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पाकिस्तान का दोहरा चेहरा उजागर! घर में कट्टरपंथ पर पाबंदी, बांग्लादेश में ISI का खतरनाक खेल

पाकिस्तान का दोहरा चरित्र एक बार फिर सामने आया है। एक तरफ जहां इस्लामाबाद अपने घरेलू कट्टरपंथी इस्लामिक समूह तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (TLP) पर सख्ती बरत रहा है और उसे बैन करने की तैयारी कर रहा है, वहीं दूसरी ओर उसकी खुफिया एजेंसी ISI बांग्लादेश में कट्टरपंथी तत्वों को पाल-पोस रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह ‘सांपों को दूध पिलाने’ जैसा है—जिसका जहर अंततः भारत को निशाना बनाएगा। शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद बांग्लादेश में पैदा हुए राजनीतिक शून्य का फायदा उठाते हुए, ISI जमात-ए-इस्लामी और मुहम्मद यूनुस के जरिए शरिया कानून थोपने की साजिश रच रही है।

पाकिस्तान में TLP जैसे समूहों पर क्रैकडाउन चल रहा है, क्योंकि ये राज्य की सत्ता को चुनौती दे रहे हैं। नवंबर 2024 में TLP ने लाहौर में बड़े विरोध प्रदर्शन किए, जिसमें 10 से अधिक लोग मारे गए। सरकार ने इसे ‘आंतरिक सुरक्षा खतरा’ बताते हुए बैन लगाने का फैसला लिया। लेकिन बांग्लादेश में ISI का एजेंडा उल्टा है। हसीना की बेदखली के बाद, यूनुस की अंतरिम सरकार ने पाकिस्तान के साथ रिश्ते गर्म किए। जमात-ए-इस्लामी, जो 1971 युद्ध में पाकिस्तानी सेना का साथ दे चुका है, अब सत्ता की कमान संभाल रहा है। ISI ने ढाका में सात कैंप स्थापित किए हैं, जहां 8,850 युवाओं को कट्टरपंथी ट्रेनिंग दी जा रही है। यह ‘इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी आर्मी’ (IRA) का हिस्सा है, जो ईरान के IRGC की तर्ज पर बांग्लादेश को इस्लामिक स्टेट बनाने का सपना बुन रही है।

विश्लेषकों के अनुसार, यह पाकिस्तान की ‘घजवा-ए-हिंद’ रणनीति का हिस्सा है, जहां बांग्लादेश को कट्टरपंथ का केंद्र बनाकर भारत को घेरा जाए। यूनुस ने पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर से मुलाकात की और ‘इस्लामी भाईचारे’ की बात की। लेकिन पाकिस्तान में महिलाओं के अधिकारों पर सवाल उठते ही ISI बांग्लादेश में हिजाब अनिवार्य करने और महिलाओं को ईरानी मॉडल पर ढालने की कोशिश कर रहा है। अल जजीरा की रिपोर्ट में इसे ‘इस्लामोफोबिक प्रोपगैंडा’ कहा गया, लेकिन भारतीय खुफिया एजेंसियां इसे गंभीर खतरा मान रही हैं।

पाकिस्तान का यह पाखंड भारत के लिए चुनौती है। बांग्लादेश में कट्टरपंथी उभार से सीमा पर घुसपैठ और आतंकी हमले बढ़ सकते हैं। पूर्वी बॉर्डर पर पहले से ही AQIS और ISIS की मौजूदगी है। सरकार ने बांग्लादेश के साथ बातचीत तेज की है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान की इस ‘सांप पालन’ नीति को बेनकाब करने के लिए अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आवाज बुलंद करनी होगी। फिलहाल, यह घटना दक्षिण एशिया की स्थिरता के लिए खतरे की घंटी है।

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