’51 करोड़ के जुर्माने को चार हजार कर दिया’: IAS नागार्जुन गौड़ा पर लगे आरोपों की सफाई, बोले- ‘जांच में खामियां मिलीं’
’51 करोड़ के जुर्माने को चार हजार कर दिया’: IAS नागार्जुन गौड़ा पर लगे आरोपों की सफाई, बोले- ‘जांच में खामियां मिलीं’
मध्य प्रदेश के चर्चित IAS अधिकारी डॉ. नागार्जुन बी गौड़ा एक बार फिर सुर्खियों में हैं। खंडवा जिला पंचायत के CEO पर आरोप लगे हैं कि उन्होंने हरदा के एडीएम रहते हुए एक सड़क निर्माण कंपनी पर लगे 51.67 करोड़ रुपये के जुर्माने को घटाकर मात्र 4,032 रुपये कर दिया। RTI एक्टिविस्ट आनंद जाट ने इसे भ्रष्टाचार का मामला बताते हुए 10 करोड़ रुपये रिश्वत लेने का भी आरोप लगाया है। लेकिन गौड़ा ने आज आज तक और नवभारत टाइम्स को दिए इंटरव्यू में इन आरोपों का खारिज करते हुए सफाई दी है। उन्होंने कहा, “यह फैसला जांच की खामियों के आधार पर लिया गया था, न कि किसी दबाव या रिश्वत के।”
मामला क्या है? अवैध खनन का पुराना केस
यह विवाद मध्य प्रदेश के हरदा जिले से जुड़ा है, जहां पाथ इंडिया प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी ने इंदौर-बैतूल नेशनल हाईवे (NH-47) के निर्माण के दौरान अवैध रूप से मुरम मिट्टी की खुदाई की थी। कंपनी पर आरोप था कि उसने अंधेरीखेड़ा क्षेत्र में बिना अनुमति के 3.11 लाख घन मीटर मिट्टी निकाली, जिससे पर्यावरण को नुकसान पहुंचा।
– शुरुआती कार्रवाई: 2022 में खनिज विभाग ने जांच शुरू की। तत्कालीन एडीएम प्रवीण फूल पगारे के नेतृत्व में 19 खदानों में 3.44 लाख घन मीटर खुदाई का आकलन किया गया। इसके आधार पर कंपनी को 51.67 करोड़ का जुर्माना नोटिस जारी किया गया – जिसमें 25.83 करोड़ जुर्माना और बाकी पर्यावरण क्षतिपूर्ति शामिल थी।
– गौड़ा की भूमिका: 2023 में नागार्जुन गौड़ा को हरदा का एडीएम बनाया गया। उन्होंने मामले की समीक्षा की और कथित तौर पर जुर्माने को घटाकर 4,032 रुपये कर दिया। RTI के जरिए यह जानकारी सामने आई, जिसके बाद सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग शुरू हो गई।
RTI एक्टिविस्ट आनंद जाट ने कहा, “यह साफ भ्रष्टाचार है। कंपनी ने अवैध खुदाई की, लेकिन IAS ने इसे माफ कर दिया।” उन्होंने ईओडब्ल्यू (आर्थिक अपराध शाखा) से जांच की मांग की है।
IAS गौड़ा की सफाई: ‘खामियां थीं, रिश्वत का आरोप बेबुनियाद’
डॉ. नागार्जुन गौड़ा, जो 2019 बैच के IAS हैं और UPSC की सेल्फ-स्टडी से प्रेरणा देते हैं, ने आरोपों को सिरे से खारिज किया। आज तक से बातचीत में उन्होंने कहा:
– जुर्माने की गणना गलत: “मैंने जांच रिपोर्ट की समीक्षा की तो पाया कि खनिज विभाग की गणना में कई खामियां थीं। कंपनी ने हाईवे निर्माण के लिए MPRDC (मध्य प्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन) से अनुमति ली थी। खुदाई वैध थी, और मात्र 0.03 लाख घन मीटर अतिरिक्त मिट्टी निकाली गई थी। 51 करोड़ का आंकड़ा अतिरंजित था।”
– नया आकलन: “मैंने साइट का निरीक्षण किया और सही माप के आधार पर जुर्माना 4,032 रुपये तय किया। यह पर्यावरण क्षति के न्यूनतम मूल्यांकन पर आधारित था। नोटिस में दोगुनी राशि गलत तरीके से जोड़ी गई थी।”
– रिश्वत का खंडन: “10 करोड़ रिश्वत का आरोप पूरी तरह झूठा है। मैंने कभी कोई अनुचित लाभ नहीं लिया। यह राजनीतिक साजिश लगती है। विभाग ने भी मेरा फैसला सही ठहराया।” गौड़ा ने साथ ही सृष्टि जयंत देशमुख (उनकी पत्नी, भी IAS) का जिक्र करते हुए कहा, “हमारी छवि साफ है, ऐसी अफवाहें हमें मजबूत बनाती हैं।”
गौड़ा ने RTI दस्तावेज शेयर किए, जिनमें साइट इंस्पेक्शन रिपोर्ट और MPRDC की अनुमति शामिल हैं। उन्होंने कहा कि पूरा मामला पारदर्शी था और उच्च अधिकारियों को सूचित किया गया था।
राजनीतिक और सामाजिक रंग: ट्रोलिंग से लेकर जांच की मांग
– सोशल मीडिया पर बवाल: ट्विटर (X) पर #IASCorruption और #NagarjunGowda ट्रेंड कर रहा है। यूजर्स मीम्स शेयर कर रहे हैं, जैसे “51 करोड़ से 4 हजार: मैजिक या मिस्टेक?”
– विपक्ष का हमला: कांग्रेस ने मध्य प्रदेश सरकार पर निशाना साधा। नेता जितु पटवारी ने कहा, “मोहन भाई के राज में IAS भी ‘माइनिंग’ कर रहे हैं। CBI जांच हो।”
– सरकार का रुख: मध्य प्रदेश सरकार ने अभी चुप्पी साधी है, लेकिन ईओडब्ल्यू जांच की संभावना से इंकार नहीं किया। गौड़ा का तबादला जून 2025 में खंडवा हुआ था।
निष्कर्ष: सच्चाई की प्रतीक्षा
नागार्जुन गौड़ा, जो डॉक्टर से IAS बने और अपनी मेहनत की कहानी से युवाओं को प्रेरित करते हैं, अब जांच के दायरे में हैं। उनकी सफाई से मामला थोड़ा स्पष्ट हुआ, लेकिन RTI एक्टिविस्ट और विपक्ष संतुष्ट नहीं। यदि ईओडब्ल्यू ने जांच शुरू की, तो सच्चाई सामने आएगी। फिलहाल, यह केस मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार के बड़े मुद्दे को हवा दे रहा है।
