उत्तराखंड

NCRB रिपोर्ट: उत्तराखंड में तीन वर्षों में महिला अपराध दर में 11% की वृद्धि, क्राइम ग्राफ में तेज उछाल

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की ताजा रिपोर्ट ने उत्तराखंड में महिलाओं के खिलाफ अपराधों की चिंताजनक स्थिति को उजागर किया है। रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में पिछले तीन वर्षों (2020-2023) के दौरान महिला अपराध दर में औसतन 11 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। यह आंकड़ा न केवल राज्य की कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है, बल्कि सामाजिक सुरक्षा के मोर्चे पर भी चेतावनी का संकेत देता है। NCRB की ‘क्राइम इन इंडिया 2023’ रिपोर्ट, जो सितंबर 2025 में जारी हुई, से पता चलता है कि उत्तराखंड महिला अपराधों के मामले में देश के 13 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में शामिल हो गया है, जहां अपराध दर राष्ट्रीय औसत (66.4 प्रति लाख महिलाओं पर) से ऊपर है।

डेटा का विश्लेषण: उछाल का ग्राफ

NCRB के आंकड़ों के आधार पर, उत्तराखंड में महिला अपराध दर का ट्रेंड निम्नलिखित है:

वर्ष | महिला अपराध दर (प्रति लाख महिलाओं पर) | प्रतिशत वृद्धि (पिछले वर्ष से)

2020 | 62.4 | –
2021 | 69.5 | 11.4%
2022 | 77.0 | 10.8%
2023 | 84.2 | 9.4%

स्रोत: NCRB क्राइम इन इंडिया रिपोर्ट 2020-2023 (गणना औसत वृद्धि पर आधारित)

इस तालिका से स्पष्ट है कि 2020 में 62.4 की दर से शुरू होकर 2023 तक यह 84.2 तक पहुंच गई, जो औसतन 11 प्रतिशत सालाना वृद्धि दर्शाती है। कुल मामलों की संख्या में भी 26 प्रतिशत का उछाल आया है – 2023 में 905 दुष्कर्म के मामले दर्ज हुए, जबकि 778 महिलाओं का अपहरण दर्ज किया गया। राज्य में कुल IPC अपराधों में महिलाओं के खिलाफ अपराधों का हिस्सा 59.5 प्रतिशत तक पहुंच गया, जो पड़ोसी उत्तर प्रदेश (46.8%) से भी अधिक है।

रिपोर्ट के अनुसार, अपराधों का प्रमुख प्रकार पति या ससुराल वालों द्वारा क्रूरता (31.4%) रहा, उसके बाद अपहरण और अपहरण (19.2%), महिलाओं पर आघात (18.7%) और दुष्कर्म (7.1%)। आश्चर्यजनक रूप से, दुष्कर्म पीड़ितों में 487 महिलाएं 18-30 वर्ष की आयु वर्ग की थीं, और 99.9 प्रतिशत अपराधी पीड़ितों के परिचित ही पाए गए। राज्य में 631 अपहरण के मामले भी दर्ज हुए, जो महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठाते हैं।

राज्य स्तर पर तुलना: उत्तराखंड का स्थान

देशव्यापी दृष्टि से, उत्तराखंड महिला अपराध दर में 11वें स्थान पर है। दिल्ली (144.4), हरियाणा (118.7), तेलंगाना (117) जैसे राज्य सबसे ऊपर हैं, लेकिन उत्तराखंड की 77 (2022) से बढ़कर 84.2 (2023) की दर चिंता का विषय है। राष्ट्रीय स्तर पर 2023 में 4.45 लाख से अधिक मामले दर्ज हुए, जो हर 51 मिनट में एक FIR के बराबर है। उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक 65,743 मामले दर्ज हुए, लेकिन उत्तराखंड जैसे छोटे राज्य में प्रतिशत वृद्धि अधिक खतरनाक है।

वहीं, कुछ राज्यों में कमी भी देखी गई – जैसे असम में 51 प्रतिशत की गिरावट। NCRB के अनुसार, कुल अपराध मामलों में 7.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो 6.24 मिलियन तक पहुंच गई, और अपराध दर 448.3 प्रति लाख आबादी हो गई।

विशेषज्ञों की राय: कारण और समाधान

सामाजिक कार्यकर्ता और महिला अधिकार विशेषज्ञ डॉ. रीता शर्मा ने बताया, “यह वृद्धि रिपोर्टिंग में सुधार का संकेत हो सकती है, लेकिन वास्तविकता इससे कहीं अधिक गंभीर है। ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी और पुलिस की संवेदनशीलता का अभाव मुख्य कारण हैं।” NCRB रिपोर्ट में भी उल्लेख है कि चार्जशीट दाखिल करने की दर 75.8 प्रतिशत है, लेकिन दोषसिद्धि दर 10 वर्षों के न्यूनतम स्तर पर पहुंच गई है।

सरकार की ओर से ‘मिशन शक्ति’, ‘सखी वन-स्टॉप सेंटर’ जैसी योजनाएं चल रही हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इन्हें और मजबूत करने की जरूरत है। उत्तराखंड सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा के लिए विशेष पुलिस थाने खोलने और जागरूकता अभियान चलाने का वादा किया है।

निष्कर्ष: तत्काल कार्रवाई की मांग

NCRB की यह रिपोर्ट उत्तराखंड के लिए एक जागृति का क्षण है। तीन वर्षों में 11 प्रतिशत की औसत वृद्धि न केवल आंकड़ों का खेल है, बल्कि समाज की नैतिकता पर सवाल है। महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कड़े कानून प्रवर्तन, शिक्षा और सामाजिक बदलाव आवश्यक हैं। यदि यही ट्रेंड जारी रहा, तो राज्य की ‘देवभूमि’ की छवि धूमिल हो सकती है। सरकार और समाज दोनों को मिलकर इस उछाल को रोकना होगा।

(यह विश्लेषण NCRB की आधिकारिक रिपोर्ट और संबंधित आंकड़ों पर आधारित है। अधिक जानकारी के लिए ncrb.gov.in पर जाएं।)

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