राजनीति

पटना एयरपोर्ट पर कांग्रेस में घमासान: टिकट बंटवारे की भ्रष्टाचार के आरोपों से भड़का बवाल

पटना एयरपोर्ट पर कांग्रेस में घमासान: टिकट बंटवारे की भ्रष्टाचार के आरोपों से भड़का बवाल

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के बीच महागठबंधन में सीट बंटवारे की रस्साकशी ने कांग्रेस को अंदर ही अंदर खोखला कर दिया है। बुधवार शाम पटना एयरपोर्ट पर दिल्ली से लौटे पार्टी के प्रमुख नेताओं का स्वागत नारों और लात-घूंसे से हुआ, जो वीडियो में वायरल हो गया। बिहार कांग्रेस प्रभारी कृष्णा अल्लावरु, प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम और विधायी दल नेता शकील अहमद खान को कार्यकर्ताओं ने घेर लिया। आक्रोशित भीड़ ने विक्रम विधानसभा सीट पर ‘5 करोड़ रुपये में टिकट बेचने’ का आरोप लगाते हुए नेताओं को खदेड़ दिया, जिससे मारपीट का दौर चला। पुलिस ने हस्तक्षेप कर स्थिति संभाली, लेकिन कई कार्यकर्ता चोटिल हो गए।

इस घमासान की जड़ महागठबंधन में सीट बंटवारे का लंबा इंतजार है। दिल्ली में केंद्रीय चुनाव समिति (सीईसी) की बैठक के बाद नेताओं के पटना लौटने पर कार्यकर्ताओं का सब्र टूट गया। पहले चरण के नामांकन समाप्त होने के दो दिन पहले भी कांग्रेस ने 70 से ज्यादा सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा नहीं की थी। विपक्षी राजद ने 2020 के प्रदर्शन के आधार पर कांग्रेस को कम सीटें देने की मांग की, जबकि कांग्रेस अधिक सीटों पर अड़ रही। इस देरी ने टिकट के दावेदारों के बीच असंतोष भड़का दिया। विशेष रूप से विक्रम सीट पर पुराने कार्यकर्ता अशोक गगन के समर्थक नाराज थे, जिन्हें पैसे लेकर बाहरी उम्मीदवार को टिकट देने का शक था।

विवाद तब हिंसक हो गया जब पप्पू यादव के समर्थक मनीष कुमार को रिसीव करने आए कार्यकर्ता अशोक आनंद के गुट से भिड़ गए। मनीष को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा गया, जबकि महिलाएं नेताओं पर ‘टिकट मंडी’ का आरोप लगाती रहीं. सदाकत आश्रम में दिन में ही काली पट्टी बांधकर विरोध हो चुका था। तीनों नेताओं की कार्यशैली में मतभेद ने आग में घी डाला—अल्लावरु पर राहुल गांधी के कृपापात्र होने के बावजूद भ्रष्टाचार के इल्जाम लगे।

घटना के बाद अल्लावरु-राजेश राम तेजस्वी यादव से मिले, जहां देर रात उम्मीदवारों की लिस्ट पर चर्चा हुई। कांग्रेस नेता तारिक अनवर ने कहा, “रात तक लिस्ट आ जाएगी।” पूर्व प्रदेश अध्यक्ष मदन मोहन झा ने आरोपों को ‘निराधार’ बताया, लेकिन सोशल मीडिया पर भाजपा समर्थक इसे ‘टिकट युद्ध’ बता कर मजा ले रहे।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कांग्रेस की पुरानी बीमारी—गुटबाजी और पारदर्शिता की कमी—का नतीजा है। बिहार में पार्टी का वोटबैंक कमजोर होने से मोलभाव की ताकत नहीं, फिर भी महत्वाकांक्षा बरकरार। पहले चरण की 73 सीटों पर नामांकन शुरू हो चुके हैं, लेकिन कांग्रेस की देरी से महागठबंधन की एकजुटता पर सवाल उठ रहे। विपक्ष ने इसे ‘अराजकता’ का प्रतीक बताया।

यह घटना बिहार कांग्रेस के लिए शर्मिंदगी का सबब बन गई, जो चुनावी हवा को प्रभावित कर सकती है। कार्यकर्ताओं का गुस्सा शांत होगा या और भड़केगा? आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा। फिलहाल, एयरपोर्ट पर बढ़ी सिक्योरिटी और हाईकमान की मीटिंग्स जारी हैं।

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