किडनी फेलियर के संकेत: हाथ-पैरों में ये 7 अजीब लक्षण नजरअंदाज न करें, तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें
किडनी फेलियर के संकेत: हाथ-पैरों में ये 7 अजीब लक्षण नजरअंदाज न करें, तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें
किडनी की खराबी आजकल आम समस्या बन गई है, लेकिन शुरुआती चरणों में इसके लक्षण इतने हल्के होते हैं कि लोग इन्हें नजरअंदाज कर देते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, किडनी फेलियर या क्रॉनिक किडनी डिजीज (सीकेडी) के 90% केस डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर या अनियमित लाइफस्टाइल से जुड़े होते हैं। खतरनाक बात यह है कि जब किडनी ठीक से काम नहीं करती, तो शरीर में टॉक्सिन्स और अतिरिक्त फ्लूइड जमा हो जाते हैं, जो हाथ-पैरों में असामान्य संकेत दिखाते हैं। नेशनल किडनी फाउंडेशन के अनुसार, भारत में हर साल लाखों लोग किडनी फेलियर का शिकार हो रहे हैं, लेकिन समय पर पहचान से इसे रोका जा सकता है। आइए जानते हैं उन 7 अजीब लक्षणों के बारे में जो हाथ-पैरों में नजर आते हैं—इन्हें अनदेखा करने का मतलब हो सकता है जानलेवा खतरा।
सबसे पहला और आम संकेत है सूजन (एडिमा)। किडनी अतिरिक्त पानी और नमक को बाहर नहीं निकाल पाती, जिससे हाथ, पैर, टखनों और कलाईयों में सूजन हो जाती है। सुबह उठते ही चेहरे या आंखों के आसपास पफीनेस महसूस हो सकती है। अगर आपके जूते या अंगूठी पहले जैसी ढीली न लगे, तो यह चेतावनी है। वेबएमडी के अनुसार, यह फ्लूइड रिटेंशन का परिणाम है, जो किडनी फेलियर के शुरुआती स्टेज में 70% मरीजों में देखा जाता है।
दूसरा लक्षण झुनझुनी या सुन्न होना। हाथ-पैरों में चुभन, जलन या बेजान सा महसूस होना पेरिफेरल न्यूरोपैथी का संकेत है। किडनी खराब होने से ब्लड में यूरिया और टॉक्सिन्स बढ़ जाते हैं, जो नसों को नुकसान पहुंचाते हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में कहा गया है कि यह शुरुआती किडनी डिजीज का प्रमुख संकेत है, खासकर डायबिटिक मरीजों में।
तीसरा, मांसपेशियों में ऐंठन। रात में पैरों या हाथों में अचानक क्रैंप्स आना सामान्य नहीं है। किडनी इलेक्ट्रोलाइट्स जैसे पोटैशियम और कैल्शियम का बैलेंस नहीं रख पाती, जिससे मसल्स कठोर हो जाते हैं। क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, यह किडनी फेलियर के एडवांस्ड स्टेज में आम है, लेकिन शुरुआत में भी दिख सकता है।
चौथा संकेत ठंडक महसूस होना। हाथ-पैर हमेशा ठंडे रहना या गर्म कपड़ों में भी सिहरन आना एनीमिया का लक्षण है। किडनी एरिथ्रोपोएटिन हार्मोन कम बनाती है, जो रेड ब्लड सेल्स बढ़ाता है। इससे ऑक्सीजन सप्लाई कम हो जाती है। मेडलाइफ गाइड बताता है कि किडनी फेलियर वाले 80% मरीजों में यह समस्या होती है।
पांचवां, त्वचा में खुजली या रूखापन। हाथ-पैरों की स्किन ड्राई, खुरदरी या लगातार खुजली वाली हो जाना फॉस्फोरस लेवल बढ़ने से होता है। किडनी मिनरल्स को कंट्रोल नहीं कर पाती। नेशनल किडनी फाउंडेशन के मुताबिक, यह किडनी डिजीज का ‘साइलेंट किलर’ संकेत है।
छठा लक्षण नीले या बैंगनी धब्बे। दुर्लभ मामलों में, पैरों की त्वचा पर लेस जैसी बैंगनी लाइन्स या नीले पैर दिखना एथेरोएम्बोलिक किडनी डिजीज का संकेत है। मर्क मैनुअल के अनुसार, यह ब्लड वेसल्स में ब्लॉकेज से जुड़ा होता है।
सातवां, कमजोरी या थकान। हाथ-पैर भारी लगना या चलने में दिक्कत आना टॉक्सिन बिल्डअप से होता है। लाइफ ऑप्शंस के अनुसार, यह किडनी फेलियर का शुरुआती वॉर्निंग साइन है।
ये लक्षण अकेले या साथ में दिख सकते हैं, लेकिन इन्हें हल्के में न लें। अगर आप डायबिटीज, हाई बीपी या फैमिली हिस्ट्री वाले हैं, तो सालाना ब्लड और यूरिन टेस्ट करवाएं। शुरुआती स्टेज में डाइट चेंज, दवाएं और लाइफस्टाइल सुधार से किडनी को बचाया जा सकता है। डॉक्टर से संपर्क करें—समय पर इलाज से डायलिसिस या ट्रांसप्लांट की जरूरत टल सकती है। याद रखें, किडनी साइलेंट ऑर्गन है, लेकिन ये संकेत चीख-चीखकर बता रहे हैं!
