NEET पेपर लीक पर शिक्षा मंत्री का बड़ा एक्शन: परीक्षा रद्द, 21 जून को फिर होगी परीक्षा, अगले साल से ऑनलाइन होगा एग्जाम
NEET पेपर लीक पर शिक्षा मंत्री का बड़ा एक्शन: परीक्षा रद्द, 21 जून को फिर होगी परीक्षा, अगले साल से ऑनलाइन होगा एग्जाम
नीट (NEET-UG) पेपर लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बड़ी कार्रवाई की है। शिक्षा मंत्री ने स्वीकार किया है कि पेपर लीक हुआ है और इसके चलते 3 मई को आयोजित परीक्षा को रद्द कर दिया गया है। छात्रों के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए सरकार ने ‘शिक्षा माफियाओं’ के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अपनाते हुए मामले की जांच सीबीआई (CBI) को सौंप दी है।
कब क्या हुआ?
3 मई: नीट परीक्षा का आयोजन हुआ।
7 मई: खबर आई कि ‘गेस पेपर’ वाले प्रश्न ही परीक्षा में आए हैं।
8 मई: मामले की प्रारंभिक जांच शुरू हुई और जांच एजेंसियों को जिम्मा सौंपा गया।
12 मई: सरकार ने परीक्षा रद्द करने का कठोर निर्णय लिया।
21 जून को फिर होगी परीक्षा, NTA ने किए बड़े बदलाव
शिक्षा मंत्री ने बताया कि NEET-UG की अगली परीक्षा 21 जून को आयोजित की जाएगी। छात्रों की सुविधा के लिए NTA ने कई बड़े सुधार किए हैं:
एडमिट कार्ड: 14 जून तक नए एडमिट कार्ड जारी कर दिए जाएंगे।
फीस रिफंड: परीक्षा रद्द होने से छात्रों पर आर्थिक बोझ न पड़े, इसके लिए फीस वापस की जाएगी।
परीक्षा केंद्र: छात्रों को अपनी पसंद का शहर चुनने की आजादी दी जाएगी।
समय में बदलाव: परीक्षा का समय 15 मिनट बढ़ाया गया है।
अन्य सुविधाएं: छात्रों के सफर को कम करने और मौसम की स्थिति को ध्यान में रखते हुए परीक्षा केंद्रों का चयन किया जाएगा।
अगले साल से NEET ‘ऑनलाइन’
शिक्षा मंत्री ने स्वीकार किया कि राधाकृष्णन समिति की सिफारिशों को पूरी तरह लागू करने के बावजूद सिस्टम में सेंध लगी है, जिसकी जिम्मेदारी मंत्रालय ने ली है। उन्होंने बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि अगले साल से NEET की परीक्षा कंप्यूटर आधारित यानी ऑनलाइन मोड में आयोजित की जाएगी ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
शिक्षा माफियाओं को चेतावनी
धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा माफियाओं को कड़े शब्दों में चेतावनी दी है:
”यह शिक्षा माफियाओं के साथ हमारी एक लंबी लड़ाई है। 21 जून को होने वाली परीक्षा से माफिया दूर रहें, वरना उन्हें इसकी भारी कीमत चुकानी होगी। सीबीआई इस मामले की तह तक जाएगी और गड़बड़ी करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।”
उन्होंने स्वीकार किया कि परीक्षा रद्द होने से छात्र दुखी हैं, लेकिन राष्ट्रहित और छात्रों के भविष्य के बड़े लक्ष्य को हासिल करने के लिए यह कठोर निर्णय लेना अनिवार्य था।
