राजनीति

जम्मू-कश्मीर: राज्यसभा चुनाव में नेशनल कॉन्फ्रेंस की बड़ी जीत, 3 सीटें हासिल; BJP को मिली एक

जम्मू-कश्मीर: राज्यसभा चुनाव में नेशनल कॉन्फ्रेंस की बड़ी जीत, 3 सीटें हासिल; BJP को मिली एक

जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 के निरस्तीकरण के बाद पहली बार हुए राज्यसभा चुनाव के नतीजे आज घोषित हो गए। नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी)-कांग्रेस गठबंधन ने अपेक्षित रूप से तीन सीटें जीत लीं, जबकि भाजपा (बीजेपी) को एक सीट पर कामयाबी मिली। यह नतीजा विधानसभा में एनसी गठबंधन की मजबूत पकड़ को और मजबूत करता नजर आ रहा है।

चुनाव आयोग के अनुसार, श्रीनगर विधानसभा परिसर में सुबह 10 बजे से शुरू हुई वोटिंग शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुई। कुल 88 विधायकों में से 86 ने मतदान किया, जबकि डोडा के हिरासत में विधायक महराज मलिक ने डाक मतपत्र के जरिए वोट डाला। पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के विधायक सजाद लोन ने मतदान से परहेज किया। काउंटिंग शाम 5 बजे शुरू होने के बाद नतीजे देर शाम तक स्पष्ट हो गए।

एनसी ने मिसबाहिदा जहांगीर, जावेद अहमद दर और यूसुफ तारिगामी को नामित किया था, जिनमें से दो कश्मीर और एक जम्मू प्रतिनिधित्व करेंगे। बीजेपी के उम्मीदवार उमर अब्दुल्ला के करीबी रहे पूर्व विधायक जावेद अहमद राणा ने जम्मू क्षेत्र की एक सीट पर कब्जा जमाया। एनसी के चेयरमैन फारूक अब्दुल्ला ने जीत को “जनादेश की सच्ची अभिव्यक्ति” बताते हुए कहा कि यह गठबंधन की एकजुटता का प्रमाण है।

पांच अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर से विशेष दर्जा छीनने और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों—जम्मू-कश्मीर और लद्दाख—में बांटने के बाद यह पहला ऐसा चुनाव था। 2024 के विधानसभा चुनावों में एनसी ने 42 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, जबकि बीजेपी को 29 मिलीं। कांग्रेस को 6, पीडीपी को 3 और अन्य छोटी पार्टियों को बाकी सीटें हासिल हुईं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह जीत आगामी लोकसभा चुनावों और राज्य के पूर्ण राज्यत्व बहाली की मांग को बल देगी। एनसी नेता उमर अब्दुल्ला, जो खुद मुख्यमंत्री हैं, ने ट्वीट कर कहा, “यह जीत जम्मू-कश्मीर की जनता की आवाज है। हम केंद्र से पूर्ण राज्य का दर्जा वापस दिलाने के लिए लड़ते रहेंगे।”

बीजेपी ने एक सीट हासिल करने को अपनी उपलब्धि बताया है। पार्टी प्रवक्ता ने कहा, “जम्मू क्षेत्र में हमारी मजबूत पकड़ बरकरार है। यह शुरुआत मात्र है।”

चुनाव के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे, और कोई अनियमितता की शिकायत नहीं आई। यह नतीजा जम्मू-कश्मीर की राजनीति में एक नया अध्याय जोड़ता है, जहां केंद्र-राज्य संबंधों पर बहस तेज हो सकती है।

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