उत्तराखंड

केदारनाथ यात्रा 2025 का दूसरा चरण शुरू, श्रद्धालुओं की घटती संख्या से कारोबारियों का संकट: सरकार से मांगें बढ़ीं

केदारनाथ यात्रा 2025 का दूसरा चरण शुरू, श्रद्धालुओं की घटती संख्या से कारोबारियों का संकट: सरकार से मांगें बढ़ीं

उत्तराखंड के चारधाम यात्रा सत्र 2025 का दूसरा चरण (जुलाई-अक्टूबर) शुरू हो चुका है, लेकिन श्रद्धालुओं की संख्या में भारी गिरावट ने स्थानीय कारोबारियों को संकट में डाल दिया है। मई-जून के पहले चरण में 10 लाख से अधिक यात्री पहुंचे थे, लेकिन दूसरे चरण में यह संख्या घटकर महज 3-4 लाख रह गई है। खराब मौसम, ऊंचाई वाली जगहों पर ऑक्सीजन की कमी, महंगाई और वैकल्पिक पर्यटन स्थलों की ओर रुझान के कारण यह कमी आई है। होटल, गेस्टहाउस, पोंई वालों और घोड़े संचालकों ने सरकार से तत्काल राहत पैकेज, सब्सिडी और प्रचार अभियान की मांग की है। यात्रा सत्र नवंबर तक चलेगा, लेकिन कारोबारी चेतावनी दे रहे हैं कि यदि सुधार न हुआ तो सैकड़ों परिवार बेरोजगार हो जाएंगे।

संख्या में गिरावट का आंकड़ा: पहले चरण से 60% कम यात्री  

– पहला चरण (मई-जून): केदारनाथ धाम में 10.5 लाख श्रद्धालु पहुंचे, जिसमें औसतन प्रतिदिन 15-20 हजार यात्री थे। पंजीकरण 20 लाख से अधिक।

– दूसरा चरण (जुलाई-अक्टूबर): अब तक केवल 2.8 लाख यात्री, प्रतिदिन 5-7 हजार। कुल पंजीकरण 5 लाख से नीचे।

कारोबारी एसोसिएशन के अध्यक्ष रमेश चंद्र ने कहा, “पिछले साल की तुलना में 40% कमी है। मौसम की मार और महंगे हेलीकॉप्टर दर्शन ने आम श्रद्धालु को दूर कर दिया।” सोनप्रयाग, गौरीकुंड और रामबाड़ा जैसे बेस कैंपों में होटल खाली पड़े हैं, जबकि घोड़े-खच्चर मालिक बिना काम के चरते नजर आ रहे हैं।

कारोबारियों का संकट: सैकड़ों परिवार प्रभावित  

केदारनाथ यात्रा मार्ग पर निर्भर 5,000 से अधिक परिवारों की आजीविका खतरे में है।  

– होटल और गेस्टहाउस: 70% कम बुकिंग, कई मालिक कर्ज में डूबे। एक होटल संचालक ने बताया, “एक कमरा 2,000 रुपये में किराए पर देने के बाद भी खर्च नहीं निकल रहा।”

– पोंई और स्थानीय बाजार: पूजा सामग्री, प्रसाद और स्मृति चिन्ह बिक्री 50% घटी।

– परिवहन: हेलीकॉप्टर सेवाओं पर निर्भरता बढ़ी, लेकिन पैदल/घोड़े यात्रा वाले कारोबारी सबसे ज्यादा प्रभावित।

एक सर्वे के अनुसार, दूसरे चरण में कुल राजस्व 200 करोड़ रुपये कम होने का अनुमान है। कारोबारी नेता ने कहा, “यह संकट यात्रा सत्र के बाद बेरोजगारी को जन्म देगा।”

सरकार से मांगें: राहत पैकेज और प्रचार अभियान  

स्थानीय व्यापार मंडल ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को ज्ञापन सौंपा है, जिसमें ये प्रमुख मांगें शामिल हैं:  

1. राहत पैकेज: प्रभावित कारोबारियों को 50% सब्सिडी पर लोन और बीमा कवर।

2. प्रचार अभियान: डिजिटल मीडिया और अंतरराष्ट्रीय टूर ऑपरेटर्स के साथ टाई-अप से यात्रा को प्रमोट करें।

3. सुविधाएं बेहतर: हेलीपैड बढ़ाएं, लेकिन पैदल मार्ग पर मेडिकल कैंप और ऑक्सीजन सेंटर लगाएं।

4. नियम सरलीकरण: पंजीकरण प्रक्रिया को आसान बनाएं, ताकि ज्यादा यात्री आ सकें।

उत्तराखंड पर्यटन विभाग ने कहा, “हम स्थिति पर नजर रख रहे हैं। जल्द ही विशेष पैकेज घोषित हो सकता है।” पिछले साल भी इसी तरह की गिरावट पर 100 करोड़ का राहत पैकेज दिया गया था।

विशेषज्ञों की राय: सस्टेनेबल टूरिज्म की जरूरत  

पर्यटन विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन और महंगाई ने यात्रा को महंगा बना दिया है। “श्रद्धालुओं को सस्ते पैकेज दें, तभी संख्या बढ़ेगी,” एक विशेषज्ञ ने सुझाव दिया।

यह संकट न केवल आर्थिक है, बल्कि सांस्कृतिक धरोहर को भी प्रभावित कर रहा है। क्या सरकार तुरंत कदम उठाएगी? कमेंट्स में अपनी राय बताएं।

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