Tuesday, June 30, 2026
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सुपरवुमन सोनिका: 7 महीने की प्रेग्नेंसी में 145 किलो वजन उठाकर जीता ब्रॉन्ज मेडल, लाखों महिलाओं को दिया नया संदेश

सुपरवुमन सोनिका: 7 महीने की प्रेग्नेंसी में 145 किलो वजन उठाकर जीता ब्रॉन्ज मेडल, लाखों महिलाओं को दिया नया संदेश

भारतीय महिला शक्ति का एक और चमकदार उदाहरण सामने आया है। दिल्ली पुलिस की कांस्टेबल सोनिका यादव ने सात महीने की गर्भावस्था के बावजूद ऑल इंडिया पुलिस वेटलिफ्टिंग क्लस्टर चैंपियनशिप 2025-26 में भाग लेकर इतिहास रच दिया। प्रतियोगिता के दौरान उन्होंने डेडलिफ्ट में भारी-भरकम 145 किलोग्राम वजन उठाकर कांस्य पदक पर कब्जा जमाया। यह उपलब्धि न सिर्फ खेल जगत में चर्चा का विषय बनी, बल्कि सोशल मीडिया पर भी वायरल हो गई, जहां लाखों लोग उनके जज्बे को सलाम कर रहे हैं।

31 वर्षीय सोनिका यादव, जो कम्युनिटी पुलिसिंग सेल में तैनात हैं, नेशनल लेवल की पावरलिफ्टर भी हैं। मई में उन्हें गर्भधारण का पता चला, तो उनके पति को लगा कि अब जिम और ट्रेनिंग पर ब्रेक लग जाएगा। लेकिन सोनिका ने हार नहीं मानी। उन्होंने इंटरनेट पर रिसर्च की और विदेशी एथलीट लूसी मार्टिन्स से प्रेरणा ली, जिन्होंने भी प्रेग्नेंसी के दौरान वेटलिफ्टिंग की थी। सोनिका ने इंस्टाग्राम पर लूसी से संपर्क कर ट्रेनिंग टिप्स लिए और डॉक्टर की सलाह से अपनी रूटीन जारी रखी। प्रतियोगिता में उन्होंने स्क्वॉट्स में 125 किलोग्राम, बेंच प्रेस में 80 किलोग्राम और डेडलिफ्ट में 145 किलोग्राम वजन उठाकर कुल 350 किलोग्राम का रिकॉर्ड बनाया। जब स्टेज पर यह खुलासा हुआ कि वे सात महीने की प्रेग्नेंट हैं, तो पूरा स्टेडियम तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।

सोनिका का यह कारनामा महिलाओं के लिए प्रेरणादायक है। उन्होंने कहा, “प्रेग्नेंसी को बीमारी की तरह न देखें। सही मार्गदर्शन और आत्मविश्वास से महिलाएं फिटनेस और सपनों को साथ निभा सकती हैं।” उनके इंस्टाग्राम अकाउंट (@sonika_lift) पर वर्कआउट वीडियोज और वजन घटाने की जर्नी साझा की गई हैं, जो युवतियों को मोटिवेट कर रही हैं। डॉक्टर शैली शर्मा जैसे विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि बिना मेडिकल सलाह के भारी व्यायाम जोखिम भरा हो सकता है, लेकिन सोनिका का केस साबित करता है कि संतुलित अप्रोच से यह संभव है।

दिल्ली पुलिस ने सोनिका की उपलब्धि पर गर्व जताया और उन्हें ‘सुपरवुमन’ करार दिया। पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम की तरह, जो कहते थे कि सपने वो नहीं जो सोते हुए देखे जाते हैं, सोनिका ने साबित कर दिया कि मातृत्व और महत्वाकांक्षा साथ चल सकते हैं। यह घटना न सिर्फ खेलों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाएगी, बल्कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ के रक्षा क्षेत्र में भी नई ऊर्जा का संचार करेगी। सोनिका की कहानी हर गर्भवती महिला को बता रही है – ताकत अंदर से आती है।

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