संभल मस्जिद: अवैध हिस्सा कमेटी ने खुद तोड़ा, बुलडोजर से पहले प्रशासन ने मैरिज हॉल गिराया
संभल मस्जिद: अवैध हिस्सा कमेटी ने खुद तोड़ा, बुलडोजर से पहले प्रशासन ने मैरिज हॉल गिराया
उत्तर प्रदेश के संभल जिले के रावा बुजुर्ग गांव में अवैध निर्माण के खिलाफ प्रशासन की कार्रवाई ने एक नया मोड़ ले लिया है। जिला प्रशासन द्वारा जारी नोटिस के बाद मस्जिद कमेटी ने स्वयं ही अवैध हिस्से को तोड़ना शुरू कर दिया, जबकि पड़ोस के एक मैरिज हॉल को बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया गया। यह कार्रवाई सरकारी तालाब की जमीन पर कब्जे के खिलाफ की गई, जहां मस्जिद का एक हिस्सा और मैरिज हॉल अवैध रूप से बने थे। कमेटी को चार दिन का समय दिया गया था, जिसके बाद वे खुद ही हथौड़ों से तोड़फोड़ में जुट गए।
घटना 2 अक्टूबर को शुरू हुई, जब डुगसेहरा के दिन प्रशासन ने भारी पुलिस बल के साथ कार्रवाई की। संभल के एसपी केके बिश्नोई ने बताया कि 2 सितंबर को धारा 67 के तहत नोटिस जारी किए गए थे, जिसमें 30 दिनों का समय दिया गया था। लेकिन कोई कार्रवाई न होने पर बुलडोजर लगाया गया। मैरिज हॉल, जो लगभग 2,300 वर्ग मीटर में फैला था, पूरी तरह गिरा दिया गया। मस्जिद कमेटी ने जिलाधिकारी से अनुरोध कर चार अतिरिक्त दिन मांगे, जो मंजूर कर लिए गए। कमेटी के सदस्यों ने कहा, “हम प्रशासन के साथ सहयोग कर रहे हैं ताकि क्षेत्र में शांति बनी रहे।”
प्रशासन का दावा है कि मस्जिद का एक हिस्सा सरकारी तालाब की जमीन पर बना था, जो दशकों पुराना अतिक्रमण है। राजस्व विभाग ने हाल ही में सर्वे कर इसे पुष्टि की। मस्जिद कमेटी के प्रतिनिधि मिन्जर ने कहा कि वे स्वेच्छा से अवैध हिस्सा हटा रहे हैं, लेकिन पूर्ण मस्जिद को बचाने की कोशिश कर रहे हैं। इलाके में भारी सुरक्षा बल तैनात हैं, जिसमें पीएसी और स्थानीय पुलिस शामिल हैं। फ्लैग मार्च कर ग्रामीणों को घरों में रहने की अपील की गई।
यह संभल में चार महीनों में दूसरी ऐसी कार्रवाई है। अप्रैल 2025 में शाही जामा मस्जिद पर भी बुलडोजर चला था, जो 2024 की सांप्रदायिक हिंसा से जुड़ी थी। उस समय सर्वे के दौरान हिंसा हुई थी, जिसमें पांच मुसलमान मारे गए थे। सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2024 में सर्वे पर रोक लगाई थी, लेकिन इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में मस्जिद कमेटी की याचिका खारिज कर दी। समाजवादी पार्टी के सांसद जियाउर रहमान बरक ने इसे “असंवैधानिक” बताते हुए योगी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, “बुलडोजर न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है।”
स्थानीय निवासियों में चिंता है। एक ग्रामीण ने कहा, “मस्जिद दस साल पुरानी है, लेकिन अब अचानक कार्रवाई क्यों?” प्रशासन ने शांति बनाए रखने की अपील की है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी कार्रवाइयां अतिक्रमण हटाने के लिए जरूरी हैं, लेकिन सांप्रदायिक संवेदनशीलता को ध्यान में रखना चाहिए। मस्जिद का अवैध हिस्सा पूरी तरह हटने के बाद स्थिति स्पष्ट होगी। यह घटना यूपी में ‘बुलडोजर जस्टिस’ की बहस को फिर से हवा दे रही है।
