बिहार चुनाव 2025: सीट शेयरिंग विवाद सुलझाने पटना पहुंचे गहलोत-माकन-वेणुगोपाल, ‘5-10 सीटों पर फ्रेंडली फाइट’ संभव—अशोक गहलोत
बिहार चुनाव 2025: सीट शेयरिंग विवाद सुलझाने पटना पहुंचे गहलोत-माकन-वेणुगोपाल, ‘5-10 सीटों पर फ्रेंडली फाइट’ संभव—अशोक गहलोत
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए महागठबंधन में सीट शेयरिंग को लेकर चल रही खींचतान को सुलझाने के लिए कांग्रेस ने अपने तीन दिग्गज नेताओं—अशोक गहलोत, अजय माकन और के.सी. वेणुगोपाल—को मैदान में उतार दिया है। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और अनुभवी रणनीतिकार अशोक गहलोत, जो बिहार कांग्रेस के पर्यवेक्षक भी हैं, शनिवार को पटना पहुंचे। उनके साथ पार्टी महासचिव अजय माकन और संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल (राहुल गांधी के करीबी) भी हैं। तीनों नेताओं ने RJD प्रमुख लालू प्रसाद यादव, तेजस्वी यादव और राबड़ी देवी से मुलाकात की, जहां 12 विवादित सीटों पर चर्चा हुई। गहलोत ने विवाद को कमतर बताते हुए कहा कि 243 सीटों में 5-10 पर ‘फ्रेंडली फाइट’ हो सकती है, लेकिन गठबंधन की एकजुटता बरकरार रहेगी। नामांकन वापसी की अंतिम तिथि (23 अक्टूबर) के बाद यह कदम महागठबंधन को मजबूत करने की कोशिश है।
गहलोत की भूमिका: ‘जादूगर’ नेता का दखल, तेजस्वी से अहम बातचीत
अशोक गहलोत, जिन्हें पार्टी में ‘जादूगर’ कहा जाता है, बिहार कांग्रेस के पर्यवेक्षक के रूप में नियुक्त हैं। उन्होंने पटना पहुंचते ही कहा, “बिहार की 243 सीटों पर 5-10 पर फ्रेंडली फाइट हो सकती है, लेकिन कोई समस्या नहीं। हम जल्द संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे और एकजुटता दिखाएंगे।” गहलोत ने लालू परिवार से मुलाकात में सीट बंटवारे पर चर्चा की, जहां RJD ने 12 सीटों (जैसे बेलागंज, सासाराम, अमरपुरा) पर दावा ठोंका था, जबकि कांग्रेस 55-60 सीटें चाहती थी। तेजस्वी यादव ने 13 अक्टूबर को वेणुगोपाल और राज्य प्रभारी कृष्णा अल्लावरू से फोन पर बात की थी, जिसके बाद गहलोत को भेजा गया।
अजय माकन, जो राज्या सभा सदस्य और पार्टी कोषाध्यक्ष हैं, ने CEC की चार सदस्यीय सब-कमेटी का नेतृत्व किया है, जो उम्मीदवारों का चयन कर रही है। वेणुगोपाल, राहुल गांधी के ‘राइट हैंड’ के रूप में जाने जाते हैं, ने संगठनात्मक स्तर पर समन्वय किया। तीनों ने कहा कि नामांकन वापसी के बाद भी गठबंधन मजबूत रहेगा, और कॉमन मेनिफेस्टो पर काम तेज है।
विवाद की पृष्ठभूमि: 12 सीटों पर खींचतान, नामांकन वापसी मिस हो गई
महागठबंधन (RJD, कांग्रेस, वामपंथी) में सीट शेयरिंग पर असहमति 8 अक्टूबर से चली आ रही है। कांग्रेस ने CEC की बैठक में 25 उम्मीदवारों को मंजूरी दी, लेकिन 53 तक पहुंच गई। 14 अक्टूबर को CEC ने माकन की अगुवाई में सब-कमेटी बनाई, जो 10 सीटों पर बहस के बाद 8 पर फैसला ले चुकी है। RJD ने दावा किया कि कांग्रेस के प्रभारी कृष्णा अल्लावरू ‘जिद्दी’ हैं, जिससे तनाव बढ़ा। नामांकन वापसी (23 अक्टूबर) की डेडलाइन मिस हो गई, लेकिन गहलोत ने इसे ‘फ्रेंडली फाइट’ बताकर हल्का किया।
विपक्ष NDA ने इसे ‘महागठबंधन का आंतरिक कलह’ बताते हुए तंज कसा। BJP प्रवक्ता ने कहा, “कांग्रेस-RJD की लड़ाई से NDA को फायदा।” महागठबंधन ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस का ऐलान किया, जहां एकजुटता दिखाने की कोशिश होगी। पहले चरण की 121 सीटों पर 6 नवंबर को मतदान है, और ये विवाद वोटों के बंटवारे का खतरा पैदा कर सकता है।
गहलोत का दखल गठबंधन को बचा सकता है, लेकिन क्या ‘फ्रेंडली फाइट’ वास्तव में फ्रेंडली रहेगी? चुनावी समीकरण पर नजरें टिकी हैं।
