गुरु नानक जयंती 2025: पाकिस्तान ने 14 भारतीय हिंदू श्रद्धालुओं को वाघा बॉर्डर पर रोका, कहा “तुम सिख नहीं हो”: जाने पूरा मामला
गुरु नानक जयंती 2025: पाकिस्तान ने 14 भारतीय हिंदू श्रद्धालुओं को वाघा बॉर्डर पर रोका, कहा “तुम सिख नहीं हो”: जाने पूरा मामला
गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व (जयंती) 2025 के एक दिन पहले, 4 नवंबर को वाघा-अटारी बॉर्डर पर हजारों भारतीय श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव जी की जयंती मनाने के लिए पाकिस्तान जाने वाले जत्थे में सिखों के साथ-साथ हिंदू श्रद्धालु भी शामिल थे। लेकिन पाकिस्तानी अधिकारियों ने सिखों का फूल-मालाओं से स्वागत किया, जबकि 14 हिंदू श्रद्धालुओं को अपमानित कर वापस भेज दिया। यह घटना भारत में रोष का कारण बनी है। आइए, इस पूरे विवाद को विस्तार से समझते हैं।
घटना का पूरा विवरण
जत्थे का आकार और संरचना: भारत से लगभग 1,932 सिख श्रद्धालुओं का पहला जत्था (SGPC के नेतृत्व में) 4 नवंबर को अमृतसर से रवाना हुआ। इसमें सिखों के अलावा 14 हिंदू श्रद्धालु भी थे, जो गुरु नानक जी के प्रति श्रद्धा रखते हैं। ये हिंदू मुख्य रूप से दिल्ली और लखनऊ से थे – इनमें 7 सदस्यों का एक परिवार (पाकिस्तानी मूल के सिंधी, जो बाद में भारतीय नागरिक बने) और अन्य 7 यात्री शामिल थे। वे ननकाना साहिब गुरुद्वारा जाकर जयंती मनाना चाहते थे।
बॉर्डर पर क्या हुआ?: वाघा बॉर्डर पहुंचने पर पाकिस्तानी इमिग्रेशन अधिकारियों और रेंजर्स ने सिख श्रद्धालुओं को गर्मजोशी से प्रवेश दिया। लेकिन हिंदू यात्रियों को रोक लिया गया। अधिकारियों ने उन्हें कहा, “तुम सिख नहीं हो… तुम हिंदू हो, इसलिए सिख जत्थे के साथ नहीं जा सकते। वापस जाओ, अपने मंदिर में प्रार्थना करो।” एक यात्री ने बताया, “हमें अपमानित किया गया। हमारे पास वैध वीजा और यात्रा दस्तावेज थे, फिर भी हमें लौटा दिया।” ये 14 यात्री ननकाना साहिब जाने के बजाय खाली हाथ लौट आए।
पाकिस्तान का आधिकारिक तर्क: पाकिस्तानी पक्ष ने इसे “तकनीकी नियम” बताया। उनका कहना है कि करतारपुर कॉरिडोर और ननकाना साहिब यात्रा केवल सिख तीर्थयात्रियों के लिए आरक्षित है, और हिंदुओं को अलग वीजा प्रक्रिया (जैसे पाकिस्तान वीजा ऑन अराइवल) से जाना पड़ता है। लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन यात्रियों को पहले ही वीजा जारी हो चुका था, फिर भी उन्हें रोका गया।
क्यों है यह विवादास्पद?
धार्मिक भेदभाव का आरोप: गुरु नानक देव जी का संदेश “सभी धर्मों की एकता” और “मानवता सर्वोपरि” है। हिंदू श्रद्धालु भी उन्हें अपना गुरु मानते हैं, लेकिन पाकिस्तान का यह फैसला धार्मिक असहिष्णुता को दर्शाता है। एक प्रभावित परिवार के सदस्य ने कहा, “हम पाकिस्तान से हैं, लेकिन भारतीय बने। रिश्तेदारों से मिलने गए थे, लेकिन धर्म के नाम पर अपमान मिला।”
पिछले संदर्भ: यह पहली घटना नहीं है। 2019 में करतारपुर कॉरिडोर खुलने के बाद से वीजा मुद्दे चले आ रहे हैं। लेकिन जयंती जैसे पवित्र अवसर पर यह कदम शांति प्रयासों पर सवाल खड़े करता है। इसके अलावा, 300 अन्य स्वतंत्र वीजा आवेदकों को भी अटारी पर रोका गया।
भारतीय पक्ष की प्रतिक्रिया
सरकारी बयान: भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने पाकिस्तान को कड़ा संदेश दिया, “यह कॉरिडोर शांति का प्रतीक था, लेकिन अब भेदभाव का हथियार बन गया। हम अपने नागरिकों के धार्मिक अधिकारों की रक्षा करेंगे।” पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने ट्वीट किया, “गुरु नानक जी सबके हैं, पाकिस्तान का यह व्यवहार शर्मनाक है।”
सिख संगठनों का रुख: शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) ने कॉरिडोर नियमों में बदलाव की मांग की, ताकि सभी धर्मों के श्रद्धालु जा सकें। दिल्ली सिख गुरुद्वारा कमेटी ने भी निंदा की।
कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया कि यह घटना भारत-पाकिस्तान संबंधों को और खराब करेगी।
ननकाना साहिब और करतारपुर कॉरिडोर का महत्व
ननकाना साहिब (पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में) गुरु नानक देव जी का जन्मस्थान है। करतारपुर कॉरिडोर (2019 में खुला) इसे भारत से जोड़ता है, जहां गुरु जी ने 18 साल बिताए। यह कॉरिडोर साल भर सिखों के लिए खुला है, लेकिन इस घटना ने इसकी भावना को ठेस पहुंचाई।
यह घटना प्रकाश पर्व की पवित्रता पर दाग लगा रही है। उम्मीद है कि कूटनीतिक स्तर पर यह सुलझे और भविष्य में सभी श्रद्धालुओं को समान अवसर मिले। गुरु नानक देव जी का संदेश याद रखें: “न कोई हिंदू, न मुसलमान”।
