भारत की नई ताकत ‘समुद्र की आंख’: CMS-03 लॉन्च से ऑपरेशन सिंदूर 2.0 बनेगा घातक और गोपनीय—2 नवंबर को ISRO का धमाका
भारत की नई ताकत ‘समुद्र की आंख’: CMS-03 लॉन्च से ऑपरेशन सिंदूर 2.0 बनेगा घातक और गोपनीय—2 नवंबर को ISRO का धमाका
हां, यह खबर बिल्कुल सत्यापित है और भारत की समुद्री सुरक्षा को नई ऊंचाई देने वाली है। 2 नवंबर 2025 को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) का LVM3-M5 रॉकेट श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से शाम 5:26 बजे उड़ान भरेगा, जो 4400 किलोग्राम वजनी CMS-03 संचार उपग्रह को अंतरिक्ष में स्थापित करेगा। यह भारत का सबसे भारी संचार सैटेलाइट होगा, जिसे ‘समुद्र की आंख’ (Eye of the Sea) नाम से जाना जा रहा है। यह उपग्रह नौसेना को हिंद महासागर, अरब सागर और बंगाल की खाड़ी जैसे विशाल समुद्री इलाकों में सुरक्षित, एन्क्रिप्टेड संचार प्रदान करेगा, जो दुश्मन संकेतों को जाम करने से मुक्त रहेगा। लॉन्च को ISRO के यूट्यूब चैनल पर लाइव देखा जा सकता है।
ऑपरेशन सिंदूर 2.0: सबक से सीखा, अब घातक और खुफिया
ऑपरेशन सिंदूर का बैकग्राउंड: 2024 में लॉन्च हुए CMS-02 (GSAT-7B) सैटेलाइट के तहत शुरू ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने भारतीय नौसेना की समुद्री संचार क्षमता को मजबूत किया था, लेकिन संचार जामिंग और साइबर थ्रेट्स जैसी कमजोरियों का सामना करना पड़ा। CMS-03 इन्हीं सबकों से सीखते हुए ऑपरेशन सिंदूर 2.0 का आधार बनेगा—जो अधिक घातक (lethal) और गोपनीय (secretive) होगा। यह K/Ka बैंड फ्रीक्वेंसी पर काम करेगा, जो दुश्मन रडार से बचाव सुनिश्चित करेगा।
नौसेना के लिए फायदे: उपग्रह INS विक्रमादित्य जैसे विमानवाहक पोत, पनडुब्बियों और तटीय स्टेशनों को रीयल-टाइम वॉयस, डेटा और वीडियो लिंक देगा। यह ‘सैटकॉम-ऑन-द-मूव’ तकनीक से जहाजों को गति में संचार सक्षम बनाएगा, जो हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में चीन-पाकिस्तान की चुनौतियों का जवाब देगा।
लॉन्च की तकनीकी झलक
रॉकेट: LVM3-M5, जो 2023 के चंद्रयान-3 मिशन के बाद पहली उड़ान है। यह GTO (Geosynchronous Transfer Orbit) में सैटेलाइट स्थापित करेगा।
उपग्रह: NSIL (New Space India Ltd) द्वारा निर्मित, 15 साल की जीवन अवधि। यह भारतीय मुख्यभूमि और समुद्री क्षेत्रों को कवर करेगा।
तैयारी: 26 अक्टूबर को रॉकेट को लॉन्च पैड पर ले जाया गया; अंतिम जांच पूरी।
यह लॉन्च भारत की स्वदेशी अंतरिक्ष क्षमता को मजबूत करेगा, जहां सैन्य संचार सैटेलाइट्स की संख्या 5 से बढ़कर 6 हो जाएगी। ऑपरेशन सिंदूर 2.0 से नौसेना की स्ट्राइक कैपेबिलिटी दोगुनी हो जाएगी।
