पार्टी विरोधी गतिविधि में शामिल होने के कारण JDU ने 5 और नेताओं को किया पार्टी से निष्कासित
पार्टी विरोधी गतिविधि में शामिल होने के कारण JDU ने 5 और नेताओं को किया पार्टी से निष्कासित
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की दहलीज पर खड़ी जनता दल (यूनाइटेड) ने अनुशासन की मिसाल कायम करते हुए एक और बड़ी कार्रवाई की है। रविवार को पार्टी ने गोपाल मंडल समेत 5 और बागी नेताओं को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निष्कासित कर दिया। यह कार्रवाई पार्टी की दूसरी सूची है, जिसमें शनिवार को 11 नेताओं को बाहर का रास्ता दिखाया गया था। कुल मिलाकर दो दिनों में 16 नेताओं पर गिरी गाज से एनडीए गठबंधन में एकजुटता का संदेश गया है, जबकि विपक्षी महागठबंधन में हलचल तेज हो गई है।
राज्य महासचिव चंदन कुमार सिंह द्वारा जारी बयान में कहा गया कि ये नेता पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवारों और एनडीए सहयोगियों के खिलाफ काम कर रहे थे। गोपाल मंडल, जो पूर्व जिला अध्यक्ष रह चुके हैं, पर आरोप है कि वे स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने की कोशिश कर रहे थे। अन्य निष्कासित नेताओं में पूर्व जिला उपाध्यक्ष रामेश्वर प्रसाद, जिला सचिव अजय कुमार, युवा नेता संजीव सिंह और महिला विंग की प्रभारी रानी देवी शामिल हैं। पार्टी ने स्पष्ट किया कि ये सभी प्राथमिक सदस्यता से भी निलंबित हैं। एक वरिष्ठ नेता ने कहा, “ये बागी नेता पार्टी की विचारधारा के खिलाफ थे और संगठन को कमजोर करने का प्रयास कर रहे थे।”
यह कार्रवाई चुनावी रणनीति का हिस्सा लगती है। शनिवार को निष्कासित 11 नेताओं में पूर्व मंत्री शैलेश कुमार, पूर्व विधायक श्याम बहादुर सिंह, सुधर्शन कुमार, पूर्व विधायक अमर कुमार सिंह, आशमा परवीन और पूर्व विधान पार्षद रणविजय सिंह व संजय प्रसाद प्रमुख थे। जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने हाल ही में कार्यकर्ताओं को चेतावनी दी थी कि पार्टी लाइन से हटने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। एनडीए की ओर से उम्मीदवारों की सूची जारी होने के बाद ये कार्रवाइयां तेज हुई हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार, यह कदम बागियों को सबक सिखाने और वोटरों में एकता का भरोसा जगाने के लिए उठाया गया है।
विपक्ष ने इसकी आलोचना की है। आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने ट्वीट कर कहा, “नीतीश जी का तानाशाही रवैया जारी है। कार्यकर्ताओं को दबाने से चुनाव नहीं जीते जाते।” वहीं, कांग्रेस ने इसे ‘आंतरिक कलह’ का संकेत बताया। महागठबंधन ने तेजस्वी को सीएम पद का उम्मीदवार घोषित कर अपनी एकजुटता दिखाई है, जो रोजगार, युवा मुद्दों और भ्रष्टाचार के खिलाफ फोकस कर रहा है। 2015 में महागठबंधन की जीत के बाद 2020 में एनडीए ने वापसी की थी, लेकिन इस बार एनडीए को चुनौती मिल रही है।
जेडीयू का यह कदम बिहार की सियासत में अनुशासन पर जोर देता है। चुनाव आयोग ने 16 अक्टूबर को तारीखों का ऐलान किया था, जिसमें सात चरणों में 20 अक्टूबर से 30 नवंबर तक मतदान होगा। नतीजे 5 दिसंबर को। एनडीए ने 125 सीटों पर दावा किया है, जबकि महागठबंधन 150 का। क्या ये निष्कासन जेडीयू को मजबूत बनाएंगे या बागी उम्मीदवारों से नुकसान होगा? राजनीतिक पंडितों का मानना है कि यह एनडीए की मजबूती का संकेत है, लेकिन ग्रामीण स्तर पर असर देखना बाकी है। बिहार के 24 करोड़ मतदाता इस बार रिकॉर्ड मतदान की उम्मीद पर हैं।
