WMO की चेतावनी: 2025-2029 में 70% संभावना है 1.5°C सीमा पार करने की, ग्लोबल वार्मिंग का खतरा बढ़ा
WMO की चेतावनी: 2025-2029 में 70% संभावना है 1.5°C सीमा पार करने की, ग्लोबल वार्मिंग का खतरा बढ़ा
विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) की ताजा रिपोर्ट ने ग्लोबल वार्मिंग को लेकर पूरी दुनिया को झकझोर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, 2025 से 2029 के बीच पृथ्वी का औसत तापमान औद्योगिक काल (1850-1900) की तुलना में 1.5 डिग्री सेल्सियस से अधिक रहने की 70% संभावना है। यह अनुमान पिछले साल के 47% से बढ़कर अब 70% हो गया है, जो जलवायु संकट की गंभीरता को दर्शाता है। WMO के अनुसार, अगले पांच वर्षों में कम से कम एक साल 1.5°C सीमा पार करने की 86% संभावना है, और 80% चांस है कि 2024 (अभी तक सबसे गर्म साल) का रिकॉर्ड टूट जाएगा।
रिपोर्ट के प्रमुख आंकड़े: तापमान और जोखिम
WMO की ‘ग्लोबल एनुअल टू डेकेडल क्लाइमेट अपडेट’ रिपोर्ट में कहा गया है कि 2025-2029 के दौरान वैश्विक औसत तापमान 1.2°C से 1.9°C तक बढ़ सकता है। हर अतिरिक्त 0.1°C वृद्धि हीटवेव, सूखा, बाढ़, बर्फ पिघलना और समुद्र स्तर बढ़ने जैसी घटनाओं को तीव्र बनाती है। आर्कटिक क्षेत्र में गर्मी वैश्विक औसत से 3.5 गुना तेज होगी, जो समुद्री बर्फ को 30% कम कर सकती है। वर्षा पैटर्न में भी बदलाव होगा—सहेल, उत्तरी यूरोप और साइबेरिया में अधिक वर्षा, जबकि अमेज़न में सूखा बढ़ेगा।
वैज्ञानिकों की चिंता: ‘हर डिग्री मायने रखती है’
WMO के क्लाइमेट सर्विसेज डायरेक्टर क्रिस ह्यूइट ने कहा, “1.5°C सीमा पार करना प्रतीकात्मक है, लेकिन हर अंश मायने रखता है।” रिपोर्ट 15 संस्थानों के 220 मॉडल्स पर आधारित है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पूर्वानुमान पेरिस समझौते के लक्ष्य को चुनौती देता है। 2°C सीमा पार करने की 1% संभावना भी ‘शॉकिंग’ बताई गई है।
भारत पर असर: गर्मी की लहरें और बाढ़ का खतरा
भारत में 2024 सबसे गर्म साल था, और यह ट्रेंड जारी रह सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिण एशिया में हीटवेव 20% बढ़ेंगी, जो फसलों, स्वास्थ्य और प्रवासन को प्रभावित करेंगी।
यह रिपोर्ट जलवायु कार्रवाई के लिए तत्काल कदम उठाने की मांग करती है। क्या हम 1.5°C लक्ष्य को बचाएंगे?
