तेजस्वी vs पीके का मुकाबला फेल? जन सुराज ने राघोपुर से उतारा अपना उम्मीदवार
तेजस्वी vs पीके का मुकाबला फेल? जन सुराज ने राघोपुर से उतारा चंचल सिंह को
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में तेजस्वी यादव और प्रशांत किशोर (पीके) के बीच ड्रीम मुकाबले की अटकलें अब धूल चाट रही हैं। जन सुराज पार्टी ने मंगलवार को अपनी दूसरी उम्मीदवार सूची जारी करते हुए वैशाली जिले की राघोपुर सीट से चंचल सिंह को टिकट थमा दिया। यह सीट आरजेडी के दिग्गज नेता तेजस्वी यादव का गढ़ है, जहां पीके के चुनाव लड़ने की चर्चा जोरों पर थी। लेकिन पार्टी ने साफ कर दिया कि पीके प्रचार पर फोकस करेंगे, न कि मैदान में उतरेंगे। यह ऐलान एनडीए और महागठबंधन दोनों के लिए झटका है, क्योंकि वोट बंटवारे की नई रणनीति साफ हो गई।
पटना के पटलीपुत्र कॉलोनी स्थित पीके के निवास पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में जन सुराज के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय सिंह ने 65 उम्मीदवारों की दूसरी सूची जारी की। इसमें राघोपुर से चंचल सिंह का नाम प्रमुख है, जो स्थानीय स्तर पर सक्रिय युवा नेता हैं। उदय सिंह ने कहा, “चंचल सिंह राघोपुर के विकास के लिए मजबूत दावेदार हैं। प्रशांत जी चुनावी रणनीति बनाएंगे, खुद लड़ने का फैसला पार्टी ने लिया है।” चंचल सिंह ने टिकट मिलते ही कहा, “तेजस्वी जी ने वादे किए, लेकिन राघोपुर आज भी पिछड़ा है। जन सुराज यहां सच्चा बदलाव लाएगा।” पार्टी ने चंचल को अपना सिंबल सौंप दिया, जो यादव-मुस्लिम वोट बैंक को चुनौती देने का संकेत है।
राघोपुर लालू-राबड़ी परिवार का किला है। तेजस्वी ने 2015, 2020 और जनवरी 2025 के उपचुनाव में यहां शानदार जीत हासिल की। 11 अक्टूबर को पीके ने इसी सीट से अपनी चुनावी यात्रा शुरू की थी, जहां उन्होंने तेजस्वी पर तंज कसा – “अमेठी जैसी हार का सबक दूंगा।” लेकिन जनवरी 2025 में पहली सूची (51 उम्मीदवार) और अब दूसरी सूची में पीके का नाम न आने से सस्पेंस खत्म। विश्लेषकों का कहना है कि यह वोट काटने का मास्टरस्ट्रोक है, क्योंकि जन सुराज को 40-50 सीटें लड़ने का टारगेट है। कुल 116 सीटों पर उम्मीदवार घोषित हो चुके हैं।
आरजेडी ने इसे ‘पीके का ड्रामा’ करार दिया। प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने कहा, “प्रशांत किशोर हार से डर गए। राघोपुर तेजस्वी का किला है, चंचल सिंह कुछ नहीं बिगाड़ पाएंगे।” तेजस्वी ने ट्वीट कर पलटवार किया, “राघोपुर बिहार का दिल। जो विकास की बात करता है, पहले अपना आईना देखे। जनता सब समझती है।” एनडीए की ओर से बीजेपी प्रवक्ता प्रभात झा ने कहा, “जन सुराज आरजेडी का बी-टिम है। यह वोट बंटवारा महागठबंधन को फायदा पहुंचाएगा।” जेडीयू ने भी इसे ‘फेल स्ट्रैटेजी’ बताया।
दूसरी सूची में अन्य प्रमुख नाम: भागलपुर से अभयकांत झा, शेखपुरा से नीरज सिंह, नरकटिया से लाल बाबू यादव। सूची में ईबीसी, एससी, अल्पसंख्यक और सामान्य वर्गों का बैलेंस है। उदय सिंह ने कहा, “हम हर समुदाय को प्रतिनिधित्व देंगे। बिहार को टॉप-10 राज्य बनाएंगे।” पीके ने कहा, “चुनाव लड़ना मकसद नहीं, बिहार बदलना है। राघोपुर से प्रचार तेज होगा।” पार्टी ने 6-11 नवंबर के मतदान के लिए कैंपेन गियर अप कर लिया।
यह ट्विस्ट बिहार सियासत को नया रंग दे रहा है। राघोपुर अब त्रिकोणीय जंग का अड्डा बनेगा। क्या चंचल सिंह तेजस्वी के किले को हिला पाएंगे? या यह सिर्फ महागठबंधन को मजबूत करेगा? 14 नवंबर के नतीजों का इंतजार। फिलहाल, तेजस्वी vs पीके का ‘बॉलीवुड स्टाइल’ मुकाबला मिस हो गया, लेकिन ड्रामा तो जारी है!
