी – लखनऊ की, लेकिन यूनिवर्सिटी से लिंक्ड। चौथा, डॉ. आदिल मजीद। एनआईए की जांच में सामने आया: ये ‘व्हाइट-कॉलर टेरर मॉड्यूल’ जैश-ए-मोहम्मद (JeM) और अंसार गजवत-उल-हिंद (AGH) से जुड़ा। टेलीग्राम ग्रुप्स पर रेडिकलाइजेशन, पाकिस्तानी हैंडलर्स से चैट्स। प्लान? 26 जनवरी पर रेड फोर्ट पर बड़ा धमाका, दिवाली पर भीड़भाड़ वाली जगहें। रेकी जनवरी से। i20 कार? यूनिवर्सिटी कैंपस में 10 दिन पार्क थी। लैब्स? संदेह है कि वहां RDX जैसा एडवांस्ड एक्सप्लोसिव बनाया गया।
यूनिवर्सिटी ने सफाई दी: “हमारा केवल प्रोफेशनल रिलेशन था। निजी मामलों से कोई लेना-देना नहीं।” वीसी आनंद ने कहा, “हम व्यथित हैं, निंदा करते हैं।” लेकिन सवाल बाकी: 40% कश्मीरी डॉक्टर्स? क्यों? रेडिकलाइजेशन के सबूत? वेबसाइट हैक हो गई – ‘इंडियन साइबर अलायंस’ ने चेतावनी दी, “रैडिकल एक्टिविटीज बंद करो।” सोशल मीडिया पर बहस: “टेरर फैक्ट्री” vs “बेकसूर संस्थान।” एनआईए छापे मार रही, 8 गिरफ्तारियां हो चुकीं। पीएम मोदी ने LNJP जाकर घायलों से मिले, गृह मंत्री शाह CCS मीटिंग बुलाई।
यह घटना सिर्फ एक ब्लास्ट नहीं, बल्कि सिस्टम की खामियों का आईना है। शिक्षा और आतंक का तालमेल – कितना खतरनाक? अल-फलाह जैसे संस्थान अच्छे इरादों से बने, लेकिन अगर निगरानी न हो, तो जहर फैलाते हैं। सिद्दीकी जैसे कर्ताधर्ताओं को सफाई देनी होगी। क्या यूनिवर्सिटी बंद होगी? जांच जारी है। लेकिन एक बात साफ: राष्ट्रीय सुरक्षा से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं। क्या आपका पड़ोसी कैंपस सुरक्षित है? सोचिए।
