Tuesday, June 30, 2026
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वैकुंठ चतुर्दशी पर हरकीपैड़ी का दीपोत्सव: लाखों दीयों से जगमगाया गंगा तट, भक्तों की भारी भीड़ में उमड़ा आस्था का सैलाब!

वैकुंठ चतुर्दशी पर हरकीपैड़ी का दीपोत्सव: लाखों दीयों से जगमगाया गंगा तट, भक्तों की भारी भीड़ में उमड़ा आस्था का सैलाब!

कार्तिक शुक्ल चतुर्दशी के पावन अवसर पर वैकुंठ चतुर्दशी के शाम हरकीपैड़ी के घाट लाखों दीयों की रोशनी से जगमगा उठे। गंगा के तट पर सजे दीपों की मनमोहक चमक ने हरिद्वार को स्वर्ग जैसा बना दिया, जहां भगवान विष्णु और शिव की संयुक्त आराधना के साथ भक्तों ने पवित्र स्नान किया और दीपदान किया। यह पर्व ‘हरि-हर मिलन’ का प्रतीक है, जो एकता और सौहार्द का संदेश देता है। हरकीपैड़ी पर हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी, जो गंगा आरती के साथ वैकुंठ लोक की कामना लेकर दीप जलाते नजर आए। जिला प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए, जिसमें 2,000 से ज्यादा पुलिसकर्मी तैनात थे।

वैकुंठ चतुर्दशी का शुभ मुहूर्त रात 11:39 से 12:31 बजे तक रहा, जब निशीथ काल में पूजा का विशेष महत्व था। इस दिन बनने वाले मंगलकारी योगों ने भक्तों में उत्साह दोगुना कर दिया। हरकीपैड़ी पर दीपोत्सव की भव्यता ने पर्यटकों को भी आकर्षित किया, जहां गंगा की लहरों पर तैरते दीये एक अजूबा दृश्य उपस्थित कर रहे थे।

वैकुंठ चतुर्दशी का धार्मिक महत्व: हरि-हर का पावन संगम

वैकुंठ चतुर्दशी हिंदू धर्म का दुर्लभ पर्व है, जब भगवान विष्णु ने भगवान शिव की आराधना की थी। शिव पुराण के अनुसार, विष्णु जी ने कार्तिक शुक्ल चतुर्दशी को एक हजार कमल पुष्पों से शिव पूजन का संकल्प लिया। अंतिम फूल की कमी पर उन्होंने अपनी आंख दान करने को तैयार हुए, जिससे प्रसन्न होकर शिव जी ने उन्हें सुदर्शन चक्र प्रदान किया। भगवान विष्णु ने नारद मुनि से कहा, “इस दिन व्रतपूर्वक शिव-विष्णु पूजन करने से बैकुंठ लोक की प्राप्ति होती है।” यह पर्व पापों के नाश और सुख-समृद्धि का प्रतीक है।

हरकीपैड़ी पर इस अवसर को विशेष रूप से मनाया जाता है, जहां गंगा स्नान के बाद दीपदान करने से मोक्ष की प्राप्ति मानी जाती है। श्रद्धालुओं ने शिव-विष्णु मंदिरों में पूजा की, जहां पुष्प अर्पण का विशेष महत्व रहा। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस बार कई शुभ योग बने, जो पूजा के फल को अक्षय बना देते हैं।

दीपोत्सव की भव्यता: लाखों दीये, आरती का नजारा

शाम होते ही हरकीपैड़ी के घाटों पर लाखों दीये सजाए गए, जो गंगा की धारा में तैरते हुए एक जादुई दृश्य रच रहे थे। मुख्य आरती के दौरान भजन-कीर्तन और घंटों की गूंज से वातावरण भक्तिमय हो गया। पर्यटक और भक्तों ने मोबाइल पर वीडियो बनाते हुए इस पल को कैद किया। जिला मजिस्ट्रेट ने कहा, “सुरक्षा और स्वच्छता के साथ यह उत्सव मनाया गया। भक्तों को मास्क और सैनिटाइजर उपलब्ध कराए गए।” दीपोत्सव ने पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया, जहां इको-फ्रेंडली दीये इस्तेमाल किए गए।

पूजा विधि: घर पर कैसे मनाएं वैकुंठ चतुर्दशी?

शुभ मुहूर्त: निशीथ काल (रात 11:39 से 12:31 बजे)।

विधि: शिव-विष्णु मंदिर जाएं या घर पर दोनों की मूर्ति स्थापित करें। गंगाजल से स्नान कराएं, तुलसी-पुष्प चढ़ाएं। विष्णु को पीले फूल, शिव को बिल्वपत्र अर्पित करें। ‘ओम नमो भगवते वासुदेवाय’ और ‘ओम नमः शिवाय’ मंत्र जपें।

उपाय: पीपल के नीचे दीपक जलाएं, दुर्भाग्य मिटेगा।

यह पर्व एकता का संदेश देता है – हरि और हर एक ही हैं। हरकीपैड़ी का दीपोत्सव वैकुंठ चतुर्दशी की भव्यता का प्रतीक बना। कल देव दीपावली पर वाराणसी जगमगाएगा!

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