वर्ल्ड कप विजेता स्नेह राणा का देहरादून में भव्य स्वागत: ढोल-नगाड़ों के साथ फूलों की वर्षा
वर्ल्ड कप विजेता स्नेह राणा का देहरादून में भव्य स्वागत: ढोल-नगाड़ों के साथ फूलों की वर्षा
भारतीय महिला क्रिकेट टीम की स्टार स्पिनर स्नेह राणा शनिवार को ICC महिला वर्ल्ड कप 2025 की ऐतिहासिक जीत के बाद देहरादून लौटीं, तो शहर ने उन्हें रानी का दर्जा दे दिया। देहरादून एयरपोर्ट से निकलते ही ढोल-नगाड़ों की थाप, फूलों की वर्षा और हजारों प्रशंसकों की भीड़ ने उनका स्वागत किया। स्नेहा, जो उत्तराखंड की बेटी और देहरादून के सिनोला गांव की रहने वाली हैं, ने वर्ल्ड कप में शानदार प्रदर्शन कर देश को गौरवान्वित किया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पहले ही उन्हें 50 लाख रुपये का इनाम घोषित कर चुके हैं, और स्वागत समारोह में यह चेक सौंपा गया। यह क्षण न सिर्फ स्नेहा की जीत का जश्न था, बल्कि उत्तराखंड की बेटियों के सशक्तिकरण का प्रतीक भी।
स्नेहा का सफर प्रेरणादायक है। 31 वर्षीय स्नेहा ने वर्ल्ड कप फाइनल में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 3 विकेट लिए, और पूरे टूर्नामेंट में 18 विकेट झटककर प्लेयर ऑफ द मैच का खिताब जीता। शुरुआत में तेज गेंदबाज बनने का सपना देखने वाली स्नेहा कोच की सलाह पर स्पिनर बनीं, और 2014 में श्रीलंका के खिलाफ डेब्यू किया। घुटने की चोट के कारण 5 साल का ब्रेक लिया, लेकिन 2021 में कमबैक कर इंग्लैंड टेस्ट में 80 रन और 4 विकेट लेकर इतिहास रचा। देहरादून में उनके पिता के निधन के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी।
एयरपोर्ट पर पहुंचते ही स्नेहा को स्थानीय कलाकारों ने गढ़वाल लोक नृत्य से सम्मानित किया। प्रशंसक ‘स्नेहा रानी’ के नारों से गूंज उठे। CM धामी ने फोन पर बधाई दी थी, और आज समारोह में कहा, “स्नेहा उत्तराखंड की शान हैं। उनकी सफलता हमारी बेटियों के लिए मिसाल है। सरकार खेल सुविधाओं पर 100 करोड़ खर्च कर रही है।” स्नेहा ने भावुक होकर कहा, “यह जीत मेरे परिवार, कोच और देहरादून की मिट्टी की देन है। 8 नवंबर को लौटने का वादा निभाया। अब युवा लड़कियों को क्रिकेट सिखाऊंगी।”
यह स्वागत उत्तराखंड के खेल विभाग का भी प्रयास था, जहां स्पोर्ट्स मिनिस्टर रीना धीमान ने घोषणा की कि स्नेहा के नाम पर देहरादून में एक क्रिकेट अकादमी बनेगी। स्नेहा ने कहा, “क्रिकेट ने मुझे नई जिंदगी दी। अब बेटियों को आगे बढ़ने का हौसला दूंगी।”
यह जीत महिला क्रिकेट को नई ऊंचाई देगी। स्नेहा का यह स्वागत न सिर्फ व्यक्तिगत विजय का उत्सव था, बल्कि पूरे उत्तराखंड के लिए प्रेरणा।
