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US आर्मी में दाढ़ी पर प्रतिबंध: सिख नेताओं का विरोध

US आर्मी में दाढ़ी पर प्रतिबंध: सिख नेताओं का विरोध

हाल ही में अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ द्वारा जारी किए गए नए ग्रूमिंग नियमों ने अमेरिकी सेना में दाढ़ी और लंबे बालों पर सख्त प्रतिबंध लगा दिया है, जिससे सिख समुदाय में भारी आक्रोश फैल गया है। यह नीति 2010 से पहले के मानकों पर लौटने का निर्देश देती है, जिसमें धार्मिक छूट को भी सीमित करने का प्रयास किया गया है। सिखों के लिए दाढ़ी (केश) और पगड़ी धार्मिक अनुष्ठान का अभिन्न अंग है, और इस प्रतिबंध को वे अपनी धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला मान रहे हैं।

नीति का विवरण

– क्या कहा गया है? हेगसेथ ने 30 सितंबर 2025 को वर्जीनिया के क्वांटिको में सैन्य नेताओं को संबोधित करते हुए कहा, “No more beardos” (अब दाढ़ी वालों का दौर समाप्त)। पेंटागन के मेमो के अनुसार, सभी सैनिकों को साफ मुंडवाना अनिवार्य होगा; दाढ़ी, गोटी या अन्य चेहरे के बाल केवल विशेष चिकित्सकीय कारणों या एलीट स्पेशल फोर्सेज के लिए अनुमत होंगे। धार्मिक छूट “सामान्यतः अधिकृत नहीं” होगी।

– कार्यान्वयन: सभी शाखाओं को 60 दिनों में योजना प्रस्तुत करनी होगी, और 90 दिनों में पूर्ण प्रवर्तन होगा। जो अनुपालन न करें, उन्हें भर्ती में देरी या सेवा से हटाया जा सकता है।

सिख नेताओं और संगठनों का विरोध

सिख समुदाय ने इस नीति को “विश्वासघात” और “धार्मिक भेदभाव” करार दिया है। प्रमुख प्रतिक्रियाएं:

– सिख कोअलिशन: अमेरिका में सिखों के प्रमुख वकालत संगठन ने बयान जारी कर कहा, “हम गुस्से और गहरी चिंता में हैं। यह नीति सिख, मुस्लिम और ऑर्थोडॉक्स यहूदियों को अपनी आस्था और सेवा के बीच चुनने पर मजबूर करती है।” संगठन ने जोर दिया कि सिख सैनिकों ने हमेशा अपनी धार्मिक पहचान बनाए रखते हुए देश की सेवा की है।

– नॉर्थ अमेरिकन पंजाबी एसोसिएशन (NAPA): कार्यकारी निदेशक सतनाम सिंह चहल ने कहा, “एक सिख सैनिक से दाढ़ी मुंडवाना मांगना उसी तरह है जैसे उससे अपनी आस्था त्यागने को कहना। यह अनुशासन का मुद्दा नहीं, बल्कि सम्मान और धार्मिक पहचान को छीनने का है।” NAPA ने ट्रंप प्रशासन से नीति को रोकने की अपील की है।

– भारतीय सिख संगठन:

– शिरोमणि अकाली दल (SAD): अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर को पत्र लिखकर कहा कि अमेरिकी सरकार को सिख सैनिकों को पगड़ी और दाढ़ी रखने का अधिकार सुनिश्चित करना चाहिए। उन्होंने प्रथम विश्व युद्ध से सिखों की सेवाओं का हवाला दिया।

– शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) और अकाल तख्त: इन प्रमुख संस्थाओं ने नीति की समीक्षा करने का ऐलान किया है और कहा कि वे अमेरिकी सिख सैनिकों से परामर्श के बाद बयान जारी करेंगी। पूर्व जathedार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने प्रावधानों को बहाल करने की मांग की।

– अन्य समुदाय: ऑर्थोडॉक्स यहूदियों, मुस्लिमों और काले सैनिकों (जिन्हें शेविंग से त्वचा की समस्या होती है) ने भी विरोध जताया। माइकी वेनस्टीन (मिलिट्री रिलिजियस फ्रीडम फाउंडेशन) ने इसे “सफेद, ईसाई पुरुषों के प्रति पक्षपात” बताया।

ऐतिहासिक संदर्भ

– सिख प्रथम विश्व युद्ध से अमेरिकी सेना में सेवा दे रहे हैं। 1917 में भगत सिंह थिंड पहले सिख थे जिन्हें पगड़ी पहनने की अनुमति मिली।

– 1981 के सुप्रीम कोर्ट फैसले (गोल्डमैन बनाम वेनबर्गर) के बाद सख्त नियम लागू हुए, लेकिन 2010 में कैप्टन सिमरन प्रीत सिंह लंबा और मेजर कमलजीत सिंह कलसी को छूट मिली, जो धार्मिक स्वतंत्रता बहाली अधिनियम (RFRA) पर आधारित थी।

– 2017 में आर्मी डायरेक्टिव 2017-03 ने औपचारिक रूप से पगड़ी, दाढ़ी और अनकट बालों को मंजूरी दी। 2022 में फेडरल कोर्ट ने सिख भर्तियों के लिए दाढ़ी-पगड़ी की अनुमति को बरकरार रखा।

– जुलाई 2025 में आर्मी ने चिकित्सकीय छूटों को सीमित किया, लेकिन धार्मिक छूट बरकरार रखी। नई नीति इन सभी को प्रभावित कर सकती है।

वर्तमान स्थिति

यह मुद्दा धार्मिक स्वतंत्रता और सैन्य अनुशासन के बीच टकराव को उजागर करता है। सिख संगठन अदालतों और कूटनीतिक चैनलों के माध्यम से लड़ाई लड़ने की तैयारी में हैं। हेगसेथ का कहना है कि यह “घातकता और अनुशासन” के लिए जरूरी है, लेकिन आलोचक इसे विविधता पर हमला मानते हैं। यदि नीति लागू हुई, तो सैकड़ों सिख सैनिक प्रभावित हो सकते हैं।

सिख समुदाय की यह लड़ाई अमेरिकी मूल्यों—समावेशिता और धार्मिक आजादी—की परीक्षा है। अधिक अपडेट के लिए सिख कोअलिशन या NAPA की वेबसाइट देखें।

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