हरिद्वार में बुलडोजर की कार्रवाई: अवैध मजार ध्वस्त, CM धामी के निर्देशों पर सरकारी भूमि पर अभियान तेज, दो बीघा अतिक्रमण पर शिकंजा
हरिद्वार में बुलडोजर की कार्रवाई: अवैध मजार ध्वस्त, CM धामी के निर्देशों पर सरकारी भूमि पर अभियान तेज – दो बीघा अतिक्रमण पर शिकंजा
उत्तराखंड के हरिद्वार जिले में सरकारी भूमि पर अवैध निर्माण के खिलाफ प्रशासन का अभियान जोर पकड़ चुका है। मंगलवार को रानीपुर कोतवाली क्षेत्र के पथरी रोह पुल के पास करीब दो बीघा सरकारी जमीन पर बनी अवैध मजार को बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया गया। सिंचाई विभाग ने पहले मजार से जुड़े लोगों को नोटिस जारी किया था, लेकिन निर्धारित समय में अतिक्रमण न हटाने पर यह कड़ी कार्रवाई की गई। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सख्त निर्देशों के बाद राज्यभर में सरकारी भूमि पर बने अवैध धार्मिक ढांचों के खिलाफ ‘भूमि मुक्ति अभियान’ तेज हो गया है, जो अब तक दर्जनों अवैध निर्माणों को रास्ते से हटा चुका है।
जिला प्रशासन के अनुसार, यह मजार सिंचाई विभाग की जमीन पर बनी थी, जो राज्य की महत्वपूर्ण संसाधनों को प्रभावित कर रही थी। कार्रवाई के दौरान SDM डॉ. आशीष भट्ट, तहसीलदार संजय कुमार, नायब तहसीलदार रामकिशोर और सिंचाई विभाग के अधिकारी मौके पर मौजूद रहे। भारी पुलिस बल तैनात किया गया ताकि कोई अप्रिय स्थिति न हो। SDM भट्ट ने कहा, “नोटिस का समय समाप्त हो चुका था, इसलिए कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की गई। यह अभियान सभी धर्मों के अवैध निर्माणों पर लागू है, कोई भेदभाव नहीं।” कार्रवाई शांतिपूर्ण रही, और कोई विरोध नहीं हुआ।
अभियान की पृष्ठभूमि: CM धामी के निर्देशों पर ‘भूमि मुक्ति’
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जुलाई 2025 में सर्किट हाउस मीटिंग में अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे हटाए जाएं। इसके बाद हरिद्वार, देहरादून, नैनीताल और अन्य जिलों में बुलडोजर चले। हरिद्वार में ही पिछले तीन महीनों में 15 से ज्यादा अवैध मस्जिदें, मजारें और मंदिर ध्वस्त हो चुके हैं। प्रशासन का दावा है कि यह कार्रवाई भूमि बैंक मजबूत करने और विकास कार्यों के लिए जरूरी है।
पिछली कार्रवाइयां: जुलाई में रानीपुर तिराहे पर अवैध मस्जिद, अगस्त में खानपुर रोड पर मजार, और सितंबर में भेल क्षेत्र में अतिक्रमण हटाए गए।
प्रभाव: दो बीघा जमीन मुक्त होने से सिंचाई विभाग को फायदा। कुल 50 एकड़ से ज्यादा सरकारी भूमि अब उपलब्ध।
सुरक्षा: हर कार्रवाई में 100-150 पुलिसकर्मी तैनात, ड्रोन सर्विलांस और वीडियोग्राफी।
विवाद और प्रतिक्रियाएं: धार्मिक संवेदनशीलता पर सवाल
यह अभियान धार्मिक सद्भाव को बनाए रखने के लिए संवेदनशील तरीके से चलाया जा रहा है, लेकिन कुछ संगठनों ने इसे ‘धार्मिक भेदभाव’ का आरोप लगाया। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने कहा, “अवैध निर्माण हटाना ठीक, लेकिन केवल एक समुदाय को टारगेट न करें।” वहीं, BJP ने CM धामी की तारीफ की: “यह भूमि चोरों के खिलाफ न्यायपूर्ण कदम है।” स्थानीय हिंदू संगठनों ने समर्थन किया, “सरकारी जमीन सबकी है, कब्जा हटाना जरूरी।”
SDM भट्ट ने स्पष्ट किया, “कार्रवाई धर्म के आधार पर नहीं, बल्कि कानून पर आधारित है। सभी पक्षों को नोटिस दिया जाता है।” हरिद्वार जिला प्रशासन ने कहा कि अभियान जारी रहेगा, लेकिन शांति बनाए रखने पर जोर।
आगे क्या? अभियान का विस्तार
अगले हफ्ते ज्वालापुर और भगवानपुर क्षेत्रों में और कार्रवाइयां होंगी। सरकार का लक्ष्य 2026 तक सभी सरकारी भूमि मुक्त करना है। यह अभियान उत्तराखंड को ‘नशामुक्त और अतिक्रमण मुक्त’ बनाने की दिशा में एक कदम है।
यह कार्रवाई विकास और कानून का प्रतीक बनी हुई है। अपडेट्स के लिए बने रहें!
