बिहार: AIMIM लड़ेगी 100 सीटों पर, ओवैसी की थर्ड फ्रंट की तैयारियां जोरों पर
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने शनिवार को बड़ा ऐलान किया कि वह राज्य की लगभग 100 सीटों पर उम्मीदवार उतारेगी, जो 2020 के 20 सीटों से पांच गुना अधिक है। पार्टी प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इसे NDA (भाजपा-जदयू) और महागठबंधन (INDIA ब्लॉक) के अलावा “तीसरा विकल्प” बताते हुए थर्ड फ्रंट गठन की तैयारी तेज कर दी है। AIMIM के बिहार अध्यक्ष अख्तरुल इमान ने कहा, “हमारा प्लान 100 सीटों पर लड़ना है। दोनों गठबंधनों को हमारी मौजूदगी महसूस होगी।”
ऐलान का बैकग्राउंड: INDIA ब्लॉक से नाराजगी
AIMIM ने चुनाव से पहले महागठबंधन (RJD-कांग्रेस-वामपंथी) से गठबंधन की कोशिश की थी, लेकिन कोई सकारात्मक जवाब न मिलने पर यह फैसला लिया गया। सितंबर में ओवैसी ने तेजस्वी यादव को पत्र लिखा था, जिसमें 6 सीटों पर गठबंधन की पेशकश की गई थी, लेकिन RJD ने इसे ठुकरा दिया। ओवैसी ने कहा, “मुस्लिम वोटों को बांटने का आरोप अब नहीं लगेगा, क्योंकि हम मजबूत थर्ड फ्रंट बनाएंगे।” पार्टी अन्य समान विचारधारा वाली पार्टियों से गठबंधन की कोशिश कर रही है, जिसमें तेज प्रताप यादव जैसे नेताओं से संपर्क शामिल है।
2020 में AIMIM ने BSP और RLSP के साथ थर्ड फ्रंट बनाया था, जिसमें 20 सीटों पर 5 जीत हासिल कीं (सीमांचल क्षेत्र में)। हालांकि, 2022 तक 4 विधायक RJD में चले गए, और अब सिर्फ अख्तरुल इमान बाकी हैं। इस बार पार्टी सीमांचल (किशनगंज, अररिया, कटिहार, पूर्णिया) के अलावा मिथिलांचल (जले, बिस्फी, केओटी, दरभंगा शहर) में 4 सीटों पर फोकस कर रही है।
ओवैसी की रणनीति: मुस्लिम प्रतिनिधित्व पर जोर
ओवैसी ने हाल ही में सीमांचल न्याय यात्रा निकाली, जहां उन्होंने मुस्लिम आबादी (17% से अधिक) की उपेक्षा पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, “बिहार में मुस्लिमों को विधानसभा में आनुपातिक प्रतिनिधित्व नहीं मिला। अगर 50 मुस्लिम सांसद होते, तो वक्फ संशोधन बिल पास न होता।” पार्टी का दावा है कि थर्ड फ्रंट मुस्लिमों, पिछड़ों और दलितों की आवाज बनेगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि AIMIM का यह कदम महागठबंधन के वोट बैंक को चोट पहुंचा सकता है, खासकर सीमांचल की 24 सीटों पर जहां मुस्लिम वोट निर्णायक हैं।
राजनीतिक प्रभाव: NDA और महागठबंधन के लिए चुनौती
– महागठबंधन पर असर: RJD और कांग्रेस को मुस्लिम वोटों के बंटवारे का डर। 2020 में AIMIM को “बीजेपी की बी-टीम” कहा गया था, लेकिन अब ओवैसी इसे खारिज कर रहे हैं।
– NDA का रुख: भाजपा को फायदा हो सकता है, लेकिन ओवैसी की आलोचना से सतर्कता बरत रही है।
– थर्ड फ्रंट की संरचना: अगले 2-3 दिनों में घोषणा संभव। तेज प्रताप यादव जैसे असंतुष्ट नेताओं से बातचीत चल रही है।
चुनाव आयोग ने बिहार चुनाव दो चरणों में (पहला चरण 22 नवंबर) कराने की घोषणा कर दी है। AIMIM का यह दांव बिहार की सियासत को त्रिकोणीय बना सकता है।
