धार भोजशाला विवाद: इंदौर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, परिसर को मंदिर मानते हुए पूजा-पाठ को दी मंजूरी
धार भोजशाला विवाद: इंदौर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, परिसर को मंदिर मानते हुए पूजा-पाठ को दी मंजूरी
धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद परिसर को लेकर चल रहे लंबे विवाद पर इंदौर हाई कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने अपने निर्णय में भोजशाला परिसर को एक मंदिर और प्राचीन संस्कृत शिक्षा का केंद्र माना है।
हाई कोर्ट के फैसले की मुख्य बातें:
परिसर मंदिर है: अदालत ने स्पष्ट किया है कि भोजशाला परिसर एक मंदिर है, जिसे राजा भोज द्वारा निर्मित किया गया था।
पूजा का अधिकार: हाई कोर्ट ने इस परिसर में हिंदू पक्ष को पूजा-पाठ करने का अधिकार दिया है। वकील विष्णु शंकर जैन ने बताया कि अब इस परिसर में केवल पूजा होगी और नमाज की अनुमति नहीं होगी।
ASI का नियंत्रण: पूरे परिसर और इसके संरक्षण की जिम्मेदारी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के पास रहेगी।
मूर्ति स्थापना: कोर्ट ने केंद्र सरकार को यह निर्देश दिया है कि वे परिसर में देवी सरस्वती की मूर्ति स्थापित करने की दिशा में कदम उठाएं।
मुस्लिम पक्ष को विकल्प: अदालत ने मुस्लिम पक्ष के अधिकारों को लेकर स्पष्ट किया कि इस परिसर में उनका दावा नहीं है। हालांकि, वे कमाल मौला मस्जिद के लिए सरकार से अलग जगह की मांग कर सकते हैं। कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया कि मुस्लिम समाज के लिए वैकल्पिक जमीन की व्यवस्था पर विचार करें।
कानूनी लड़ाई और अगली प्रक्रिया
हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने अदालत के फैसले पर संतोष जताते हुए कहा कि यह सत्य की जीत है और राजा भोज द्वारा बनवाई गई इस इमारत का गौरव बहाल हुआ है।
वहीं, दूसरी ओर मुस्लिम पक्ष ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का निर्णय लिया है। धार के शहर काजी ने कहा कि वे हाई कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं, लेकिन वे इस फैसले का अध्ययन करने के बाद अपनी अपील सुप्रीम कोर्ट में दाखिल करेंगे। मुस्लिम पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने पैरवी की थी और अब वे आगे की कानूनी राह के लिए तैयार हैं।
इस फैसले के बाद से धार में सुरक्षा व्यवस्था और कानूनी स्थिति पर सभी की नजरें बनी हुई हैं।
