राजनीति

बिहार चुनाव 2025: मांझी ने नीतीश का दिया साथ, चिराग की पार्टी के खिलाफ उतारे कैंडिडेट्स

बिहार चुनाव 2025: मांझी ने नीतीश का दिया साथ, चिराग की पार्टी के खिलाफ उतारे कैंडिडेट्स

बिहार विधानसभा चुनावों की रणभेरी बजते ही एनडीए में सीट बंटवारे को लेकर तनाव चरम पर पहुंच गया है। केंद्रीय मंत्री और हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (सेक्युलर) के अध्यक्ष जीतन राम मांझी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के जनता दल (यूनाइटेड) का खुला समर्थन करते हुए चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) के खिलाफ दो सीटों पर उम्मीदवार उतारने का ऐलान किया है। मांझी का यह कदम एनडीए के भीतर सत्ता संघर्ष की नई कड़ी बन गया है, जहां नीतीश की पार्टी को अपनी मजबूत सीटें खोने का दर्द हो रहा है।

मंगलवार को पटना में पत्रकारों से बातचीत में मांझी ने कहा, “नीतीश कुमार का गुस्सा जायज है। जब फैसला हो चुका है कि कौन सी पार्टी कहां लड़ेगी, तो कोई अपनी कोटा वाली सीट पर उम्मीदवार क्यों उतार रहा है?” उन्होंने चेतावनी दी कि उनकी पार्टी बोधगया और मखदुमपुर विधानसभा क्षेत्रों में चिराग पासवान की पार्टी के खिलाफ उम्मीदवार उतारेगी। मांझी ने नीतीश के कदम का समर्थन करते हुए कहा, “हम नीतीश जी के साथ खड़े हैं। हमारी लिस्ट तैयार है, और एनडीए बहुमत से जीतेगा।” यह बयान एनडीए की रविवार को घोषित सीट बंटवारे के बाद आया, जिसमें भाजपा और जेडीयू को 101-101 सीटें मिलीं, जबकि चिराग की एलजेपी को 29, मांझी की एचएएम को छह और उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा को छह सीटें आवंटित की गईं।

विवाद की जड़ सहरसा जिले की सोनबरसा सीट है, जो जेडीयू के मंत्री रत्नेश सदा के पास है। लेकिन सीट बंटवारे में इसे चिराग की पार्टी को दे दिया गया, जिससे नीतीश नाराज हो गए। “मांझी ने कहा कि गठबंधन में ‘देने-लेने’ की राजनीति जरूरी है, लेकिन चिराग जैसे नए खिलाड़ी को नीतीश के अनुभव पर भरोसा करना चाहिए। एचएएम ने पहले ही छह सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है: बरचट्टी से ज्योति देवी, सिकंदरा से प्रफुल्ल कुमार मांझी, अत्री से रोमित कुमार, कुटुंबा से ललन राम, और अन्य। मांझी ने जोर देकर कहा कि उनकी पार्टी जेडीयू के कोटे वाली सीटों पर नहीं लड़ेगी, बल्कि चिराग की महत्वाकांक्षा को चुनौती देगी।

यह घटनाक्रम बिहार की सियासत को और रोमांचक बना रहा है। जेडीयू ने बुधवार को 57 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की, जिसमें नीतीश समस्तीपुर से चुनाव लड़ेंगे, जबकि बाकी 44 नाम गुरुवार को घोषित हो चुके हैं। भाजपा ने भी 71 उम्मीदवारों की सूची जारी की है। विपक्षी महागठबंधन में भी सीट बंटवारे को लेकर हलचल है, जहां तेजस्वी यादव की आरजेडी प्रमुख भूमिका निभा रही है। चिराग पासवान ने तनाव को खारिज करते हुए दावा किया कि एनडीए 225 से ज्यादा सीटें जीतेगा, लेकिन मांझी का ऐलान उनके लिए झटका है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मांझी का समर्थन नीतीश को मजबूत करेगा, खासकर दलित वोटबैंक में, लेकिन इससे एनडीए का वोट स्प्लिट हो सकता है। मांझी, जो 2015 में नीतीश से अलग होकर अपनी पार्टी बना चुके हैं, अब फिर से उनके साथ दिख रहे हैं। चुनाव आयोग के अनुसार, बिहार में 243 सीटों पर मतदान दो चरणों में होगा, और नामांकन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

कुल मिलाकर, यह घटना गठबंधन की मजबूती पर सवाल खड़ी कर रही है। क्या मांझी का कदम चिराग को सबक सिखाएगा या एनडीए को कमजोर करेगा? चुनावी मैदान में जवाब मिलेगा। फिलहाल, नीतीश का अभियान समस्तीपुर से शुरू हो चुका है, जहां वे कार्यकर्ताओं को एकजुट करने की कोशिश कर रहे हैं।

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