चांदी का बुलबुला फूटा! 7 दिन में ₹20,000 सस्ती, गिरावट के ये 5 प्रमुख कारण
चांदी का बुलबुला फूटा! 7 दिन में ₹20,000 सस्ती, गिरावट के ये 5 प्रमुख कारण
त्योहारी सीजन में चमक बिखेरने वाली चांदी के दामों ने अचानक ब्रेक लिया है। जहां सोने की कीमतें भी फिसली हैं, वहीं चांदी का भाव पिछले 7 दिनों में भरभराकर गिरा है। 17 अक्टूबर को ₹1,70,000 प्रति किलो के रिकॉर्ड हाई पर पहुंची चांदी 24 अक्टूबर तक ₹1,50,000 के आसपास लुढ़क गई—यानी ₹20,000 तक की गिरावट। MCX पर सिल्वर स्पॉट प्राइस में 6.49% की कमी आई, जबकि लंदन मार्केट में $54.45/औंस से गिरकर $50.89/औंस हो गया। विशेषज्ञों के अनुसार, यह गिरावट अस्थायी करेक्शन है, लेकिन लंबे समय के निवेशकों के लिए खरीदारी का सुनहरा मौका। आइए जानें गिरावट के 5 प्रमुख कारण।
1. प्रॉफिट बुकिंग: रिकॉर्ड हाई के बाद निवेशकों का मुनाफा उठाना
चांदी के दामों ने 2025 में 70% की तेजी दिखाई, जो EV, सोलर पैनल और त्योहारी डिमांड से प्रेरित थी। लेकिन रिकॉर्ड हाई ($54.45/औंस) पर पहुंचते ही ग्लोबल निवेशक प्रॉफिट बुकिंग में जुट गए। MCX पर 20 अक्टूबर को 6.49% की गिरावट इसी का नतीजा थी। राहुल कलांत्री, मेहता इक्विटीज के VP कमोडिटीज ने कहा, “रैली के बाद प्रॉफिट टेकिंग नॉर्मल है, लेकिन यह गिरावट ज्यादा नहीं रहेगी।”
2. डॉलर की मजबूती: कमजोर रुपया बढ़ा आयात लागत
अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY) में तेजी आई, जो चांदी जैसे डॉलर-डिनोमिनेटेड कमोडिटी के दामों को दबाता है। अगर रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर होता है, तो आयात महंगा हो जाता है, लेकिन यहां डॉलर की मजबूती ने ग्लोबल प्राइस को नीचे खींच लिया। 23 अक्टूबर को रुपए में मामूली सुधार से भी दबाव बढ़ा।
3. जियोपॉलिटिकल टेंशन में कमी: सेफ-हेवन डिमांड घटी
मिडिल ईस्ट और यूक्रेन जैसे संघर्षों में अस्थायी कमी से चांदी की ‘सेफ-हेवन’ अपील कम हुई। निवेशक रिस्की एसेट्स (शेयर, बॉन्ड) की ओर मुड़े। क्वांटे कोइल कैपिटल के विश्लेषक ने कहा, “ट्रेड ब्रेकथ्रू की उम्मीदों से रिस्क अपेटाइट बढ़ा, जिसने प्रेशियस मेटल्स पर दबाव डाला।”
4. त्योहारी डिमांड स्लोडाउन: धनतेरस के बाद बाजार शांत
धनतेरस पर चांदी की भारी खरीदारी (कैट के अनुसार ₹60,000 करोड़ से ज्यादा) के बाद डिमांड धीमी पड़ गई। दिल्ली-मुंबई जैसे बाजारों में बिक्री घटकर सामान्य स्तर पर लौट आई। एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETF) में भी 7% की गिरावट आई, जैसे ICICI प्रूडेंशियल सिल्वर ETF।
5. ग्लोबल सप्लाई चेन में सुधार: इन्वेंटरी प्रेशर कम
JPMorgan जैसी कंपनियों ने चेतावनी दी थी कि सितंबर-अक्टूबर में सप्लाई चेन डिसरप्शन से इन्वेंटरी खत्म हो गई थी। लेकिन अक्टूबर के अंत में रिकवरी के संकेत मिले, जिससे प्राइस पर नीचे का दबाव पड़ा। सिल्वर इंस्टीट्यूट के अनुसार, 2021 से डिमांड-सप्लाई गैप 678 मिलियन औंस था, लेकिन अब माइनिंग आउटपुट में सुधार हो रहा है।
क्या आगे गिरावट आएगी या रिकवरी?
विशेषज्ञों का कहना है कि US फेड रेट कट (अक्टूबर अंत में 25 bps की उम्मीद) से चांदी फिर चमक सकती है। 2025 में औसत प्राइस $52/औंस रहने का अनुमान है। निवेशकों को सलाह: लॉन्ग-टर्म के लिए ₹1,50,000/kg पर खरीदें, लेकिन शॉर्ट-टर्म में वोलेटाइल रहें। दिल्ली में आज चांदी ₹1,55,000/kg पर ट्रेड हो रही है।
