राजनीति

कर्नाटक में सियासी हलचल: डीके शिवकुमार के जन्मदिन पर लगे ‘अगले मुख्यमंत्री’ के पोस्टर, समर्थकों की सक्रियता से चर्चाएं तेज

कर्नाटक में सियासी हलचल: डीके शिवकुमार के जन्मदिन पर लगे ‘अगले मुख्यमंत्री’ के पोस्टर, समर्थकों की सक्रियता से चर्चाएं तेज

​कर्नाटक की राजनीति में एक बार फिर मुख्यमंत्री पद को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। शुक्रवार को उपमुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार के 64वें जन्मदिन के अवसर पर उनके समर्थकों ने राज्य के कई हिस्सों में उन्हें ‘भावी मुख्यमंत्री’ घोषित करते हुए बैनर और पोस्टर लगाए हैं।

​बेलगावी में चर्चा का केंद्र बने पोस्टर

​सबसे ज्यादा चर्चा बेलगावी शहर में चन्नम्मा सर्कल पर लगे होर्डिंग की है। ये पोस्टर कांग्रेस नेता और राज्य की महिला व बाल कल्याण मंत्री लक्ष्मी हेब्बालकर के बेटे मृणाल हेब्बालकर द्वारा लगवाए गए बताए जा रहे हैं। गौरतलब है कि लक्ष्मी हेब्बालकर डीके शिवकुमार की करीबी मानी जाती हैं और अक्सर अपनी राजनीतिक सफलता का श्रेय उन्हें देती हैं। हेब्बालकर के भाई चन्नराज हट्टीहोली भी कांग्रेस के एमएलसी हैं, जिसके चलते इन पोस्टरों के राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं।

​डीके शिवकुमार की सफाई

​हालांकि, डीके शिवकुमार ने इस पूरे मामले पर सावधानी बरती है। उन्होंने कहा कि उन्होंने पहले ही पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों से बैनर या पोस्टर न लगाने की अपील की थी। उन्होंने कहा:

​”मेरे समर्थक और दोस्त मुझसे मिलने का इंतजार कर रहे थे। उनका प्यार, भरोसा और आशीर्वाद ऐसा है कि मैं उन्हें रोक नहीं पाया। मैंने बैनर न लगाने के निर्देश दिए थे, और अधिकारियों ने पहले ही करीब 50 प्रतिशत बैनर हटा भी दिए हैं।”

​जन्मदिन के अन्य कार्यक्रम

​डीके शिवकुमार का जन्मदिन बेंगलुरु में सादगी और धार्मिक अनुष्ठानों के साथ मनाया गया। शुक्रवार सुबह सदाशिवनगर स्थित उनके आवास पर कई वैदिक विद्वानों और पुजारियों ने उनसे मुलाकात की और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच उन्हें शुभकामनाएं दीं। इसके अलावा, राज्य सरकार के कई मंत्रियों ने भी उनके घर जाकर उन्हें बधाई दी।

​राजनीतिक गलियारों में कयासबाजी

​कर्नाटक कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद को लेकर समय-समय पर दावेदारी और समर्थकों के ‘शक्ति प्रदर्शन’ की खबरें सामने आती रही हैं। भले ही डीके शिवकुमार ने इन पोस्टरों पर दूरी बनाने की कोशिश की हो, लेकिन जिस तरह से उनके समर्थकों ने उन्हें ‘भावी मुख्यमंत्री’ के रूप में पेश किया है, उसने राज्य के राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर नेतृत्व परिवर्तन या नेतृत्व की आकांक्षाओं से जुड़ी चर्चाओं को हवा दे दी है। फिलहाल, इस पूरे प्रकरण पर पार्टी आलाकमान की चुप्पी भी काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

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