Saturday, May 16, 2026
राष्ट्रीय

​रॉबर्ट वाड्रा को राउज एवेन्यू कोर्ट से बड़ी राहत, गुरुग्राम जमीन घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में मिली जमानत

गुरुग्राम के शिकोहपुर भूमि घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी के पति और कारोबारी रॉबर्ट वाड्रा को आज दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट से एक बड़ी राहत मिली है। विशेष अदालत ने उन्हें 50,000 रुपये के निजी मुचलके पर जमानत दे दी है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा इस मामले में दायर की गई चार्जशीट (शिकायत) पर संज्ञान लेने के बाद कोर्ट ने रॉबर्ट वाड्रा और अन्य आरोपियों को समन जारी कर अदालत में पेश होने का आदेश दिया था।

​पहले कभी गिरफ्तार नहीं किया गया: वाड्रा के वकील की दलील

​शनिवार को राउज एवेन्यू कोर्ट में सुनवाई के दौरान रॉबर्ट वाड्रा के वकील ने अदालत के सामने अपनी दलीलें पेश कीं। उन्होंने तर्क दिया कि जांच के दौरान उनके मुवक्किल ने जांच एजेंसी का पूरा सहयोग किया है और इस पूरे मामले में उन्हें पहले कभी भी गिरफ्तार नहीं किया गया था। कानूनी प्रक्रियाओं और पूर्व के फैसलों का हवाला देते हुए उन्होंने नियमित जमानत की मांग की। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद वाड्रा की जमानत अर्जी मंजूर कर ली। कोर्ट ने अब इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 10 जुलाई 2026 की तारीख तय की है।

​दिल्ली हाई कोर्ट से एक दिन पहले नहीं मिली थी तत्काल राहत

​राउज एवेन्यू कोर्ट से मिली इस राहत से ठीक एक दिन पहले, शुक्रवार को रॉबर्ट वाड्रा को दिल्ली हाई कोर्ट से कोई अंतरिम राहत नहीं मिल सकी थी। जस्टिस मनोज जैन की एकल-न्यायाधीश पीठ रॉबर्ट वाड्रा की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उन्होंने राउज एवेन्यू कोर्ट के समन जारी करने वाले आदेश को चुनौती दी थी। वाड्रा चाहते थे कि हाई कोर्ट इस समन और ईडी की शिकायत पर रोक लगा दे, लेकिन कोर्ट ने इस पर तत्काल राहत देने से इनकार कर दिया था।

​अदालती बहस: ‘कानून के गलत इस्तेमाल’ बनाम ‘झूठे बयानों’ की जंग

​हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के बीच बेहद तीखी बहस देखने को मिली:

​रॉबर्ट वाड्रा का पक्ष: वाड्रा की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि जिस 2008 के जमीन सौदे को लेकर यह मामला बनाया गया है, उस समय भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और आईपीसी के कुछ अपराध पीएमएलए (PMLA) की अनुसूची का हिस्सा नहीं थे। उन्हें बाद में जोड़ा गया है। सिंघवी ने आरोप लगाया कि ट्रायल कोर्ट के सामने अधिकार क्षेत्र और कानूनों को पिछली तारीख से लागू करने (Retrospective Application) का मुद्दा उठाया गया था, लेकिन उस पर विचार नहीं किया गया।

​ईडी (ED) का पलटवार: याचिका का कड़ा विरोध करते हुए ईडी के वकील जोहेब हुसैन ने वाड्रा की दलीलों को पूरी तरह खारिज कर दिया। हुसैन ने कोर्ट से कहा, “वाड्रा ने अपनी याचिका में अदालत के सामने झूठे और गलत बयान दिए हैं। मैंने सभी मूल कानूनों को खंगाला है, आईपीसी की धारा 467 पीएमएलए की अनुसूची में अपने मूल रूप में ही शुरू से मौजूद थी। इस याचिका को भारी जुर्माने के साथ खारिज किया जाना चाहिए।”

​फिलहाल, हाई कोर्ट से राहत न मिलने के बावजूद आज निचली अदालत से जमानत मिल जाने के कारण रॉबर्ट वाड्रा को तात्कालिक तौर पर जेल जाने का खतरा टल गया है। अब 10 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी होंगी।

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