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यूपी से लंदन तक फैला नेटवर्क: मौलाना शमशुल हुदा पर पाकिस्तान से फंडिंग और रेडिकलाइजेशन के गंभीर आरोप

यूपी से लंदन तक फैला नेटवर्क: मौलाना शमशुल हुदा पर पाकिस्तान से फंडिंग और रेडिकलाइजेशन के गंभीर आरोप

उत्तर प्रदेश के संत कबीर नगर जिले में मस्जिदों और मदरसों के नाम पर विदेशी फंडिंग का काला कारोबार उजागर हो गया है। ब्रिटिश नागरिक मौलाना शमशुल हुदा खान पर पाकिस्तान के विवादास्पद संगठन दावत-ए-इस्लामी से सीधा संबंध होने का खुलासा हुआ है। यूपी एटीएस की जांच में 4 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध विदेशी फंडिंग सामने आने के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज कर लिया है। लंदन में रहते हुए शमशुल हुदा ने साउथ अफ्रीका और पाकिस्तान में बैठकें आयोजित कीं, जहां ‘फ्री कश्मीर’ के नारे लगवाए गए। एटीएस के अनुसार, यह नेटवर्क भारत में ‘इस्लामीकरण’ को बढ़ावा देने का प्रयास था, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है।

मौलाना शमशुल हुदा खान मूल रूप से आजमगढ़ के रहने वाले हैं, जिन्होंने 1984 में आजमगढ़ के मदरसा दारुल उलूम अहले सुन्नत अशरफिया मुरादपुर में सहायक शिक्षक के रूप में नौकरी शुरू की। कागजों में वे आजमगढ़ में ही तैनात दिखाए गए, लेकिन वास्तव में लंदन शिफ्ट हो चुके थे। एटीएस की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने ‘कुल्लियातुल बनातिर रजविया एजुकेशनल एंड वेलफेयर सोसाइटी’ और ‘रजा फाउंडेशन’ नामक दो संस्थाएं खड़ी कीं, जिनके जरिए विदेश से फंड चैनलाइज किया गया। जांच में पाया गया कि सैलरी बढ़ाने के बहाने उन्होंने फर्जी दस्तावेज तैयार किए, जबकि असल में वे धार्मिक प्रचार के नाम पर विदेश यात्राएं कर रहे थे। साउथ अफ्रीका और लंदन की यात्राओं के दौरान पाकिस्तान के संपर्कों से पैसे इकट्ठा किए गए, जिनमें से एक हिस्सा कमीशन के रूप में उनके पास पहुंचा।

पाकिस्तान कनेक्शन सबसे चौंकाने वाला है। दावत-ए-इस्लामी, जो कराची से संचालित एक सुन्नी संगठन है, पर भारत में रेडिकलाइजेशन के आरोप पहले से लगे हैं। उदाहरण के लिए, उदयपुर में कन्हैया लाल हत्याकांड के आरोपी घौस मोहम्मद का इससे लिंक मिला था, जो 2014 में पाकिस्तान गए थे। इसी तरह, गुजरात एटीएस ने 2022 में दावत-ए-इस्लामी के डोनेशन बॉक्स जब्त किए, जो ‘गजवा-ए-हिंद’ (भारत को इस्लामी राष्ट्र बनाने) के एजेंडे को बढ़ावा देते थे। शमशुल हुदा पर भी कश्मीर और पाकिस्तान के संदिग्ध तत्वों से संपर्क रखने का आरोप है। वे सोशल मीडिया और कंप्यूटर के जरिए कश्मीर में एक्सट्रीमिस्ट विचारधारा फैला रहे थे। एटीएस ने उनकी यात्राओं का रिकॉर्ड खंगाला, जिसमें पाकिस्तान और जम्मू-कश्मीर के दौरों के दौरान ‘फ्री कश्मीर’ वाली बैठकों के सबूत मिले।

ईडी की जांच में फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट (FEMA) 1999 और भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत कार्रवाई शुरू हो गई है। संत कबीर नगर के जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी प्रवीण कुमार मिश्रा ने 2 नवंबर को खलीलाबाद थाने में एफआईआर दर्ज कराई। इसके बाद मदरसा कुल्लियातुल बनातिर रजविया (निस्वा) को सील कर दिया गया, जो शमशुल के बेटे द्वारा अवैध रूप से चलाया जा रहा था। आजमगढ़ के एक अन्य मदरसे की मान्यता भी रद्द हो चुकी है। एटीएस के एडीजी यश ने कहा, “यह धार्मिक प्रचार का बहाना था, लेकिन पीछे साजिश थी। विदेशी फंड का इस्तेमाल मस्जिदों के निर्माण में हुआ, लेकिन हिस्सा निजी फायदे के लिए डायवर्ट किया गया।”

विशेषज्ञों का मानना है कि यह केस भारत में विदेशी फंडिंग के जरिए रेडिकल एजेंडे को उजागर करता है। दावत-ए-इस्लामी खुद को गैर-राजनीतिक बताती है, लेकिन इसके सदस्यों का इतिहास विवादास्पद रहा है—फ्रांस में चार्ली हेब्दो अटैक के आरोपी तक इससे जुड़े पाए गए। यूपी सरकार ने न्यायिक जांच का आदेश दिया है, जबकि शमशुल हुदा पर दो पुरानी एफआईआर पहले से लंबित हैं। फिलहाल, वे लंदन में हैं, लेकिन प्रत्यर्पण की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा को दांव पर लगा सकता है, और पूरे देश की नजरें ईडी की अगली रिपोर्ट पर टिकी हैं।

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