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​Tata Motors की बड़ी तैयारी: साल के अंत तक आएगी कंपनी की पहली ‘Flex Fuel’ कार, जानें क्या होगी खासियत

भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर में अपनी मजबूत पकड़ बना चुकी टाटा मोटर्स (Tata Motors) अब देश के ग्रीन मोबिलिटी मिशन को एक कदम और आगे ले जाने की तैयारी में है। इलेक्ट्रिक और सीएनजी (CNG) सेगमेंट में झंडे गाड़ने के बाद, कंपनी अब भारत की पहली फ्लेक्स-फ्यूल (Flex-Fuel) पैसेंजर कार बाजार में उतारने जा रही है। टाटा मोटर्स के पैसेंजर व्हीकल बिजनेस के एमडी और सीईओ शैलेश चंद्रा ने पुष्टि की है कि कंपनी तकनीकी रूप से पूरी तरह तैयार है और साल 2026 के अंत तक या 2027 की शुरुआत में उनकी पहली फ्लेक्स-फ्यूल कार सड़कों पर दौड़ती नजर आ सकती है।

​क्या होती है ‘Flex Fuel’ तकनीक?

​फ्लेक्स-फ्यूल व्हीकल (FFV) एक ऐसी एडवांस तकनीक पर काम करते हैं, जिसमें गाड़ी को केवल पेट्रोल ही नहीं, बल्कि एथेनॉल (Ethanol) और पेट्रोल के मिश्रण या फिर 100 फीसदी शुद्ध एथेनॉल से भी चलाया जा सकता है। चूंकि एथेनॉल को गन्ने, मक्का और अन्य कृषि अवशेषों से तैयार किया जाता है, इसलिए इसे एक बेहद साफ और पर्यावरण के अनुकूल ईंधन (Biofuel) माना जाता है। इसके इस्तेमाल से गाड़ियों से होने वाला प्रदूषण बेहद कम हो जाता है।

​टाटा पंच (Tata Punch) हो सकती है पहली कार

​टाटा मोटर्स ने अभी तक आधिकारिक तौर पर मॉडल के नाम का ऐलान नहीं किया है, लेकिन रिपोर्ट्स और ऑटो एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस तकनीक के साथ आने वाली पहली गाड़ी टाटा पंच (Tata Punch) हो सकती है। कंपनी ने ‘भारत मोबिलिटी ग्लोबल एक्सपो’ में पंच फ्लेक्स-फ्यूल का प्रोटोटाइप मॉडल भी पेश किया था।

​इंजन में बदलाव: फ्लेक्स-फ्यूल पंच में 1.2-लीटर, 3-सिलेंडर पेट्रोल इंजन का ही इस्तेमाल किया जाएगा। हालांकि, एथेनॉल के स्वभाव (संक्षारक या कोरोसिव प्रकृति) को देखते हुए इसके इंजन कंट्रोल यूनिट (ECU), फ्यूल इंजेक्शन सिस्टम और फ्यूल लाइन्स में विशेष तकनीकी बदलाव किए गए हैं।

​E85 और E100 क्षमता: यह कार E20 (20% एथेनॉल) से लेकर E85 (85% एथेनॉल) और यहां तक कि E100 (100% शुद्ध एथेनॉल) तक के ईंधन पर आसानी से चल सकेगी।

​आम ग्राहकों को क्या होगा फायदा?

​सस्ता सफर: पेट्रोल के मुकाबले एथेनॉल की कीमतें काफी कम होती हैं। ऐसे में अगर सरकार एथेनॉल फ्यूल स्टेशन्स का नेटवर्क बढ़ाती है, तो ग्राहकों का रनिंग कॉस्ट (प्रति किलोमीटर का खर्च) काफी कम हो जाएगा।

​मेंटेनेंस की कोई टेंशन नहीं: रिफ्यूलिंग की प्रक्रिया सामान्य पेट्रोल कारों जैसी ही होगी। इसमें इलेक्ट्रिक कारों की तरह चार्जिंग के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा।

​पर्यावरण को लाभ: एथेनॉल के जलने से कार्बन का उत्सर्जन बेहद कम होता है, जिससे शहरों की हवा साफ रखने में मदद मिलेगी।

​सरकार की नीतियों से तालमेल

​टाटा मोटर्स का यह कदम भारत सरकार की उस नीति के तहत उठाया जा रहा है, जिसमें देश की कच्चे तेल (Crude Oil) के आयात पर निर्भरता को कम करना है। हाल ही में सड़क परिवहन मंत्रालय ने फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को आधिकारिक श्रेणी में परिभाषित करने के लिए नियमों में संशोधन का मसौदा भी तैयार किया है। टाटा मोटर्स के अलावा मारुति सुजुकी, हुंडई और टोयोटा जैसी कंपनियां भी भारत के लिए अपनी फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक पर तेजी से काम कर रही हैं।

​ऑटो ब्यूरो, दैनिक समाचार।

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