बिहार चुनाव: कर्पूरी ठाकुर क्यों बने राजनीतिक हथियार, मोदी से तेजस्वी तक सबकी जुबां पर नाम
बिहार चुनाव: कर्पूरी ठाकुर क्यों बने राजनीतिक हथियार, मोदी से तेजस्वी तक सबकी जुबां पर नाम
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में अति पिछड़ा वर्ग (EBC) के वोटों की जंग तेज हो गई है। इसी कड़ी में पूर्व मुख्यमंत्री और भारत रत्न जननायक कर्पूरी ठाकुर का नाम सबकी जुबां पर चढ़ गया है। पीएम नरेंद्र मोदी ने उनके जन्मस्थान समस्तीपुर के कर्पूरी ग्राम से चुनावी अभियान का आगाज किया, तो कांग्रेस और तेजस्वी यादव ने भी ठाकुर के नाम पर NDA को घेरना शुरू कर दिया। EBC (30-35% आबादी) के वोट निर्णायक हैं, और ठाकुर इसी वर्ग के प्रतीक बने हुए हैं। NDA उन्हें ‘सामाजिक न्याय का जनक’ बताकर वोट साध रहा है, जबकि महागठबंधन ‘उपेक्षा’ का आरोप लगाकर पलटवार कर रहा है।
पीएम मोदी ने कर्पूरी ग्राम पहुंचकर ठाकुर की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया और कहा, “करपूरी बाबू ने वंचितों के हितों को मजबूत किया। NDA ने उन्हें भारत रत्न देकर सम्मान दिया।” उन्होंने RJD-कांग्रेस पर तंज कसा, “जिस कांग्रेस ने करपूरी ठाकुर को अपमानित किया, उसी का साथ लेकर RJD चुनाव लड़ रही है।” मोदी ने 1979 का जिक्र किया, जब जनसंघ ने ठाकुर के OBC आरक्षण फैसले के खिलाफ उनकी सरकार गिराई थी, लेकिन अब BJP ठाकुर को अपना बताया। रैली में शाह खानदानों के ‘युवराजों’ (राहुल-तेजस्वी पर इशारा) पर निशाना साधा, “वे गरीब मां की तपस्या नहीं समझ सकते।” NDA की रणनीति साफ है—ठाकुर के नाम से EBC को एकजुट कर जंगल राज के खिलाफ वोट मांगना।
कांग्रेस ने मोदी के दौरे पर तीखा प्रहार किया। नेता जयराम रमेश ने तीन सवाल दागे: “1979 में जनसंघ ने ही ठाकुर की सरकार क्यों गिराई? बिहार के 65% आरक्षण को 9वीं अनुसूची में क्यों नहीं डाला, जबकि तमिलनाडु के 69% को डाला? EBC आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट में क्यों लड़ रहे?” उन्होंने कहा, “मोदी जी ठाकुर का नाम ले रहे हैं, लेकिन उनकी विरासत को लागू नहीं कर रहे।” कांग्रेस ठाकुर को याद दिलाकर NDA की ‘दोहरी नीति’ उजागर करना चाहती है।
तेजस्वी यादव ने भी मौके का फायदा उठाया। उन्होंने कहा, “कर्पूरी ठाकुर को क्या कम गालियां दी थीं BJP ने? आरक्षण लागू करने पर अपशब्द इस्तेमाल किए। अब वोट के लिए नाम ले रहे हैं।” महागठबंधन ने ठाकुर को केंद्र में रखकर मुकेश सहनी को डिप्टी CM फेस बनाया, ताकि EBC वोट बंटे नहीं। तेजस्वी ने NDA से CM फेस घोषित करने की चुनौती दी, और कहा कि ठाकुर की तरह वे ‘सामाजिक न्याय’ लाएंगे। RJD ठाकुर के नाम से यादव-EBC गठजोड़ मजबूत करना चाहती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ठाकुर का मुद्दा जातिगत समीकरण बदल सकता है। 2020 में EBC ने NDA को फायदा दिया था, लेकिन जातिगत सर्वे के बाद विपक्ष ने इसे पलटा। चुनाव दो चरणों (6-11 नवंबर) में हैं, नतीजे 14 नवंबर को। ठाकुर का नाम सियासी हथियार बनेगा, जो EBC को किसके पाले ले जाएगा। फिलहाल, सभी पार्टियां ठाकुर की ‘विरासत’ पर दावा ठोंक रही हैं—विकास बनाम जंगल राज की जंग में।
