बिहार: मंत्री अशोक चौधरी ने प्रशांत किशोर को भेजा 100 करोड़ का मानहानि नोटिस, 7 दिन में माफी न मांगी तो कानूनी कार्रवाई
बिहार: मंत्री अशोक चौधरी ने प्रशांत किशोर को भेजा 100 करोड़ का मानहानि नोटिस, 7 दिन में माफी न मांगी तो कानूनी कार्रवाई
बिहार की सियासत में भ्रष्टाचार के आरोपों का दौर तेज हो गया है। ग्रामीण विकास मंत्री और जेडीयू के राष्ट्रीय महासचिव अशोक चौधरी ने जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर (पीके) को 100 करोड़ रुपये का मानहानि नोटिस भेज दिया है। नोटिस में पीके को 7 दिनों के अंदर बिना शर्त सार्वजनिक माफी मांगने का अल्टीमेटम दिया गया है, वरना सिविल सूट दायर कर 100 करोड़ का हर्जाना वसूला जाएगा। यह नोटिस पीके के हालिया आरोपों के जवाब में भेजा गया, जिसमें उन्होंने चौधरी पर 200 करोड़ की बेनामी संपत्ति बनाने का इल्जाम लगाया था।
चौधरी के वकील कुमार अंजनेeya शानू ने नोटिस जारी करते हुए कहा कि पीके ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में चौधरी पर ‘बिहार के सबसे भ्रष्ट नेता’ होने का आरोप लगाया, जिसमें उनकी बेटी शंबवी चौधरी (समस्तीपुर से सांसद) के नाम पर लोकसभा टिकट खरीदने और 200 करोड़ की संपत्ति अर्जित करने का दावा किया। चौधरी ने इसे ‘झूठा और मानहानिकारक’ बताते हुए कहा, “पीके में न तो राजनीतिक शुचिता है और न ही जनसेवा की दृष्टि। वे राजनीतिक व्यापारी हैं, जो हर पार्टी को पैसे के लिए सेवा देते हैं। मैं दूसरी पीढ़ी का राजनेता हूं, और मेरी दलित बेटी की उपलब्धि उन्हें हजम नहीं हो रही।” उन्होंने पीके को सबूत पेश करने की चुनौती दी, अन्यथा माफी मांगने को कहा।
यह विवाद जून 2025 से चल रहा है, जब पीके ने पहली बार चौधरी पर चिराग पासवान से लोकसभा टिकट के लिए रिश्वत देने का आरोप लगाया था। उसके बाद सितंबर में पीके ने चार एनडीए नेताओं—उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल और अशोक चौधरी—पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। पीके ने दावा किया कि चौधरी ने 2019-2020 के बीच मानव वैभव विकास ट्रस्ट के जरिए 38.44 करोड़ की जमीन खरीदी, और पत्नी के अकाउंट में 2.12 करोड़ जमा हुए, जो घोषित नहीं किए गए।
पीके ने प्रतिक्रिया में कहा, “मैंने जो आरोप लगाए, वे तथ्यों पर आधारित हैं। अगर चौधरी निर्दोष हैं, तो सबूत दें। जन सुराज भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ रही है, और बिहार चुनाव में एनडीए को उजागर करेंगे।” जेडीयू ने पार्टी को विवाद से अलग रखते हुए कहा कि नीतीश कुमार ‘भ्रष्टाचार मुक्त’ छवि के हैं, लेकिन अशोक चौधरी का बचाव किया। बीजेपी के वरिष्ठ नेता आरके सिंह ने भी पार्टी के अन्य आरोपियों को ‘सार्वजनिक सफाई’ देने की सलाह दी, जिससे एनडीए में दरार की अटकलें तेज हो गईं।
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से ठीक पहले यह टकराव सियासी तापमान बढ़ा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि पीके का ‘भ्रष्टाचार के खिलाफ क्रूसेड’ एनडीए की एकजुटता को चुनौती दे रहा है, जबकि जेडीयू इसे ‘राजनीतिक साजिश’ बता रही है। नोटिस का जवाब न आने पर पटना कोर्ट में केस दायर हो सकता है।
