काशी में गरजा प्रशासन का बुलडोजर, इस पद्मश्री विजेता खिलाड़ी का घर जमींदार
उत्तर प्रदेश के वाराणसी में सड़क चौड़ीकरण अभियान के तहत रविवार को प्रशासन ने पुलिस लाइन चौराहे से कचहरी रोड तक अतिक्रमण हटाने के लिए बुलडोजर चलाया। इस कार्रवाई में 13 मकानों को ध्वस्त कर दिया गया, जिसमें पद्मश्री से सम्मानित पूर्व ओलंपियन हॉकी खिलाड़ी मोहम्मद शाहिद का पैतृक घर भी शामिल था। शाहिद के परिजनों ने विरोध किया और एक दिन की मोहलत मांगी, लेकिन प्रशासन ने कार्रवाई जारी रखी। यह घटना सोशल मीडिया पर वायरल हो गई है, जहां इसे ‘देशभक्त खिलाड़ी के साथ अन्याय’ करार दिया जा रहा है।
मोहम्मद शाहिद (1960-2016) भारतीय हॉकी के ‘जादूगर’ के नाम से मशहूर थे। उन्होंने 1980 मॉस्को ओलंपिक में भारत को स्वर्ण पदक दिलाने में अहम भूमिका निभाई, जहां उनकी ड्रिबलिंग स्किल्स ने दुनिया को प्रभावित किया। 1980-81 में अर्जुन अवॉर्ड और 1986 में पद्मश्री से सम्मानित शाहिद ने 1970-80 के दशक में कई अंतरराष्ट्रीय जीत दिलाईं। उनका जन्म और पालन-पोषण वाराणसी के इसी पैतृक मकान में हुआ, जो 1920 में बना था। शाहिद के बेटे कैफ ने अगस्त में ही सरकार से अपील की थी कि घर को तोड़ने के बजाय स्मारक बनाया जाए, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
प्रशासन के अनुसार, यह कार्रवाई कोर्ट रोड से संधा (संडाहा) तक 9.3 किलोमीटर लंबी फोर-लेन सड़क चौड़ीकरण परियोजना का हिस्सा है, जो शहर की ट्रैफिक समस्या को दूर करेगी। अधिकारियों ने बताया कि प्रभावित परिवारों को पहले ही मुआवजा दे दिया गया था—शाहिद के परिवार के 7 शेयरधारकों ने इसे स्वीकार किया, लेकिन 2 अभी भी घर में रह रहे थे। जिला मजिस्ट्रेट ने कहा, “हमने कई बार नोटिस जारी किए और अंतिम अल्टीमेटम दिया। जब परिवारों ने खुद हिस्सा हटाने की कार्रवाई नहीं की, तो हमें बुलडोजर लगाना पड़ा।” कार्रवाई के दौरान तीन थानों की पुलिस और आरएएफ तैनात रही।
परिजनों का दावा है कि कोर्ट में स्टे ऑर्डर था और शादी जैसे पारिवारिक आयोजन के कारण एक दिन की मोहलत मांगी गई थी। शाहिद के भाई ने भावुक होकर कहा, “यह हमारा पैतृक घर है, जहां मोहम्मद भाई की यादें बसी हैं। हमने समय मांगा, लेकिन अधिकारियों ने एक न सुनी। मुआवजा मिला, लेकिन अब कहां जाएं?” रिश्तेदार नाजनीन ने बताया, “यह हमारा घर था, यादें यहां हैं। हम इसे मिस करेंगे।” विपक्षी दलों ने इसे राजनीतिक रंग देते हुए कहा कि मोदी सरकार ‘देश की महान हस्तियों को निशाना बना रही है’, जबकि भाजपा ने इसे विकास का हिस्सा बताया।
यह घटना उत्तर प्रदेश में ‘बुलडोजर जस्टिस’ की बहस को फिर हवा दे रही है, जहां सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में ऐसी कार्रवाइयों पर दिशानिर्देश जारी किए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि विकास परियोजनाओं में ऐतिहासिक स्थलों को बचाने की जरूरत है। क्या शाहिद के घर को स्मारक बनाने की मांग पर विचार होगा? प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार है।
