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एक्ट्रेस संध्या शांताराम का निधन: 87 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस, पिंजर, नव रंग जैसी फिल्मों से अमर

एक्ट्रेस संध्या शांताराम का निधन: 87 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस, पिंजर, नव रंग जैसी फिल्मों से अमर

भारतीय सिनेमा की दिग्गज अभिनेत्री संध्या शांताराम (विजया देशमुख) का आज सुबह मुंबई में निधन हो गया। वे 87 वर्ष की थीं और लंबे समय से उम्र संबंधी बीमारियों से जूझ रही थीं। संध्या जी, जो प्रख्यात फिल्म निर्माता वी. शांताराम की पत्नी भी थीं, हिंदी और मराठी सिनेमा में अपनी नृत्य और अभिनय कला के लिए हमेशा याद की जाएंगी। उनका अंतिम संस्कार आज शाम वैकुंठ धाम, शिवाजी पार्क में किया गया, जहां परिवार, दोस्तों और प्रशंसकों ने उन्हें अंतिम विदाई दी।

निधन की जानकारी

– कारण: संध्या जी का निधन उम्र संबंधी स्वास्थ्य समस्याओं के कारण हुआ। इंडिया टुडे के सूत्रों के अनुसार, वे कई महीनों से अस्वस्थ थीं, लेकिन विस्तृत जानकारी परिवार ने साझा नहीं की।

– अंतिम संस्कार: अंतिम संस्कार मुंबई के शिवाजी पार्क क्रीमेटोरियम में हुआ। समारोह में परिवार के सदस्य, फिल्म उद्योग के दिग्गज और करीबी शामिल हुए।

संध्या शांताराम का जीवन परिचय

– जन्म और शुरुआत: संध्या का जन्म 13 सितंबर 1938 को आंध्र प्रदेश (कुछ स्रोतों के अनुसार केरल के कोच्चि) में विजया देशमुख के रूप में हुआ। उन्होंने 1952 में वी. शांताराम की मराठी फिल्म ‘अमर भूपाली’ से डेब्यू किया, जहां वे एक गायिका की भूमिका में थीं। वी. शांताराम से शादी के बाद वे उनकी अधिकांश फिल्मों में नजर आईं।

– कैरियर हाइलाइट्स: 1950-60 के दशक में उन्होंने ‘झनक झनक पायल बाजे’ (1955), ‘दो आंखें बारह हाथ’ (1957), ‘नव रंग’ (1959) और ‘पिंजर’ (1972) जैसी क्लासिक फिल्मों में शानदार प्रदर्शन किया। ‘नव रंग’ का गाना “अरे जा रे हट नटखट” आज भी सुपरहिट है, जिसके लिए उन्होंने क्लासिकल डांस सीखा। ‘पिंजर’ के लिए उन्हें मराठी फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला। वे शांताराम की फिल्मों में नृत्य और अभिनय का अनोखा संगम लाईं।

– व्यक्तिगत जीवन: वी. शांताराम की तीसरी पत्नी के रूप में वे राजा नरसिम्हा शांताराम की मां थीं। उन्होंने फिल्मों के अलावा सामाजिक कार्यों में भी योगदान दिया। 2009 में ‘नव रंग’ की 50वीं वर्षगांठ पर वे वी. शांताराम अवॉर्ड्स में विशेष उपस्थिति के लिए आईं।

बॉलीवुड और प्रशंसकों की श्रद्धांजलि

फिल्म उद्योग में शोक की लहर दौड़ गई है। निर्देशक मधुर भंडारकर ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लिखा: “दिग्गज अभिनेत्री संध्या शांताराम जी के निधन पर दुखी हूं। पिंजर, दो आंखें बारह हाथ, नव रंग और झनक झनक पायल बाजे जैसी फिल्मों में उनकी भूमिकाएं हमेशा याद रहेंगी।”

महाराष्ट्र के मंत्री आशीष शेलार ने भी शोक व्यक्त किया: “पिंजर फिल्म में उनकी भूमिका अविस्मरणीय है। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दें।”

सोशल मीडिया पर प्रशंसक उन्हें “स्वर्ण युग की नायिका” बता रहे हैं। एक यूजर ने लिखा: “ओम शांति। संध्या जी का नृत्य और अभिनय अमर रहेगा।”

संध्या शांताराम का निधन भारतीय सिनेमा के एक युग का अंत है। उनकी फिल्में आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेंगी। शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदनाएं!

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