उत्तराखंड विधानसभा के विशेष सत्र में कमीशनखोरी का मुद्दा गरमाया: विपक्ष ने लगाए भ्रष्टाचार के आरोप, विधायकों का फूटा गुस्सा, सदन में हंगामा, 15 विधायक निलंबित!
उत्तराखंड विधानसभा के विशेष सत्र में कमीशनखोरी का मुद्दा गरमाया: विपक्ष ने लगाए भ्रष्टाचार के आरोप, विधायकों का फूटा गुस्सा – सदन में हंगामा, 15 विधायक निलंबित!
उत्तराखंड राज्य स्थापना की रजत जयंती के अवसर पर आयोजित दो दिवसीय विशेष सत्र में कमीशनखोरी का मुद्दा जोरों से उठा, जिससे विधानसभा में हंगामा मच गया। विपक्षी कांग्रेस विधायकों ने सरकार पर विकास परियोजनाओं में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाते हुए सदन में नारेबाजी की, माइक तोड़े और सचिव की मेज पर चढ़ गए। गुस्साए विधायकों का आक्रोश इतना भड़का कि स्पीकर ऋतु खंडूरी को 15 विपक्षी विधायकों को दिन भर के लिए निलंबित करना पड़ा। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के संबोधन के बाद शुरू हुई चर्चा में विपक्ष ने कमीशनखोरी को ‘सुशासन का काला चिट्ठा’ बताते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार को घेरा। सत्र की कार्यवाही कई बार बाधित हुई, और सदन के बाहर धरना-प्रदर्शन चला।
सत्र का दूसरा दिन होने के बावजूद, कमीशनखोरी पर बहस ने राज्य के भविष्य के रोडमैप को पीछे धकेल दिया। विपक्ष के नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने कहा, “सरकार विकास के नाम पर कमीशनखोरी कर रही है। सड़कें, स्कूल, अस्पताल – सबमें भ्रष्टाचार घुस गया है। विधायकों का गुस्सा जनता का गुस्सा है।” हंगामे के दौरान मुख्यमंत्री के माइक भी खराब हो गया, और स्पीकर को सदन को चार बार स्थगित करना पड़ा।
कमीशनखोरी का मुद्दा: विपक्ष के प्रमुख आरोप
विपक्ष ने विशेष सत्र में कमीशनखोरी को केंद्र में रखा, जो राज्य के विकास कार्यों में कथित भ्रष्टाचार से जुड़ा है। मुख्य बिंदु:
निर्माण कार्यों में भ्रष्टाचार: कांग्रेस विधायकों ने आरोप लगाया कि सड़क निर्माण, जल जीवन मिशन और पर्यटन परियोजनाओं में ठेकेदारों को 20-30% कमीशन देना आम हो गया है। खानपुर विधायक उमेश कुमार ने दावा किया, “गुप्ता ब्रदर्स जैसे बड़े व्यापारी 500 करोड़ रुपये खर्च कर सरकार गिराने की साजिश रच रहे हैं, लेकिन कमीशनखोरी में उनकी भूमिका की CBI-ED जांच होनी चाहिए।”
कानून व्यवस्था का कनेक्शन: विपक्ष ने कमीशनखोरी को कानून व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति से जोड़ा। नैनीताल DM के ट्रांसफर, SSP के निलंबन और विपक्षी नेताओं पर मुकदमों को ‘भ्रष्टाचार छिपाने की साजिश’ बताया।
विशेषाधिकार हनन: कांग्रेस ने विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव को निरस्त करने पर स्पीकर के फैसले का विरोध किया, जिससे हंगामा भड़का। विधायकों ने कहा, “यह कमीशनखोरी के आरोपों को दबाने का प्रयास है।”
सदन में नारेबाजी के बीच विपक्षी विधायकों ने सदन के बाहर धरना दिया, जहां उन्होंने ‘कमीशनखोरी बंद करो’ के बैनर लगाए।
सदन में हंगामा: 15 विधायक निलंबित, स्पीकर की फटकार
सत्र के दूसरे दिन कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने कमीशनखोरी पर कार्यस्थगन प्रस्ताव पेश किया। जब स्पीकर ने इसे खारिज किया, तो विधायकों ने माइक तोड़े, सदन की मेज पर चढ़ गए और नारेबाजी की। स्पीकर ऋतु खंडूरी ने कड़ी फटकार लगाई: “यह असंसदीय व्यवहार है। शांति बनाएं, अन्यथा एक्शन लूंगी।” लेकिन हंगामा न रुकने पर 15 कांग्रेस विधायकों को निलंबित कर दिया गया।
निलंबित विधायकों ने सदन नहीं छोड़ा, जिससे कार्यवाही अपराह्न 3 बजे तक स्थगित हुई। बाद में एथिक्स कमेटी को मामला रेफर कर दिया गया। एक विधायक ने कहा, “हमारा गुस्सा कमीशनखोरी के खिलाफ है, जो राज्य को लूट रही है।”
सरकार का बचाव: ‘विपक्ष का नकारात्मक रवैया’
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सदन में कहा, “विपक्ष विकास के बजाय भ्रष्टाचार के आरोप लगाकर जनता को भ्रमित कर रहा है। हमारी सरकार ने 25 वर्षों में उत्तराखंड को नई ऊंचाइयां दी हैं।” पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने जवाब में कहा, “इंटरनेशनल एयरपोर्ट और हेलीपोर्ट बन रहे हैं, कमीशनखोरी के आरोप बेबुनियाद हैं।” सरकार ने UCC (समान नागरिक संहिता) लागू करने और युवा सशक्तिकरण पर फोकस किया, लेकिन विपक्ष ने इसे ‘भटकाव का हथकंडा’ बताया।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उद्घाटन संबोधन में कहा, “उत्तराखंड ने 25 वर्षों में विकास का इतिहास रचा है। विधानसभा सामाजिक न्याय का प्रतीक बने।” लेकिन हंगामे ने सत्र को रोचक बना दिया।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ? चुनावी रंग में रंगा सत्र
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कमीशनखोरी का मुद्दा 2027 के विधानसभा चुनावों से जुड़ा है। विपक्ष इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ मुद्दा बना रहा है, जबकि सरकार विकास के आंकड़ों से जवाब दे रही है। सत्र में राष्ट्रपति के संबोधन के बावजूद हंगामा राज्य की राजनीति को दर्शाता है।
यह विशेष सत्र राज्य के 25 वर्षों की समीक्षा का अवसर था, लेकिन कमीशनखोरी ने इसे गरमा दिया। अपडेट्स के लिए बने रहें!
