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वकील गैंग का साथी, शाही शादी का राज; योगी सरकार के निशाने पर 100 करोड़ का DSP

उत्तर प्रदेश पुलिस में भ्रष्टाचार का एक और बड़ा कांड सामने आ गया है, जिसमें कानपुर के चर्चित डीएसपी ऋषिकांत शुक्ला को आय से अधिक संपत्ति के आरोप में निलंबित कर दिया गया है। विशेष जांच दल (एसआईटी) की रिपोर्ट के मुताबिक, शुक्ला ने कानपुर में तैनाती के दौरान कानून के रखवालों से उलट भूमिका निभाई—वकीलों के एक गिरोह के साथ मिलकर फर्जी मुकदमे गढ़े, जबरन वसूली की और जमीन हड़प ली, जिससे करीब 100 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति खड़ी हो गई। यह मामला 4 नवंबर 2025 को तब सुर्खियों में आया, जब योगी आदित्यनाथ सरकार ने सख्त कार्रवाई करते हुए उन्हें निलंबित किया और विजिलेंस जांच के आदेश दिए।

भ्रष्टाचार की क्राइम कुंडली: वकील गैंग से गठजोड़

एसआईटी की जांच में खुलासा हुआ कि डीएसपी शुक्ला का कानपुर के कुख्यात वकील अखिलेश दुबे के गैंग से गहरा नाता था, जो झूठे केस चला कर लोगों से उगाही करता था। दुबे जेल में बंद अपराधी है, लेकिन उसके सहयोगी वकीलों के जरिए शुक्ला बिल्डरों और व्यापारियों को एनकाउंटर का डर दिखाकर करोड़ों वसूलते थे। एक पीड़ित मनोहर शुक्ला ने आरोप लगाया कि डीएसपी ने जमीन डील में हिस्सेदारी देने के बाद पिस्तौल लहराते हुए कहा, “अब कुछ नहीं मिलेगा, एनकाउंटर करा देंगे।” जांच में 92 करोड़ की अचल संपत्तियां सामने आईं—आर्यनगर में 11 पॉश दुकानें, आर नगर में चार मंजिला इमारतें, गेस्ट हाउस, रियल एस्टेट प्रोजेक्ट और कंस्ट्रक्शन कंपनियों में हिस्सेदारी। शुक्ला की पत्नी (या जिसे वे पत्नी बताते हैं) का नाम एक बड़ी कंस्ट्रक्शन फर्म में दर्ज है, जहां अन्य पुलिस अधिकारियों के साथ मिलीभगत से करोड़ों के प्रोजेक्ट हथियाए गए। शुक्ला ने सफाई दी कि ये संपत्तियां पैतृक हैं और उनके दादा (पूर्व इंस्पेक्टर) की विरासत हैं, लेकिन जांच एजेंसी इसे बेनामी बताती है।

शाही शादी: 200 करोड़ के रिसॉर्ट में अफसर-नेताओं का जलवा

शुक्ला के भ्रष्टाचार का सबसे चमकदार चेहरा उनके बेटे की मार्च 2025 में हुई शादी है, जो कानपुर के इटरनिटी रिसॉर्ट (मूल्य 200 करोड़ रुपये) में आयोजित हुई। यह ‘शाही विवाह’ इतना भव्य था कि एडीजी, एसपी रैंक के आईपीएस अधिकारी, सांसद और विधायक बारात में जमकर नाचे। रिसॉर्ट बुकिंग, डेकोरेशन, खानपान और मेहमानों के ठहरने पर करोड़ों खर्च हुए, लेकिन शुक्ला का दावा है कि “शादी लड़कीवालों ने की, मैं तो सिर्फ बारात लेकर गया था।” विजिलेंस अब इसकी जांच कर रही है—खर्च का स्रोत क्या था? बेनामी लेन-देन तो नहीं? कई लोग सवाल उठा रहे हैं कि अगर सब लड़की पक्ष का था, तो इतने बड़े अफसर-नेताओं की उपस्थिति क्यों? यह शादी शुक्ला की ‘सल्तनत’ का प्रतीक बनी हुई है, जहां 28 साल की सेवा (8 साल दारोगा, 3 साल इंस्पेक्टर, 17 साल डीएसपी) में रियल एस्टेट बूम वाले जिलों की पोस्टिंग ने उन्हें अमीर बना दिया।

सरकार की कार्रवाई और राजनीतिक रंग

योगी सरकार ने तत्कालीन कानपुर पुलिस कमिश्नर अखिल कुमार की रिपोर्ट पर एक्शन लिया। मैनपुरी के भोगांव में सीओ तैनात शुक्ला को निलंबित कर विभागीय जांच शुरू हो गई है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इसे भाजपा सरकार पर हमला करार दिया, कहा कि “पुलिस में भ्रष्टाचार का ठेका बीजेपी ने लिया है।” शुक्ला का कहना है कि गैंग्स के खिलाफ उनकी सख्ती से दुश्मन फंसाने की साजिश रच रहे हैं। एक और ट्विस्ट: शुक्ला ने अपनी ‘पत्नी’ प्रभा शुक्ला को नकारा, कहा “वो मेरी पत्नी नहीं, मैं बारात में सिर्फ मेहमान था।”

यह मामला यूपी पुलिस की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा कर रहा है। एसआईटी और विजिलेंस की जांच आगे बढ़ेगी, जिसमें तीन अन्य संपत्तियां (पैन से जुड़ी) भी सत्यापित होंगी। भ्रष्टाचार के इस ‘100 करोड़ के साम्राज्य’ का पर्दाफाश न सिर्फ शुक्ला को, बल्कि पूरे सिस्टम को झकझोर रहा है। आने वाले दिनों में और खुलासे संभव हैं।

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