Thursday, March 12, 2026
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सबसे ताकतवर ICBM: नॉर्थ कोरिया ने ह्वासॉन्ग-20 न्यूक्लियर मिसाइल पेश की

सबसे ताकतवर ICBM: नॉर्थ कोरिया ने ह्वासॉन्ग-20 न्यूक्लियर मिसाइल पेश की

उत्तर कोरिया ने अपनी सैन्य ताकत का नया जलवा दिखाया है। किम जोंग उन की अगुवाई में आयोजित वर्कर्स पार्टी की 80वीं वर्षगांठ के अवसर पर प्योंगयांग के किम इल-सुंग स्क्वायर में शानदार सैन्य परेड में ह्वासॉन्ग-20 (Hwasong-20) को पहली बार दुनिया के सामने पेश किया गया। कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी (KCNA) ने इसे “लोकतांत्रिक पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ कोरिया (DPRK) का सबसे शक्तिशाली न्यूक्लियर स्ट्रैटेजिक वेपन सिस्टम” करार दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि इस ICBM की रेंज 15,000 किलोमीटर से अधिक है, जो अमेरिका के किसी भी कोने को निशाना बनाने में सक्षम है।

परेड का भव्य आयोजन: किम के बीच में विदेशी मेहमान

10 अक्टूबर की रात को हुआ यह परेड उत्तर कोरिया की सैन्य क्षमता का प्रदर्शन था। किम जोंग उन ने चीनी प्रधानमंत्री ली कियांग, रूसी सुरक्षा परिषद के उपाध्यक्ष दिमित्री मेदवेदेव और वियतनाम के नेता तो लाम के साथ मंच साझा किया। परेड में ह्वासॉन्ग-20 के अलावा हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल ह्वासॉन्ग-11Ma, लॉन्ग-रेंज क्रूज मिसाइलें, ड्रोन लॉन्चर और नई टैंक्स भी दिखाई गईं। KCNA के अनुसार, “जब ह्वासॉन्ग-20 का काफिला स्क्वायर में दाखिल हुआ, तो दर्शकों ने सबसे जोरदार तालियां बजाईं।” किम ने परेड के दौरान अमेरिका और दक्षिण कोरिया पर अप्रत्यक्ष निशाना साधा, लेकिन सीधी धमकी नहीं दी।

ह्वासॉन्ग-20 की खासियतें: अगली पीढ़ी की घातक मिसाइल

यह ICBM उत्तर कोरिया की ह्वासॉन्ग सीरीज का सबसे उन्नत मॉडल है, जो सॉलिड-फ्यूल रॉकेट पर आधारित है। राज्य मीडिया के अनुसार, इसका इंजन कार्बन फाइबर कंपोजिट से बना है, जो ह्वासॉन्ग-18 से 40% अधिक थ्रस्ट (1,971 kN) पैदा करता है। मुख्य विशेषताएं:

| विशेषता | विवरण |

| रेंज | 15,000 किमी+ (अमेरिका महाद्वीप को कवर)

| इंजन | सॉलिड-फ्यूल, हाई-थ्रस्ट, कार्बन फाइबर कंपोजिट

| लॉन्चर | 11-एक्सल ट्रांसपोर्टर, मोबाइल और छिपाने में आसान

| क्षमता | MIRV (मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टारगेटेबल री-एंट्री व्हीकल) – एक मिसाइल से कई वारहेड्स

| गाइडेंस | एडवांस्ड इनर्शियल नेविगेशन + GPS/ऑप्टिकल सेंसर, री-एंट्री में स्थिरता

यह मिसाइल स्पाई सैटेलाइट्स से बचने में सक्षम है, क्योंकि सॉलिड फ्यूल इसे तुरंत लॉन्च करने की सुविधा देता है। 2023-2025 के बीच इसके इंजन के 8 स्टेटिक फायरिंग टेस्ट हो चुके हैं, और सितंबर 2025 में अंतिम टेस्ट किम की निगरानी में हुआ। विशेषज्ञों का कहना है कि यह अमेरिकी एयर डिफेंस सिस्टम्स (जैसे THAAD) के लिए बड़ी चुनौती है, क्योंकि हाइपरसोनिक स्पीड और MIRV क्षमता से इसे रोकना मुश्किल।

अमेरिका पर फोकस: रणनीतिक संदेश

उत्तर कोरिया ने ह्वासॉन्ग-20 को “अमेरिकी मुख्यभूमि पर हमले के लिए” डिजाइन बताया है। KCNA ने कहा कि यह “कॉमरेड किम जोंग उन की नेतृत्व में DPRK की न्यूक्लियर ताकत का प्रतीक” है। हाल के महीनों में उत्तर कोरिया ने रूस को हथियार सप्लाई (कुर्स्क क्षेत्र में तैनाती) के आरोप झेले हैं, जिससे पश्चिमी देशों में चिंता बढ़ी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे “प्रमोशनल शो” बताया, लेकिन पेंटागॉन ने कहा कि “हम इसकी क्षमताओं की निगरानी कर रहे हैं।” दक्षिण कोरिया और जापान ने संयुक्त बयान जारी कर “उत्तरी खतरों” की निंदा की।

वैश्विक प्रतिक्रियाएं: चिंता और आलोचना

– अमेरिका: व्हाइट हाउस ने कहा, “यह परेड DPRK की आक्रामक महत्वाकांक्षाओं को दर्शाता है। हम डिप्लोमेसी के लिए तैयार हैं, लेकिन मजबूत रक्षा बनाए रखेंगे।”

– चीन-रूस: दोनों देशों के नेता परेड में मौजूद थे, जो उत्तर कोरिया के साथ गठबंधन को मजबूत करता है।

– विशेषज्ञों की राय: CNN के अनुसार, “यह मिसाइल उत्तर कोरिया को न्यूक्लियर पावर के रूप में स्थापित करती है, लेकिन री-एंट्री टेक्नोलॉजी पर सवाल बाकी हैं।” अल जजीरा ने इसे “क्षेत्रीय तनाव बढ़ाने वाला” बताया।

निष्कर्ष: तनाव की नई लहर

ह्वासॉन्ग-20 का अनावरण उत्तर कोरिया की न्यूक्लियर महत्वाकांक्षा को नई ऊंचाई देता है। किम जोंग उन ने परेड के बाद कहा, “हमारी सेना दुश्मनों को कुचलने को तैयार है।” वैश्विक समुदाय अब डिप्लोमेसी और प्रतिबंधों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करेगा। क्या यह ट्रंप-किम की नई बातचीत का संकेत है, या युद्ध की धमकी? आने वाले दिनों में साफ होगा।

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