भीषण गर्मी से राहत की उम्मीद: मानसून इस बार समय से पहले दे सकता है दस्तक, 26-27 मई तक केरल पहुंचने के आसार
भीषण गर्मी से राहत की उम्मीद: मानसून इस बार समय से पहले दे सकता है दस्तक, 26-27 मई तक केरल पहुंचने के आसार
भीषण गर्मी और लू (Heatwave) के थपेड़ों से जूझ रहे देश के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून सामान्य तारीख से पहले भारत में प्रवेश कर सकता है। मौसम विभाग का अनुमान है कि मानसून 26 से 27 मई के आसपास केरल के तट पर दस्तक दे सकता है।
मानसून के आगमन का गणित
हालांकि, भारत में मानसून के आधिकारिक आगमन की सामान्य तारीख 1 जून है, लेकिन IMD के मौजूदा अनुमान के मुताबिक, इसमें 4 दिन तक का उतार-चढ़ाव संभव है। इसका अर्थ यह है कि मानसून 22 मई से 30 मई के बीच कभी भी केरल पहुंच सकता है।
केरल से क्यों शुरू होती है मानसून की गिनती?
केरल में मानसून का आगमन पूरे देश के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत माना जाता है। यहीं से देश में मानसून की आधिकारिक शुरुआत मानी जाती है। केरल पहुंचने के बाद बारिश की यह लहर धीरे-धीरे उत्तर और मध्य भारत की ओर बढ़ती है और आमतौर पर जुलाई के मध्य तक पूरे देश को कवर कर लेती है।
भीषण हीटवेव के बीच मानसून का महत्व
वर्तमान में देश के बड़े हिस्से, विशेषकर उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में लोग भीषण गर्मी का सामना कर रहे हैं। राजस्थान के बाड़मेर में तापमान 47°C के पार चला गया है, जबकि महाराष्ट्र, गुजरात और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में हीटवेव का अलर्ट जारी है। ऐसे में मानसून का जल्दी आना तापमान में गिरावट लाने और लोगों को बड़ी राहत दिलाने में सहायक होगा।
मानसून की तारीख तय करने का आधार
मौसम विभाग मानसून की तारीख तय करने के लिए एक बेहद सटीक मॉडल का उपयोग करता है। इसमें कई प्रमुख कारकों का विश्लेषण किया जाता है:
हवा का रुख (Wind patterns): हवा की दिशा और गति का अध्ययन।
समुद्री तापमान: हिंद महासागर और आसपास के समुद्री जल का तापमान।
रेडिएशन: साउथ चाइना सी में रेडिएशन का स्तर।
क्षेत्रीय तापमान: उत्तर-पश्चिम भारत का तापमान।
IMD के पिछले 20 वर्षों के रिकॉर्ड के अनुसार, यह मॉडल काफी भरोसेमंद और सटीक रहा है।
समय से पहले मानसून के फायदे
यदि मानसून तय समय से पहले आता है, तो इसके कई सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलेंगे:
गर्मी से जल्द राहत: तापमान में तेजी से गिरावट आएगी।
खेती की अच्छी शुरुआत: खरीफ फसलों की बुवाई के लिए किसानों को पर्याप्त समय और नमी मिलेगी।
जल संकट में कमी: जलाशयों और भूजल स्तर में सुधार होगा।
बिजली की मांग में कमी: भीषण गर्मी कम होने से कूलिंग (एसी/पंखे) के लिए बिजली की भारी मांग में कमी आएगी।
