ये दवाई नहीं, जहर है! WHO ने भारत के तीन कफ सिरप को बताया घातक, 21 बच्चों की मौत से हड़कंप
ये दवाई नहीं, जहर है! WHO ने भारत के तीन कफ सिरप को बताया घातक, 21 बच्चों की मौत से हड़कंप
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भारत में बने तीन कफ सिरपों पर वैश्विक चेतावनी जारी की है, जिन्हें ‘जहर’ करार दिया गया। ये सिरप बच्चों के लिए घातक साबित हुए, जहां मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में कम से कम 21 बच्चों की मौत हो चुकी है। सिरपों में डाइएथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) नामक जहरीला पदार्थ पाया गया, जो किडनी फेलियर, न्यूरोलॉजिकल डैमेज और मौत का कारण बनता है। यह घटना 2023 के गाम्बिया-उज्बेकिस्तान कांड की याद दिला रही है, जहां भारतीय सिरपों से 140 से अधिक बच्चों की जान गई थी।
WHO की मेडिकल प्रोडक्ट अलर्ट में नामित तीन सिरप हैं: कोल्डरिफ (स्रेसन फार्मास्यूटिकल्स, तमिलनाडु), रेस्पीफ्रेश टीआर (रेडनेक्स फार्मास्यूटिकल्स) और रीलिफ (शेप फार्मा)। इनमें DEG की मात्रा 0.1% की अनुमत सीमा से सैकड़ों गुना अधिक (कोल्डरिफ में 48.6%) पाई गई। 30 सितंबर को WHO को भारत में बच्चों की मौतों के क्लस्टर की जानकारी मिली, जिसके बाद केंद्रीय ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (CDSCO) ने पुष्टि की। WHO ने सभी देशों से इन सिरपों की बिक्री, वितरण और उपयोग पर तत्काल रोक लगाने को कहा।
मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में सितंबर के अंत से मौतों का सिलसिला शुरू हुआ। 5 साल से कम उम्र के बच्चे खांसी-जुकाम के इलाज में ये सिरप लेने के बाद किडनी फेल हो गई। नागपुर के सरकारी मेडिकल कॉलेज में भर्ती 3 साल के बच्चे नीलेश सूर्यवंशी के पिता ने बताया, “डॉक्टर ने कोल्डरिफ दिया, लेकिन दो दिन बाद बेटा चल बसा।” अब तक 17-21 मौतें कन्फर्म, जबकि कई बच्चे वेंटिलेटर पर हैं। तमिलनाडु सरकार ने स्रेसन फार्मा का लाइसेंस सस्पेंड कर प्लांट सील कर दिया। गुजरात, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश ने भी अलर्ट जारी कर रिटेलर्स को स्टॉक नष्ट करने का आदेश दिया।
यह भारत का तीसरा बड़ा कफ सिरप कांड है। 2022 में मेडन फार्मास्यूटिकल्स के सिरपों से गाम्बिया में 60+ बच्चों की मौत हुई। 2023 में उज्बेकिस्तान-कैमरून में 140+ मामले। WHO ने कहा, “भारत में लोकल मार्केट के लिए टेस्टिंग में रेगुलेटरी गैप है। एक्सपोर्ट के लिए सख्त चेक हैं, लेकिन घरेलू उत्पादों पर ढील।” स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने संसद में बयान दिया, “CDSCO ने तीनों कंपनियों पर कार्रवाई की। गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस (GMP) उल्लंघन पाए गए।” केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यों को 2 साल से कम उम्र के बच्चों को कफ सिरप न देने की सलाह दोहराई।
विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधा। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा, “फार्मा हब बनने का दावा, लेकिन बच्चों का खून बह रहा। रेगुलेशन फेल।” AAP ने दिल्ली में जांच टीम भेजी। विशेषज्ञों का कहना है, DEG सस्ता सॉल्वेंट है, जो प्रोपाइलीन ग्लाइकॉल की जगह इस्तेमाल होता है। WHO ने 2022 से 7 अलर्ट जारी किए, ज्यादातर बच्चों के लिए। पेरेंट्स से अपील: सिरप खरीदने से पहले लेबल चेक करें, डॉक्टर की सलाह लें। हेल्पलाइन 108 पर शिकायत करें।
यह कांड भारत की फार्मा इंडस्ट्री की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर रहा। सरकार ने नेशनल क्वालिटी कंट्रोल लैब नेटवर्क मजबूत करने का वादा किया। फिलहाल, बाजार से सिरप हटाने का अभियान चल रहा। बच्चों की मौतें रुकें, इसके लिए सख्ती जरूरी।
