मध्य प्रदेश में कफ सिरप का काला साया: छिंदवाड़ा के बाद बैतूल में 2 मासूमों की मौत, कुल 16 बच्चों की गई जान; स्वास्थ्य विभाग अलर्ट पर
मध्य प्रदेश में कफ सिरप का काला साया: छिंदवाड़ा के बाद बैतूल में 2 मासूमों की मौत, कुल 16 बच्चों की गई जान; स्वास्थ्य विभाग अलर्ट पर
मध्य प्रदेश में जहरीले कफ सिरप का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा। छिंदवाड़ा जिले में 11 मासूमों की मौत के बाद अब बैतूल जिले के आमला ब्लॉक में दो और बच्चों ने दम तोड़ दिया है। प्रारंभिक जांच में किडनी फेलियर को मौत का कारण बताया गया है, और संदेह उसी ‘कोल्ड्रिफ’ सिरप पर है, जो छिंदवाड़ा हादसे का मुख्य आरोपी है। इन नई मौतों के साथ राज्य में कुल 16 बच्चों की जान जा चुकी है। स्वास्थ्य विभाग ने पूरे प्रदेश में अलर्ट जारी कर दिया है, जबकि केंद्र सरकार ने 6 राज्यों में फार्मा यूनिट्स पर रिस्क-बेस्ड जांच शुरू कर दी है।
बैतूल जिले के आमला ब्लॉक के दो गांवों—मल्हारगढ़ और सिरोंद—के निवासी चार वर्षीय कबीर यादव और ढाई वर्षीय गर्मित की हालत अचानक बिगड़ गई। दोनों को खांसी-जुकाम की शिकायत पर छिंदवाड़ा जिले के परासिया क्षेत्र के एक ही निजी डॉक्टर (डॉ. प्रवीण सोनी) के पास इलाज के लिए ले जाया गया था। डॉक्टर ने उन्हें कोल्ड्रिफ सिरप लिखा, जिसके बाद बच्चों की तबीयत और बिगड़ गई। परिवारों ने बताया कि सिरप पीने के कुछ दिनों बाद बच्चों को उल्टी, दस्त और कमजोरी हुई, फिर किडनी फेलियर हो गया। कबीर को 8 सितंबर को भोपाल के हमीदिया अस्पताल रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। वहीं, गर्मित की हालत 1 अक्टूबर को बिगड़ी और वह भी एम्स भोपाल में दम तोड़ चुका।
यह घटना छिंदवाड़ा के हादसे से मिलती-जुलती है, जहां 24 अगस्त से शुरू हुई खांसी-बुखार की शिकायतों के बीच 11 बच्चे (2-8 वर्ष आयु वर्ग) किडनी फेलियर से शिकार हो चुके हैं। नागपुर के अस्पतालों में भर्ती कुछ बच्चे अभी भी वेंटिलेटर पर हैं। बैतूल के जिलाधिकारी राकेश श्रीवास्तव ने कहा, “दोनों मौतों की वजह किडनी फेलियर है। डॉक्टर प्रवीण सोनी से इलाज की पुष्टि हुई है। सिरप के सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं।” स्वास्थ्य विभाग ने बैतूल में डॉक्टर के क्लीनिक पर छापा मारा और सिरप जब्त किया। डॉ. सोनी, जो छिंदवाड़ा मामले में पहले ही गिरफ्तार हो चुके हैं, पर अब बैतूल में भी एफआईआर दर्ज की गई है।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इसे ‘राज्यव्यापी संकट’ बताते हुए तत्काल प्रभाव से कोल्ड्रिफ और नेक्स्ट्रो-डीएस सिरप की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया। उन्होंने प्रत्येक मृतक परिवार को 5 लाख रुपये मुआवजे का ऐलान किया। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी राज्यों के साथ हाई-लेवल मीटिंग की, जिसमें सीडीएससीओ (सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन) ने तमिलनाडु, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, केरल और दिल्ली में फार्मा यूनिट्स पर छापेमारी के आदेश दिए। श्रीसन फार्मास्यूटिकल्स कंपनी (तमिलनाडु) के खिलाफ राष्ट्रीय स्तर पर केस दर्ज हो चुका है। जांच में सिरप में डायएथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) की मिलावट पाई गई, जो किडनी को नष्ट करने वाला जहरीला रसायन है।
राजस्थान में भी इसी सिरप से 3 बच्चों की मौत हो चुकी है, जिसके बाद वहां ड्रग कंट्रोलर को सस्पेंड कर दिया गया। विपक्ष ने सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाया। पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ ने कहा, “दवा उद्योग की निगरानी में घोर लापरवाही है। उच्च स्तरीय जांच जरूरी।” विशेषज्ञों का कहना है कि सस्ते सॉल्वेंट की मिलावट से बचने के लिए लैब टेस्टिंग अनिवार्य होनी चाहिए। स्वास्थ्य विभाग ने सभी मेडिकल स्टोर्स पर छापेमारी के आदेश दिए हैं और अभिभावकों को सलाह दी है कि बच्चों को बिना डॉक्टर की सलाह कोई सिरप न दें।
यह सिलसिला दवा नियमन प्रणाली की कमियों को उजागर कर रहा है। एनआईवी पुणे की रिपोर्ट ने पुष्टि की कि मौतें मिलावटी सिरप से ही हुईं। प्रदेश भर में 13 बच्चे अभी भी खतरे में हैं। सरकार ने इमरजेंसी हेल्पलाइन (104) शुरू की है। यह त्रासदी मध्य प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी को भी रेखांकित करती है।
