ट्रंप की टैरिफ नीति फंसी, भारत-चीन ने रोका अमेरिकी मक्का-सोयाबीन का बाजार
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति अब उल्टी पड़ रही है। चीन और भारत ने मिलकर ट्रंप के टैरिफ युद्ध में पलटी मार दी है, जिससे अमेरिकी किसानों के मक्का (कॉर्न) और सोयाबीन का निर्यात संकट में फंस गया है। चीन ने मई से अमेरिकी सोयाबीन की खरीद पूरी तरह बंद कर दी है, जबकि भारत ने जीएम फूड्स पर आयात प्रतिबंध और ऊंचे टैरिफ (45% से 60% तक) बनाए रखे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर भारत-चीन जैसे देश दबाव बनाए रखें, तो ट्रंप को झुकना पड़ेगा। अमेरिकी किसान अब बंपर फसल के बावजूद बाजार ढूंढने को परेशान हैं, और स्टोरेज की समस्या भी बढ़ रही है।
ट्रंप ने जनवरी 2025 में सत्ता संभालते ही चीन, भारत और यूरोपीय संघ पर व्यापक टैरिफ थोप दिए, जो अब 125% तक पहुंच चुके हैं। जवाब में चीन ने अमेरिकी कृषि उत्पादों पर 34% तक का रिटेलिएटरी टैरिफ लगा दिया, जिससे कृषि निर्यात 53% गिर गया। सोयाबीन पर तो खरीद ही शून्य हो गई—2024 में चीन ने $12.64 बिलियन का सोयाबीन अमेरिका से लिया था, लेकिन 2025 में एक दाना भी नहीं। चीन अब ब्राजील और अर्जेंटीना की ओर रुख कर रहा है, जहां से सस्ते दामों पर सोयाबीन मिल रहा है। मक्का के मामले में भी हालात बुरे हैं; अमेरिका का 2% मक्का निर्यात चीन जाता था, लेकिन अब वैकल्पिक बाजार ढूंढना मुश्किल हो गया।
भारत की भूमिका भी अहम है। ट्रंप ने अगस्त में भारत पर 50% टैरिफ लगाया, जिससे संबंध खराब हो गए। भारत ने जवाबी कार्रवाई में अमेरिकी मक्का और सोयाबीन पर टैरिफ बढ़ा दिए। ज्यादातर अमेरिकी सोयाबीन जीएम वैरायटी का है, जिसे भारत ने आयात पर पूरी तरह प्रतिबंधित कर रखा है। भारतीय वकील और लेखक नवरूप सिंह ने सोशल मीडिया पर कहा, “अमेरिकी मक्का-सोयाबीन के लिए कोई खरीदार नहीं! भारत, चीन, रूस और ब्राजील को ट्रंप को थोड़ा और दबाना चाहिए, वह झुक जाएगा।” सिंह का मानना है कि अमेरिकी किसानों का दर्द ट्रंप की नीतियों को तोड़ देगा।
अमेरिकी किसान अब हताश हैं। केंटकी के किसान कैलेब रैगलैंड, जो अमेरिकी सोयाबीन एसोसिएशन के अध्यक्ष हैं, ने कहा, “हमारी फसल तैयार है, लेकिन बाजार कहां? चीन ने ब्राजील को प्राथमिकता दी, और भारत जैसे देश जीएम पर सख्त हैं।” साउथ डकोटा के सीनेटर जॉन थुन ने एनबीसी पर स्वीकार किया कि किसान संकट में हैं। एनपीआर से बातचीत में सोयाबीन किसान जोश गैकल ने बताया, “2018-19 की तरह फिर से नुकसान हो रहा है, लेकिन अब मार्जिन कम है। ट्रंप कहते हैं टैरिफ अस्थायी हैं, लेकिन किसान टिक नहीं पाएंगे।” यूएसडीए के आंकड़ों के मुताबिक, 2025 के पहले सात महीनों में चीन को कृषि निर्यात 53% गिरा, और सोयाबीन का तो नामोनिशान नहीं।
ट्रंप प्रशासन ने किसानों को राहत के नाम पर टैरिफ से कमाई का कुछ हिस्सा देने का वादा किया है—लगभग $26 बिलियन का नुकसान 2018-19 में हुआ था, और अब और ज्यादा हो सकता है। लेकिन किसान संगठन जैसे अमेरिकी सोयाबीन एसोसिएशन नया ट्रेड डील की मांग कर रहे हैं। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट किया कि 1 अक्टूबर से नए टैरिफ लागू होंगे, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि चीन-भारत का गठजोड़ अमेरिकी किसानों को मजबूर कर देगा। ब्राजील ने इस बीच सोयाबीन निर्यात दोगुना कर लिया, जबकि अमेरिका स्टोरेज स्पेस की तलाश में है।
यह ट्रेड वॉर न केवल अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रही है, बल्कि ट्रंप की किसान-समर्थक छवि को भी धक्का पहुंचा रही है। क्या भारत-चीन का दबाव ट्रंप को नया डील करने पर मजबूर करेगा? बाजार के संकेत साफ हैं—अमेरिकी सोयाबीन की कीमतें गिर रही हैं, जबकि वैश्विक सप्लाई चेन बदल रही है।
