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फ्रांस के पीएम ने 27 दिनों में छोड़ी कुर्सी: राजनीतिक संकट गहराया

फ्रांस के पीएम ने 27 दिनों में छोड़ी कुर्सी: राजनीतिक संकट गहराया

फ्रांस की राजनीति में एक और बड़ा झटका लगा है। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के करीबी सहयोगी और हाल ही में नियुक्त प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू ने मात्र 27 दिनों के कार्यकाल के बाद इस्तीफा दे दिया। यह इस्तीफा रविवार को नए कैबिनेट की घोषणा के महज 12-24 घंटों बाद आया, जो फ्रांस के आधुनिक इतिहास का सबसे छोटा कार्यकाल वाला प्रशासन बन गया। इस घटना ने देश को गहरे राजनीतिक संकट में डाल दिया है, जहां संसद में बहुमत न होने के कारण सरकारें लगातार गिर रही हैं।

क्या हुआ?

– इस्तीफे की तारीख: 6 अक्टूबर 2025 को सुबह मैक्रों को सौंपा गया, जिसे राष्ट्रपति ने स्वीकार कर लिया।

– कारण: लेकोर्नू ने कहा कि उन्होंने “समझौता करने की कोशिश की, लेकिन हर राजनीतिक दल दूसरे दल को अपना पूरा एजेंडा थोपना चाहता था।” उन्होंने “पक्षपाती रवैय्या” और “कुछ अहंकारों” को जिम्मेदार ठहराया। विशेष रूप से, केंद्र-दक्षिणपंथी लेस रिपब्लिकांस (LR) पार्टी ने नए कैबिनेट पर असंतोष जताया, जिसके बाद यह कदम उठाया गया।

– पृष्ठभूमि: लेकोर्नू को सितंबर 2025 के शुरुआती दिनों में नियुक्त किया गया था, जब पिछले सरकारें बजट पास करने में नाकाम रहीं। वे मैक्रों के पिछले दो वर्षों में पांचवें पीएम थे।

राजनीतिक संकट का संदर्भ

फ्रांस की राजनीति 2024 के अस्पष्ट चुनावों से अव्यवस्थित है, जहां कोई भी दल स्पष्ट बहुमत हासिल नहीं कर सका। दक्षिणपंथी नेशनल रैली (राष्ट्रीय संघ) और वामपंथी ला फ्रांस इंसुमिस (फ्रांस अडिग) जैसे गुटों के बीच गतिरोध ने कई सरकारों को अस्थिर कर दिया।

– बजट का मुद्दा: फ्रांस का घाटा जीडीपी का 5.8% है, जबकि कर्ज 114% तक पहुंच गया है—यह यूरोपीय संघ के नियमों से दोगुना है। निवेशक चिंतित हैं कि नया बजट न पास हो पाए।

– पिछले उदाहरण: लेकोर्नू के दो पूर्ववर्ती पीएम भी संसद में खर्च कटौती पर असफल रहे।

बाजार और प्रतिक्रियाएं

– बाजार पर असर: खबर आने पर पेरिस का CAC 40 सूचकांक 2% से अधिक गिरा, जो यूरोप के प्रमुख सूचकांकों में सबसे खराब प्रदर्शन था। यूरो डॉलर के मुकाबले 0.7% कमजोर हुआ। बैंकों के शेयरों पर सबसे ज्यादा दबाव पड़ा।

– विपक्ष की मांगें:

– नेशनल रैली (दक्षिणपंथी): “मैक्रोनवाद मर चुका है।” उन्होंने संसद भंग करने या मैक्रों के इस्तीफे की मांग की।

– ला फ्रांस इंसुमिस (वामपंथी): नेता जीन-लुक मेलेंचोन ने मैक्रों के खिलाफ महाभियोग की मांग की।

– अन्य: विशेषज्ञों का कहना है कि फ्रांस “शासनीय न होने” की कगार पर है।

आगे क्या?

मैक्रों के पास तीन विकल्प हैं:

1. नया पीएम नियुक्त करना।

2. संसद भंग करके नए चुनाव कराना।

3. खुद इस्तीफा देना (जिसे वे 2027 के राष्ट्रपति चुनाव तक खारिज कर चुके हैं)।

विश्लेषकों का अनुमान है कि अगले कुछ दिनों में नया कैबिनेट गठन हो सकता है, लेकिन संकट गहराने की आशंका है। लेकोर्नू के मंत्रियों को अस्थायी रूप से कार्यभार सौंपा गया है। यह घटना फ्रांस की आर्थिक स्थिरता और यूरोपीय संघ के लिए चुनौती है। अधिक अपडेट के लिए फ्रेंच मीडिया जैसे Le Monde या Reuters देखें।

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