Monday, September 7, 2026
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UP ATS का ताबड़तोड़ एक्शन: ‘मुजाहिदीन आर्मी’ के 4 आतंकी गिरफ्तार, जिहादी साजिश नाकाम

उत्तर प्रदेश एंटी-टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS) ने सोमवार को एक बड़ी साजिश को विफल करते हुए चार संदिग्धों को गिरफ्तार किया, जो ‘मुजाहिदीन आर्मी’ नामक संगठन बनाकर केंद्र सरकार को उखाड़ फेंकने और देश में शरिया कानून लागू करने की योजना बना रहे थे। ये गिरफ्तारियां खुफिया इनपुट्स के आधार पर विभिन्न जिलों से की गईं, और आरोपी पाकिस्तानी उग्रवादी समूहों से प्रेरित होकर हिंसक जिहाद की तैयारी कर रहे थे। ATS के आईजी पी.के. गौतम ने बताया कि यह साजिश कई महीनों से चल रही थी, और इससे पहले ही 50 से अधिक सदस्यों को भर्ती किया जा चुका था।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अकमल रजा (सुल्तानपुर), साफील सलमानी उर्फ अली रजवी (सोनभद्र), मोहम्मद तौसीफ (कानपुर) और कासिम अली (रामपुर) के रूप में हुई है। प्रारंभिक पूछताछ में उन्होंने कबूल किया कि वे ‘काफिरों’ (गैर-मुस्लिमों) के खिलाफ जिहाद छेड़ने की योजना बना रहे थे, जिसमें हिंदू धार्मिक नेताओं की निशाना बनाकर हत्या करना शामिल था। ATS ने लखनऊ थाने में UAPA, आर्म्स एक्ट और अन्य धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया है।

साजिश का खुलासा: पाकिस्तानी प्रभाव और ऑनलाइन प्रचार

खुफिया सूत्रों के अनुसार, आरोपी पाकिस्तानी रेडिकल ग्रुप्स से प्रभावित होकर गुप्त बैठकें कर रहे थे। वे एन्क्रिप्टेड ऑनलाइन ग्रुप्स चला रहे थे, जहां रेडिकल प्रोपेगैंडा फैला रहे थे और लोगों को भर्ती कर रहे थे। इनके पास रेडिकल लिटरेचर, रिक्रूटमेंट मटेरियल और हथियार खरीदने के लिए फंड जुटाने के सबूत मिले हैं। ATS ने पांच मोबाइल फोन, ATM/डेबिट/क्रेडिट कार्ड्स और PhonePe स्कैनर जब्त किए हैं, जो फंडिंग के लिए इस्तेमाल हो रहे थे। IG गौतम ने कहा, “ये लोग सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को कट्टर बनाकर हिंसक गतिविधियों के लिए उकसा रहे थे। सिस्टम को अस्थिर करने का मकसद था।”

ATS की त्वरित कार्रवाई

ATS ने इलेक्ट्रॉनिक और फिजिकल सर्विलांस के जरिए संदिग्धों पर नजर रखी। गिरफ्तारियां विभिन्न जिलों से की गईं, और अब गहन पूछताछ जारी है। इससे जुड़े अन्य सदस्यों की तलाश भी हो रही है। यह कार्रवाई हालिया खुफिया इनपुट्स पर आधारित थी, जो पाकिस्तान से प्रेरित नेटवर्क को बेनकाब करती है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे ‘शून्य टॉलरेंस’ नीति का हिस्सा बताते हुए ATS की तारीफ की।

यह घटना उत्तर प्रदेश में बढ़ती सुरक्षा चुनौतियों को उजागर करती है, जहां ATS ने पिछले साल कई ऐसे प्लॉट्स को नाकाम किया। विशेषज्ञों का मानना है कि ऑनलाइन रेडिकलाइजेशन को रोकने के लिए साइबर सिक्योरिटी मजबूत करनी होगी। क्या यह गिरफ्तारियां बड़े नेटवर्क को तोड़ पाएंगी? ATS की अगली अपडेट का इंतजार।

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