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कानपुर में ‘I Love Muhammad’ ट्रेंड से बवाल, देशभर में क्यों भड़के मुस्लिम, निकाल रहे हैं जुलूस?

कानपुर, उत्तर प्रदेश से शुरू हुआ ‘I Love Muhammad’ विवाद तेजी से पूरे देश में फैल गया है, जिसने साम्प्रदायिक तनाव को नई ऊंचाई दे दी है। 4 सितंबर 2025 को ईद-ए-मिलाद-उन-नबी के जश्न के दौरान, सैयद नगर इलाके में मुस्लिम समुदाय ने पैगंबर मुहम्मद (सल्ल.) के प्रति प्रेम व्यक्त करने के लिए ‘I Love Muhammad’ के बैनर और लाइट बोर्ड लगाए। यह जगह राम नवमी जुलूस के रास्ते पर होने के कारण हिंदू संगठनों ने इसे ‘नई परंपरा’ बताते हुए विरोध किया, जिससे तीखी बहस हुई। पुलिस ने शांति बनाए रखने के लिए बैनर हटवा दिए, लेकिन 9 सितंबर को रावतपुर थाने में 9 नामजद और 15 अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर दी, जिसमें ‘साम्प्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने’ का आरोप लगाया गया।

पुलिस का कहना है कि सार्वजनिक सड़क पर टेंट लगाना और नई प्रथा शुरू करना कानून-व्यवस्था के लिए खतरा था। डीसीपी दिनेश त्रिपाठी ने कहा, “किसी नई ट्रेंड की अनुमति नहीं दी जा सकती।” लेकिन मुस्लिम नेताओं ने इसे धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला करार दिया। एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने ट्वीट कर कहा, “पैगंबर से प्रेम करना अपराध कैसे? अल्लामा इकबाल की ये पंक्तियां याद रखें।” वर्ल्ड सूफी फोरम चेयरमैन हजरत सैयद मोहम्मद अशरफ किशौचवी ने इसे ‘मुस्लिम-विरोधी साजिश’ बताया और चेतावनी दी कि अगर प्रेम अपराध है, तो हम जीवनभर यही ‘अपराध’ करेंगे।

इस एफआईआर के खिलाफ सोशल मीडिया पर #ILoveMuhammad ट्रेंड वायरल हो गया, जिसके बाद देशभर में मुस्लिम जुलूस शुरू हो गए। मुंबई में सैकड़ों ने बैनर लेकर शांतिपूर्ण मार्च निकाला, जबकि महाराष्ट्र के परभणी, बिहार और हैदराबाद में भी विरोध प्रदर्शन हुए। परभणी में मुस्लिमों ने हिंदू भाइयों के साथ एकता दिखाते हुए जुलूस निकाला। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि यह घटना उत्तर प्रदेश में धार्मिक अभिव्यक्ति पर बढ़ते दबाव को दर्शाती है, जहां हिंदू राष्ट्रवादी गतिविधियों पर कम सख्ती होती है।

यह विवाद भारत की बहुलतावादी छवि पर सवाल उठा रहा है। क्या सरकारी तंत्र नफरत फैला रहा है? विशेषज्ञों का मानना है कि आर्थिक मंदी के दौर में साम्प्रदायिक तनाव देश को और अस्थिर कर सकता है। मुस्लिम समुदाय का संकल्प साफ है: पैगंबर का प्रेम कभी दबेगा नहीं। लेकिन शांति बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।

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