उत्तराखंड

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कैंची धाम के किए दर्शन: दरबार में पहुंचने वाली पहली राष्ट्रपति बनीं, जानें क्या है आस्था का केंद्र!

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कैंची धाम के किए दर्शन: दरबार में पहुंचने वाली पहली राष्ट्रपति बनीं, जानें क्या है आस्था का केंद्र!

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आज उत्तराखंड के नैनीताल जिले में स्थित कैंची धाम आश्रम के दर्शन किए, जो नीरकरोली बाबा के प्रसिद्ध आश्रम के रूप में जाना जाता है। यह दौरा राष्ट्रपति के रूप में उनकी पहली यात्रा है, जिससे वे इस पवित्र स्थल पर दर्शन करने वाली पहली राष्ट्रपति बन गईं। इससे पहले पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने मई 2024 में यहां दर्शन किए थे। राष्ट्रपति मुर्मू का यह दौरा आध्यात्मिक महत्व का है, जहां उन्होंने नीरकरोली बाबा के दरबार में पूजा-अर्चना की और भक्तों के बीच समय बिताया। यह यात्रा उनके दो दिवसीय उत्तराखंड दौरे का हिस्सा है, जो 2 से 4 नवंबर तक चली।

राष्ट्रपति मुर्मू ने सुबह नैनीताल के नयना देवी मंदिर में दर्शन किए, उसके बाद कुमाऊं विश्वविद्यालय के 20वें दीक्षांत समारोह में भाग लिया, जहां उन्होंने मेधावी छात्रों को डिग्रियां प्रदान कीं। दोपहर में कैंची धाम पहुंचीं, जहां आश्रम प्रबंधन ने उनका पारंपरिक स्वागत किया। सुरक्षा के मद्देनजर नैनीताल जिले को ड्रोन नो-फ्लाई जोन घोषित किया गया था, और भक्तों को 12 बजे के बाद आने की सलाह दी गई थी। राष्ट्रपति ने दर्शन के दौरान भक्तों से मुलाकात की और आश्रम के कार्यों की सराहना की।

कैंची धाम क्या है? आस्था का अनोखा केंद्र

कैंची धाम, जो नीरकरोली बाबा (1898-1973) के आश्रम के नाम से प्रसिद्ध है, उत्तराखंड के कोसीकलेटन (नैनीताल से करीब 17 किमी दूर) में स्थित है। यह आश्रम हिमालय की गोद में बसा है, जहां बाबा ने 1964 में स्थापना की। बाबा को हनुमान जी का अवतार माना जाता है, और उनका संदेश था – “प्रेम ही ईश्वर है”। आश्रम में हनुमान मंदिर, बाबा का समाधि स्थल और ध्यान कक्ष हैं, जहां हर साल लाखों भक्त दर्शन के लिए आते हैं।

आस्था का महत्व:

नीरकरोली बाबा की कृपा: बाबा के भक्तों में स्टीव जॉब्स, मार्क जुकरबर्ग जैसे वैश्विक नाम शामिल हैं। वे आश्रम में ध्यान और सेवा से आध्यात्मिक शांति पाते थे। बाबा का प्रसिद्ध भजन “हरे कृष्णा” और “प्रेम प्रीति” आश्रम की पहचान हैं।

हनुमान भक्ति: आश्रम में हनुमान जी का विशाल मंदिर है, जहां भक्त संकट मोचन की आराधना करते हैं। बाबा ने कहा था, “सभी धर्म एक ही हैं, बस प्रेम फैलाओ।”

सेवा भाव: यहां भक्तों को मुफ्त भोजन (प्रसाद) मिलता है, जो बाबा की ‘सेवा ही भक्ति’ की शिक्षा पर आधारित है। त्योहारी मौसम में भक्तों की संख्या दोगुनी हो जाती है।

वैश्विक आकर्षण: अमेरिका, यूरोप और भारत के भक्त यहां आते हैं। आश्रम में बाबा की जीवनी और चमत्कारों की कहानियां प्रेरणा देती हैं।

राष्ट्रपति मुर्मू का दौरा आश्रम के लिए ऐतिहासिक है, जो उनकी आदिवासी पृष्ठभूमि और आध्यात्मिक झुकाव को दर्शाता है। उन्होंने दर्शन के बाद कहा, “नीरकरोली बाबा का संदेश प्रेम और सेवा का है, जो देश को एकजुट करता है।” आश्रम प्रबंधन ने भक्तों से अनुरोध किया कि वे सुरक्षा निर्देशों का पालन करें।

यह यात्रा उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय पटल पर लाई। राष्ट्रपति दिल्ली लौट चुकी हैं, लेकिन कैंची धाम की आस्था की लहर बनी रहेगी।

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