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‘मैं पार्टी का सच्चा सिपाही हूं…’: पवन सिंह ने बिहार विधानसभा चुनाव लड़ने से किया इनकार, अटकलों पर लगी विराम

‘मैं पार्टी का सच्चा सिपाही हूं…’: पवन सिंह ने बिहार विधानसभा चुनाव लड़ने से किया इनकार, अटकलों पर लगी विराम

भोजपुरी सिनेमा के सुपरस्टार पवन सिंह ने बिहार विधानसभा चुनाव 2025 लड़ने की सभी अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया है। भाजपा में शामिल होने के बाद से उनकी उम्मीदवारी को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म था, लेकिन शनिवार सुबह एक्स (पूर्व ट्विटर) पर एक पोस्ट के जरिए उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि उनका पार्टी में प्रवेश चुनाव लड़ने के उद्देश्य से नहीं हुआ। उन्होंने खुद को “पार्टी का सच्चा सिपाही” बताते हुए कहा कि वे चुनावी मैदान में उतरने के बजाय पार्टी के प्रचार में योगदान देंगे। यह ऐलान पत्नी ज्योति सिंह से विवाद के बीच आया है, जो सियासी हलकों में चर्चा का विषय बन गया है।

पवन सिंह का पोस्ट: साफ लफ्जों में इनकार

पवन सिंह ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ अपनी मुलाकात की तस्वीर शेयर करते हुए लिखा: “मैं पवन सिंह अपने भोजपुरीया समाज से बताना चाहता हूं कि मैं बिहार विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए पार्टी ज्वाइन नहीं किया था और न ही मुझे विधानसभा चुनाव लड़ना है। मैं पार्टी का सच्चा सिपाही हूं और रहूंगा।” यह पोस्ट सुबह 7 बजे के करीब पोस्ट की गई, और कुछ ही घंटों में लाखों व्यूज और हजारों लाइक्स बटोर चुकी है। पवन ने भोजपुरी समाज को संबोधित कर यह संदेश दिया, जो उनके फैन बेस का बड़ा हिस्सा है।

पवन सिंह ने अप्रैल 2025 में भाजपा की सदस्यता ली थी, जिसके बाद से यह कयास लगाए जा रहे थे कि वे भोजपुर या आरा जैसे सीटों से चुनाव लड़ सकते हैं। उनकी लोकप्रियता को देखते हुए पार्टी उन्हें “ट्रंप कार्ड” के रूप में इस्तेमाल करना चाहती थी, लेकिन पवन का यह यू-टर्न सियासी गलियारों में सवाल खड़े कर रहा है।

पत्नी ज्योति सिंह से विवाद: क्या है असली वजह?

पवन सिंह का यह फैसला पत्नी ज्योति सिंह से चल रहे विवाद के बीच आया है, जो जुलाई 2025 से सुर्खियों में है। ज्योति ने पवन पर घरेलू हिंसा, संपत्ति हड़पने और बेटे की कस्टडी न देने के आरोप लगाए थे। उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट कर कहा था, “जो व्यक्ति 15 साल से पार्टी में है और टिकट नहीं पा सका, वह मुझे क्या टिकट दिलवाएगा?” ज्योति ने पवन की राजनीतिक महत्वाकांक्षा पर भी तंज कसा था।

जानकारों का मानना है कि यह विवाद पवन के चुनावी फैसले को प्रभावित कर रहा है। एनडीटीवी के अनुसार, पवन ने पत्नी के आरोपों पर सफाई दी थी, लेकिन वह कारगर साबित नहीं हुई। कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया कि भाजपा आलाकमान भी फिलहाल पवन को टिकट न देकर स्टार प्रचारक के रूप में इस्तेमाल करने की रणनीति पर काम कर रही है। पवन की मां के चुनाव लड़ने की भी चर्चा थी, लेकिन वह भी ठंडे बस्ते में चली गई।

राजनीतिक प्रभाव: भाजपा के लिए क्या मतलब?

बिहार विधानसभा चुनाव नवंबर-दिसंबर 2025 में होने हैं, जहां एनडीए (भाजपा-जदयू) बहुमत बचाने की जद्दोजहद में है। पवन सिंह की भोजपुरी बेल्ट (भोजपुर, रोहतास, कैमूर) में मजबूत पकड़ है, और उनकी फैन फॉलोइंग युवाओं और प्रवासी बिहारियों में खासी है। उनका चुनाव न लड़ना भाजपा के लिए प्रचार का मौका देगा, लेकिन उम्मीदवार चयन में देरी का संकेत भी।

सियासी विश्लेषकों का कहना है कि पवन का फोकस अब 2029 के लोकसभा चुनाव पर हो सकता है। न्यूज18 के अनुसार, “यह लॉन्ग गेम का हिस्सा लगता है। पार्टी ने सेलिब्रिटीज को प्रचार के लिए पहले भी उतारा है।” विपक्षी दलों ने इसे “भाजपा का ड्रामा” बताते हुए तंज कसा है।

निष्कर्ष: सिपाही बने रहेंगे, लेकिन मैदान में कब?

पवन सिंह का यह ऐलान उनके फैंस और भोजपुरी समाज में राहत लेकर आया है, जो उनके राजनीतिक कदमों को लेकर चिंतित थे। वे अब पार्टी के सच्चे सिपाही के रूप में प्रचार अभियान में सक्रिय रहेंगे। लेकिन सवाल यह है कि क्या पत्नी से विवाद सुलझेगा, या यह राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है? बिहार चुनावी रणनीति में पवन का रोल अब स्टार प्रचारक तक सीमित हो गया है। अधिक अपडेट्स के लिए बने रहें।

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