राजनीति

बिहार चुनावी हलचल में PK का खुलासा: ‘सरस्वती की कृपा से लक्ष्मी आती है’, जन सुराज फंडिंग पर लगे आरोपों का दिया जवाब

बिहार चुनावी हलचल में PK का खुलासा: ‘सरस्वती की कृपा से लक्ष्मी आती है’, जन सुराज फंडिंग पर लगे आरोपों का दिया जवाब

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की सरगर्मियां चरम पर पहुंच चुकी हैं, और इसी बीच जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर (पीके) ने फंडिंग को लेकर लग रहे आरोपों का जोरदार जवाब दिया है। पटना में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में किशोर ने पार्टी के फंडिंग सोर्स का खुलासा करते हुए कहा कि उनकी कमाई ‘सरस्वती’ की कृपा से है, जो ‘लक्ष्मी’ को आकर्षित करती है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “मुझे नेता मत कहिए, बाकी नेताओं की तरह मत समझिए। मैं नेता नहीं हूं और बिहार कमाने नहीं आया हूं। बल्कि खून-पसीना बहाने आया हूं, सेवा करने आया हूं।” यह बयान विपक्षी दलों द्वारा लगाए जा रहे ‘शेल कंपनियों’ और ‘भ्रष्ट फंडिंग’ के आरोपों के जवाब में आया है।

प्रशांत किशोर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में पार्टी के खर्च का भी विस्तृत हिसाब-किताब पेश किया। उन्होंने बताया कि जन सुराज का अधिकांश फंडिंग क्राउडफंडिंग से आता है, जहां छोटे-छोटे दानदाताओं की संख्या हजारों में है। “हमारी कमाई मेरी बुद्धि और मेहनत से है, न कि किसी गुप्त स्रोत से। पिछले 10 वर्षों में मैंने 11 चुनावों में काम किया, और अब बिहार के लिए समर्पित हूं।” किशोर ने आरोप लगाया कि JD(U) और BJP जैसे दल चुनाव से पहले जन सुराज को बदनाम करने की साजिश रच रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि पार्टी का कुल फंड 2025 में अब तक 50 करोड़ रुपये से अधिक है, जिसमें 70% क्राउडफंडिंग और 30% व्यक्तिगत योगदान से आया। खर्च का ब्रेकअप देते हुए कहा कि 40% पदयात्रा और प्रचार पर, 30% कार्यकर्ता प्रशिक्षण पर, और बाकी प्रशासनिक खर्चों पर गया।

यह पहला मौका नहीं है जब जन सुराज की फंडिंग पर सवाल उठे हैं। फरवरी 2025 में JD(U) ने चुनाव आयोग और आर्थिक अपराध इकाई (EOU) को पत्र लिखकर ‘जॉय ऑफ गिविंग ग्लोबल फाउंडेशन’ के जरिए फंडिंग की जांच की मांग की थी। सीनियर JD(U) नेता नीरज कुमार ने आरोप लगाया था कि दर्जनभर शेल कंपनियों से 1 करोड़ रुपये आए। सितंबर 2025 में BJP ने इसे ‘फ्रॉड पर आधारित राजनीतिक स्टार्टअप’ कहा, दावा किया कि 370 करोड़ रुपये पश्चिम बंगाल, तेलंगाना, तमिलनाडु और कर्नाटक से आए। लेकिन किशोर ने इन आरोपों को ‘राजनीतिक हताशा’ करार दिया। उन्होंने कहा, “मैंने कभी IAS या नेता नहीं बनने की कोशिश की। मेरी संपत्ति पारदर्शी है—कई मुख्यमंत्रियों ने मेरी मदद की, लेकिन बिना शर्त। अब जनता ही हमारा फंडर बनेगी।”

जन सुराज पार्टी, जो 2 अक्टूबर 2024 को गांधी जयंती पर लॉन्च हुई, 2025 चुनाव में सभी 243 सीटों पर लड़ने की तैयारी में है। पार्टी का एजेंडा बिहार को टॉप-10 राज्यों में बदलना है, जिसमें भूमि सुधार, नकदी फसलें और शिक्षा पर जोर। किशोर ने कहा कि पार्टी का पहला राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय सिंह (पूर्व सांसद) चुना गया, और संगठन में सामाजिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाएगा—दलित, EBC, मुस्लिम, OBC और सामान्य वर्ग से रोटेशन। प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूर्व IFS अधिकारी मनोज भारती ने समर्थन जताया, कहा कि आरोपों का जवाब दस्तावेजों से दिया गया है।

विपक्ष की ओर से प्रतिक्रिया तीखी आई। JD(U) के नीरज कुमार ने कहा, “पीके की फंडिंग जांच होनी चाहिए।” BJP के इकबाल आलम ने इसे ‘लोकतंत्र का अपमान’ बताया। लेकिन किशोर ने पलटवार किया, “जो खुद भ्रष्टाचार में डूबे हैं, वे हमें सिखाएं?” विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद जन सुराज की लोकप्रियता को बढ़ा सकता है, खासकर युवाओं और मध्यम वर्ग में। क्या पीके का यह खुलासा आरोपों को थाम पाएगा? बिहार की सियासत में नया मोड़ आ गया है।

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