राजनीति

एक्टर विजय की पार्टी TVK का धमाका, 108 सीटें जीत बनी सबसे बड़ी पार्टी; मात्र 1 वोट से हारे स्टालिन के मंत्री

Tamil Nadu Election Results 2026: एक्टर विजय की पार्टी TVK का धमाका, 108 सीटें जीत बनी सबसे बड़ी पार्टी; मात्र 1 वोट से हारे स्टालिन के मंत्री

​चेन्नई: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने पूरे देश को चौंका दिया है। ‘थलपति’ विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) ने अपने पहले ही चुनाव में ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए राज्य की राजनीति की दिशा बदल दी है। फरवरी 2024 में गठित हुई इस पार्टी ने महज दो साल के भीतर 234 सदस्यीय विधानसभा में 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनने का गौरव हासिल किया है।

​तिरुपत्तूर में ‘महा-रोमांच’: मात्र 1 वोट से पलटी बाजी

​इस चुनाव का सबसे दिलचस्प और हैरान कर देने वाला परिणाम तिरुपत्तूर (Tiruppattur) सीट से आया। यहाँ जीत-हार का फैसला किसी बड़े अंतर से नहीं, बल्कि मात्र 1 वोट से हुआ।

​विजेता: TVK प्रत्याशी श्रीनिवास सेतुपति (कुल वोट: 83,375)

​पराजित: DMK के कद्दावर नेता और स्टालिन सरकार में मंत्री के.आर. पेरियाकरुप्पन।

​रोमांच: 30 राउंड की लंबी मतगणना के बाद जब अंतिम परिणाम आया, तो सेतुपति केवल एक वोट के अंतर से मंत्री के जबड़े से जीत छीनने में कामयाब रहे।

​सीएम स्टालिन को लगा बड़ा झटका

​विजय की ‘सुनामी’ में सत्ताधारी DMK को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। खुद मुख्यमंत्री और द्रमुक अध्यक्ष एम.के. स्टालिन को कोलाथुर निर्वाचन क्षेत्र से 8,795 मतों के अंतर से करारी हार का सामना करना पड़ा। वहीं, अभिनेता से नेता बने विजय ने अपनी दोनों सीटों—पेरम्बूर और तिरुचिरापल्ली पूर्व—से शानदार जीत दर्ज की है।

​TVK की जीत के मुख्य आंकड़े:

​कुल सीटें: 108 (सबसे बड़ी पार्टी)

​वोट शेयर: लगभग 35%

​स्थापना: फरवरी 2024 (महज 2 साल में सत्ता के करीब)

​तमिलनाडु की राजनीति में नया अध्याय

​यह तमिलनाडु के इतिहास में पहली बार होगा कि कोई पार्टी अपनी स्थापना के मात्र दो साल बाद ही सत्ता के शिखर पर पहुँच रही है। विजय द्वारा समान विचारधारा वाली पार्टियों को सत्ता में हिस्सेदारी देने के आश्वासन ने गठबंधन की राजनीति की नई उम्मीदें जगा दी हैं।

​निष्कर्ष: तिरुपत्तूर का परिणाम यह साबित करता है कि लोकतंत्र में ‘एक वोट’ की कीमत क्या होती है। जहाँ एक तरफ विजय की पार्टी ने अपनी धमाकेदार एंट्री से सबको चौंकाया है, वहीं अनुभवी नेताओं की हार ने यह साफ कर दिया है कि राज्य की जनता बदलाव के मूड में थी।

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