राजनीति

‘जिनके घर शीशे के होते हैं, वे दूसरों पर पत्थर नहीं फेंकते’, फडणवीस का संजय राउत पर तीखा पलटवार

‘जिनके घर शीशे के होते हैं, वे दूसरों पर पत्थर नहीं फेंकते’, फडणवीस का संजय राउत पर तीखा पलटवार

महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर तलवारें खिंच गई हैं। बीजेपी के नए राज्य कार्यालय के भूमिपूजन से ठीक पहले शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने ‘गैरकानूनी जमीन कब्जे’ का गंभीर आरोप लगाकर हंगामा मचा दिया। राउत के बयान पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पलटवार किया और प्रसिद्ध कहावत का सहारा लेते हुए कहा, “जिनके घर शीशे के होते हैं, वे दूसरों पर पत्थर नहीं फेंका करते।” यह तंज राउत समेत विपक्ष पर सीधा निशाना था, जहां फडणवीस ने कहा कि जो खुद भ्रष्टाचार और जमीन हड़पने के आदी हैं, वे हम पर आरोप न लगाएं।

विवाद की शुरुआत रविवार को हुई, जब संजय राउत ने सोशल मीडिया पर बीजेपी के प्रस्तावित कार्यालय को लेकर बीएमसी और एनटीसी की जमीन पर अवैध कब्जे का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “मुंबई में बीजेपी का नया महल बनाने के लिए सरकारी जमीन का दुरुपयोग हो रहा है। यह घोटाला है, जिसकी जांच होनी चाहिए।” राउत का यह बयान बीजेपी के 27 अक्टूबर को होने वाले भूमिपूजन से जुड़ा था, जहां फडणवीस खुद मौजूद रहने वाले थे। राउत ने दावा किया कि यह जमीन मिलिट्री की थी, जिसे बिना मंजूरी के हस्तांतरित किया गया।

फडणवीस ने सोमवार को विधानसभा में संवाददाताओं से बातचीत में जवाब दिया। उन्होंने कहा, “राउत जैसे लोग खुद पैसे की हेराफेरी और जमीन हड़पने के माहिर हैं। शिवसेना के समय मुंबई में कितने घोटाले हुए, वह तो दुनिया जानती है। आज हम विकास कर रहे हैं, तो जलन हो रही है।” फडणवीस ने स्पष्ट किया कि बीजेपी कार्यालय के लिए जमीन पूरी तरह कानूनी तरीके से आवंटित हुई है। बीएमसी ने नियमों के अनुसार इसे मंजूरी दी है, और एनटीसी से कोई विवाद नहीं है। उन्होंने विपक्ष को चुनौती दी कि अगर आरोप साबित हो जाएं, तो वे इस्तीफा दे देंगे। यह बयान महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2029 से पहले सियासी ध्रुवीकरण को तेज कर रहा है।

शिवसेना (यूबीटी) ने फडणवीस के तंज पर तुरंत प्रतिक्रिया दी। संजय राउत ने कहा, “फडणवीस जी, शीशे के घर की बात तो ठीक है, लेकिन बीजेपी का महल तो कांच का ही लग रहा है—जल्दी ही टूट जाएगा।” उद्धव ठाकरे ने भी ट्वीट कर समर्थन किया, “मुंबई की जनता को सच्चाई पता है। हम लड़ेंगे।” वहीं, बीजेपी प्रवक्ता अतुल भातखलकर ने कहा, “राउत का यह ड्रामा चुनावी हार की हताशा है। हम विकास पर फोकस कर रहे हैं।”

यह विवाद महाराष्ट्र की राजनीति में पुरानी दुश्मनी को ताजा कर रहा है। 2019 में शिवसेना-बीजेपी गठबंधन टूटने के बाद से दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला जारी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मुद्दा कोर्ट में पहुंच सकता है, क्योंकि राउत ने बीएमसी से जांच की मांग की है। फडणवीस सरकार ने विकास पर जोर देते हुए कहा कि नए कार्यालय से पार्टी की गतिविधियां मजबूत होंगी।

मुंबई में यह सियासी जंग फैंस और सोशल मीडिया पर छाई हुई है। जहां लोग मीम्स शेयर कर रहे हैं। विपक्ष का दावा है कि यह घोटाला उजागर होगा, जबकि सत्ताधारी दल इसे विपक्षी साजिश बता रहा है। महाराष्ट्र की सियासत में यह नया दौरा दोनों पक्षों के लिए चुनौतीपूर्ण साबित होगा।

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